महिला दिवस पर भाषण | 5+ Women’s Day Speech In Hindi

संस्कृत में एक श्लोक है-

यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता:।

अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है। प्राचीन भारत में महिलाओं का बहुत सम्मान किया जाता था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, महिलाओं की स्थिति में भारी बदलाव आया। महिलाओं के प्रति लोगों का नजरिया बदलने लगा था। बहुविवाह, सती प्रथा, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या आदि जैसे मामले आम बात होते जा रहे थे। बिगड़ते हालात को देखकर महान नेताओं और समाज सुधारकों ने इस दिशा में काम करने का फैसला किया।

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उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि महिलाओं की बिगड़ती स्थिति पर काबू पाया जा सका। उसके बाद भारतीय सरकार ने भी इस दिशा में काम किया। सरकार ने पंचायती राज प्रणाली में 33% सीट महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी ताकि वे आगे आकर समाज की भलाई के लिए कार्य कर सके। आज महिलाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर और सक्षम हैं।

महिलाओं ने आज हर क्षेत्र में खुद को बेहतर साबित किया है और अपनी प्रतिभा का लोहा न सिर्फ देश में बल्कि विदेश में भी मनवाया है, इसलिए महिलाओं के सम्मान और सराहना करने के लिए हर 8 मार्च को हर साल अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के रुप में मनाया जाता है।

इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों और शक्ति का एहसास कराना, समाज में महिलाओं के प्रति तुच्छ मानसिकता को बदलना, महिलाओं की शिक्षा और विकास को बढ़ावा देना और समाज में और महिलाओं के प्रति उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का मनोबल बढ़ाना है।  महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना पैदा करना है।

आज का ये आर्टिकल women’s day speech in hindi महिलाओं को समर्पित है महिला दिवस के अवसर पर हम कुछ भाषण लेकर आए हैं, हो सकता है आपको कहीं ये अवसर प्राप्त हो कि आपको कहीं महिलाओं को संबोधित करना पड़े या स्कूल या कॉलेज में महिला दिवस पर आर्टिकल लिखना हो तो ये आपके काम आ सकता है तो चलिए शुरू करते हैं-


Women’s Day Speech In Hindi – महिला दिवस पर भाषण


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नमस्कार ,

दोस्तों आज के इश्स शुभ अवसर पर में आप सभी का अभिनंदन करती हूँ साथ ही यहाँ उपस्थित सभी माताओं और बहनो को सादर प्रणाम करती हूँ | दोस्तों हम सब जानते हैं प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को पूरे विश्व में महिलाओं के योगदान एवं उपलब्धियों की तरफ लोगो का ध्यान क्रेंदित करने के लिए महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।

महिला दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य नारी को समाज में एक सम्मानित स्थान दिलाना और उसके स्वयं में निहित शक्तियों से उसका ही परिचय कराना होता है। इतिहास पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि महिलाओं ने पुरुषों के सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए अपना जीवन दांव पर लगा दिया। महिलाओं की इस वीरता के कारण यह कहावत सार्वभौमिक रूप से स्वीकार की गई कि हर पुरुष की सफलता के पीछे एक महिला होती है।

दुनिया भर में पुरुषों के योगदान की सराहना की जाती है यह सर्वविदित है कि समाज में पुरुषों का योगदान महिलाओं के योगदान के बराबर है लेकिन पुरुषों को समाज में जिस तरह का सम्मान मिलता है वह महिलाओं को नहीं मिल पाता है। इसका मुख्य कारण महिलाओं के बारे में समाज की संकीर्ण सोच है लेकिन अब समय बदल गया है कुछ साल पहले तक कई ऐसे खेल थे जिनमें महिलाओं को खेलने से रोका जाता था क्योंकि वे शारीरिक रूप से कमजोर थीं आज वे लहरा रही हैं उन खेलों में उनका झंडा। चाहे वह बॉक्सिंग हो वेटलिफ्टिंग हो बैडमिंटन हो या टेनिस।

इसमें कोई शक नहीं कि आज महिलाएं पहले से ज्यादा ताकतवर और सक्षम हैं और उनकी स्थिति में भी पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है।शायद यही वजह है कि आज देश के ऊंचे पदों पर महिलाएं राज कर रही हैं, वहीं म्लाला जैसी लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठा रही हैं वहीं मैरीकॉम और स्मृति मंधना जैसी महिलाओं ने खेल जगत में गर्व से सिर ऊंचा किया।


लेकिन शर्म की बात है कि आज भी कई ऐसी जगह हैं जहां महिलाओं को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है और आज भी उन्हें घर की चारदीवारी में कैद करके रखा जाता है या जन्म लेने से पहले ही उनकी भुरूण हत्या करदी जाती है कोई भी देश यश के शिखर पर तब तक नहीं पहुंच सकता जब तक उसकी महिलाएं कंधे से कन्धा मिला कर ना चलें महिलाओं को दुनिया मैं आधी आबादी ऐसे ही नही कहा जाता है।

आज महिलायें हर क्षेत्र मैं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला के चल रही हैं या ये कह सकते हैं की वे पुरुषों से आगे ही हैं मैं प्रत्येक महिला को ये कहना चाहूँगी की अपने पैरों पेर खड़ी होके अपने आत्म सम्मान के लिए लड़ें महिलाएं यानि कि आधी आबादी के बिना किसी भी समाज या देश के विकास के बारे में नहीं सोचा जा सकता है क्योंकि महिलाएं न केवल एक परिवार का मुख्य आधार हैं और परिवार को एक साथ बांधने का काम करती हैं, बल्कि देश की प्रगति और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हालांकि लगातार घट रही महिलाओं की संख्याए कन्या भ्रूण हत्या, दहेज हत्या, घरेलू हिंसा के बढ़ते मामले एवं महिलाओं का शोषण उत्पीड़न आज समाज में चिंता का विषय है।

21वीं सदी में भी जहां आधुनिक सोच लोगों पर हावी थी, आज भी कई महिलाएं गुलामी का दंश झेल रही हैं। आज भी महिलाओं को अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ता है। वर्तमान समय में इसमें कोई संदेह नहीं है कि महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है और आज समाज महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर खुलकर बात करता है और महिलाओं के विकास और संवर्धन के लिए और कदम उठाए जा रहे हैं।

वहीं अंतराष्ट्रीय महिला दिवस का सेलिब्रेशन भी महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बेहतर प्रयास है। महिलाओं को जहां पहले घर की चार दीवारी में कैद कर रखा जाता था। वहीं आज महिलाएं सर्वोच्च पदों पर बैठकर देश.दुनिया का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

देखा जाए तो महिलायें अपने आप में कभी भी कमज़ोर नही थी ज़रूरत है, बस उनको आयेज बढ़ने का मौका देने की हम प्राचीन काल से ही महिल्लाओं के शौर्य की कहानियाँ सुनते आए हैं जैसे रानी लक्ष्मी बाई, अहिल्या बाई होलकेर, रानी पद्मावती, चाँद बीवी आदि इनके अलावा किरण बेदी,सायना नेहवाल,इंदिरा गांधी, सरोजनी नायडू, पीवी सिंधु, पीटी ऊषा जैसी महिलाओं ने पुरुषों के प्रभुत्व वाले समाज में न सिर्फ अपनी प्रतिभा को साबित किया बल्कि तमाम संघर्ष और मेहनत के बल पर बड़े.बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

ऐसी महिलाओं से सीख लेकर हम सभी को आगे बढ़ना चाहिए कोई बढ़ा इतनी बड़ी नही हो सकती जो तुम्हारा रास्ता रोक ले तुम वो शक्ति हो जो नया जीवन प्रदान करती हो नारी की शक्ति तो देवताओं ने भी मानी है तभी तो नारी को देवी का रूप कहा जाता है।

इसके साथ ही इस महिला दिवस पर हम सभी को महिलाओं का सम्मान करने का संकल्प लेना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए, तभी हमारे देश की बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगी और देश के विकास में अपना योगदान दे सकेंगी। इसके साथ हमारी सरकार का भी ये फ़र्ज़ है की वे हमारे देश की महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर दे और उनकी सुरक्षा पर कार्य करे इसी के साथ में अपने भाषण का अंत करती हूँ।

तोड़ के पिंजरा
जाने कब उड़ जाऊँगी मैं
लाख बिछा दो बंदिशे
फिर भी आसमान मैं जगह बनाऊंगी मैं
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ
भले ही रूढ़िवादी जंजीरों से बांधे है दुनिया ने पैर मेरे
फिर भी इसे तोड़ जाऊँगी
मैं किसी से कम नहीं सारी दुनिया को दिखाऊंगी
जो हालत से हारे ऐसी नहीं मैं लाचारी हूँ
हाँ गर्व है मुझे मैं नारी हूँ

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Women’s Day Speech – महिला दिवस पर भाषण


Womens Day Speech
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आज के हमारे आदरणीय मुख्य अतिथि, आयोजक और विशिष्ट अतिथि को मेरा हार्दिक अभिनन्दन !
आज हम सभी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। 8 मार्च को मनाए जाने वाले महिला दिवस का महत्व हर साल बढ़ता ही जा रहा है। आज महिलाओं के प्रति अपने प्यार, प्रशंसा, सम्मान और अपनेपन को व्यक्त करने का अवसर है। मैं इस अवसर पर अपने जीवन में उन सभी महिलाओं को धन्यवाद देना चाहती हूं जिन्होंने मेरे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मैं तहे दिल से इन महिलाओं का आभार व्यक्त करती हूं उन्होंने मेरे जीवन की सभी परेशानियों में मेरा साथ दिया। मेरी मां ने मुझे एक बेहतर इंसान बनाया है। मैं आप सभी से आग्रह करना चाहूँगी कि आप भी नारी शक्ति को पहचानें, उनका महत्व जानें और भविष्य में उनका समर्थन करते रहें।

मां है वो बेटी है वो
बहन है वो तो कभी पत्नी है वो
जीवन के हर सुख दुःख में शामिल है
वो शक्ति है वोए प्रेरणा है वो!
नमन है उन सब नारियों को
जीवन के हर मोड़ पर हमारा साथ देती हैं।

आज अगर महिलाओं की स्थिति की तुलना सैकड़ों साल पहले की स्थिति से की जाए तो ऐसा लगता है कि महिलाएं अपने सपनों को पहले से कहीं ज्यादा तेजी से पूरा कर रही हैं। लेकिन वास्तविक संदर्भ में महिलाओं का विकास सभी दिशाओं में नहीं दिख रहा है खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने के बाद भी समाज की बेड़ियों को तोड़ने में अभी लंबा सफर तय करना है। आज भी महिलाओं का समाज के भेदभाव की नजर से बचना नामुमकिन सा लगता है। ऐसा लगता है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच इस अंतर को भरने में काफी समय लग सकता है।

कई मौकों पर यह देखा गया है कि महिलाओं के साथ निम्न दर्जे का व्यवहार किया जाता है। ऑफिस में भी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने से मना कर दिया जाता है। कई महिलाएं इस को अपना भाग्य मानती हैं और जो उनके साथ हो रहा है उसी से अपना जीवन यापन करती हैं। लेकिन सबके साथ ऐसा नहीं होता। समाज में ऐसी कई महिलाओं के उदाहरण भी हैं जो युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं। इनमें ऐसी लड़कियां भी हैं जिनका अपना परिवार उनका साथ देने को तैयार नहीं था लेकिन उन्होंने अपने दम पर समाज की विचारधारा को बदल दिया।


नारी के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उनकी प्रतिभा को केवल इस तर्क पर अनदेखा करना पागलपन कहा जाएगा कि वे पुरुषों की तुलना में कम शक्तिशाली और कम गुणी हैं। महिलाएं भारत की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। अगर उनकी क्षमता का ख्याल नहीं रखा गया तो इसका साफ मतलब है कि देश की आधी आबादी अशिक्षित रह जाएगी और अगर महिलाएं शिक्षित नहीं होंगी तो वह देश कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा। हमें यह समझना होगा कि अगर एक महिला अनपढ़ होकर घर को इतनी अच्छी तरह से चलाती है, तो एक शिक्षित महिला समाज और देश को कितनी अच्छी तरह संभालेगी।

महिलाएं परिवार बनाती हैं, परिवार घर बनाता है, घर समाज बनाता है और समाज ही देश बनाता है। इसका सीधा सा मतलब है कि महिलाओं का योगदान हर जगह है। शिक्षा और महिला ससक्तिकरण के बिना परिवारए समाज और देश का विकास नहीं हो सकता। महिला यह जानती है की उसे कब और किस तरह से मुसीबतों से निपटना है। जरुरत है तो बस उसके सपनों को आजादी देने की।इसी के साथ में अपने वाक्यों को इन पंक्टिओं के साथ विराम देनादेना चाहूँगी।

मैं अबला नादान नहीं हूं
दबी हुई पहचान नहीं हूं
मैं स्वाभिमान से जीती हूं
रखती अंदर ख़ुद्दारी हूं
मैं आधुनिक नारी हूं।


International Women’s Day Speech – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भाषण


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नमस्कार,
आप सभी को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आज महिला सशक्तिकरण की सबसे ज्यादा चर्चा होगी। लेकिन महिला सशक्तिकरण क्या है यह कोई नहीं जानता। महिला सशक्तिकरण एक विवेकपूर्ण प्रक्रिया है। हमने अत्यधिक महत्वाकांक्षा को सशक्तिकरण के रूप में लिया है। मेरा मानना है कि महिलाओं को सम्मान देने के लिए सिर्फ एक दिन काफी नहीं है। अगर हमें वाकई महिलाओं को सम्मान देना है तो महिलाओं को एक ऐसा सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए जहां वे बिना किसी डर के आगे बढ़ने में सक्षम हो।

नारी को सृष्टि की शक्ति माना गया है अर्थात मानव जाति का अस्तित्व स्त्री से ही माना जाता है। महिला सशक्तिकरण का अर्थ है इस सृष्टि की शक्ति को विकसित और परिष्कृत करना और इसे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय, विचार, विश्वास,धर्म और पूजा की स्वतंत्रता अवसर की समानता प्रदान करना।

आसान शब्दों में कहें तो महिला सशक्तिकरण को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि यह महिलाओं को वह शक्ति प्रदान करता है जिससे वह अपने जीवन से जुड़े हर निर्णय खुद ले सकती है और परिवार और समाज में अच्छी तरह से रह सकती है। महिला सशक्तिकरण उन्हें समाज में उनके वास्तविक अधिकारों को प्राप्त करने में सक्षम बनाना है।

महिला सशक्तिकरण आज के आधुनिक समय में विशेष चर्चा का विषय है। हमारे प्राचीन ग्रंथों में महिलाओं के महत्व को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” अर्थात जहां महिलाओं की पूजा की जाती है वहां देवताओं का वास होता है। लेकिन विडंबना देखिए एक महिला में इतनी शक्ति होने के बावजूद उसके सशक्तिकरण की बहुत जरूरत है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से तात्पर्य उनके आर्थिक निर्णयों ,आय,संपत्ति और अन्य चीजों की उपलब्धता से है। इन सुविधाओं को प्राप्त करके ही वे अपनी सामाजिक स्थिति को बढ़ा सकती हैं।राष्ट्र के विकास में महिलाओं के महत्व और अधिकारों के बारे में समाज में जागरूकता लाने के लिए सरकार द्वारा मातृ दिवस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आदि जैसे कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। महिलाओं को कई क्षेत्रों में विकास की जरूरत है।

भारत में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों की हत्या करने वाली उन सभी राक्षसी सोच को खत्म करना जरूरी है जैसे दहेज प्रथा, निरक्षरता, यौन हिंसा, असमानताए, भ्रूण हत्या, महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा, वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी और ऐसे अन्य विषय। हमारे देश में उच्च स्तर की लैंगिक असमानता है। जहां महिलाएं अपने परिवार के साथ-साथ समाज के बाहर भी बुरे बर्ताव का शिकार हो रही हैं। भारत में निरक्षर महिलाओं की संख्या सबसे ऊपर है। महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ तब समझ में आएगा जब उन्हें भारत में अच्छी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें हर क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम बनाया जाएगा।

मनुस्मृति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवता प्रसन्न होते हैं हालांकि महिलाओं को पूरी दुनिया में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है| लेकिन भारतीय संस्कृति और परंपरा में सदियों से महिलाओं का विशेष स्थान है।

फिर भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर वर्तमान में खुले दिमाग से आकलन करें तो हम पाते हैं कि महिलाओं को जो सम्मान दिया जाता है उसके बाद भी यह दो भागों में बंटा हुआ है। एक तरफ पूरी तरह से दबी हुईए कुचली हुई अशिक्षित और पिछड़ी महिलाएं हैं तो दूसरी तरफ महिलाएं प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रही हैं कई मामलों में महिलाएं पुरुषों से आगे नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।

आधुनिक युग में कई भारतीय महिलाएं कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक पदों पर तैनात हैं फिर भी सामान्य ग्रामीण महिलाएं अपने घरों में रहने को मजबूर हैं और उनके पास सामान्य स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा जैसी सुविधाएं नहीं हैं। भुगतान में असमानता भी भारत में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता का एक अन्य मुख्य कारण है। एक अध्ययन से पता चला है कि समान अनुभव और योग्यता होने के बावजूद भारत में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में 20 प्रतिशत कम वेतन दिया जाता है।

भारत की लगभग ५० प्रतिशत जनसंख्या केवल महिलाओं की है अर्थात इस आधी जनसंख्या की आवश्यकता पूरे देश के विकास के लिए हैए जो अभी भी सशक्त नहीं है और कई सामाजिक प्रतिबंधों से बंधी हुई है। ऐसे में हम यह नहीं कह सकते कि हमारी आधी आबादी को मजबूत किए बिना हमारा देश भविष्य में विकास कर पाएगा। महिला सशक्तिकरण के लिए भारत सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें से कई योजनाएं रोजगारए कृषि और स्वास्थ्य जैसी चीजों से जुड़ी हैं। ये योजनाएं भारतीय महिलाओं की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बनाई गई हैं ताकि समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।

इनमें से कुछ प्रमुख योजना मनरेगा, सर्व शिक्षा अभियान,बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना, जननी सुरक्षा योजना मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए चलाई गई योजना आदि हैं। आज देश में महिला शक्ति को हर तरह से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका परिणाम भी देखने को मिल रहा है। आज देश की महिलाएं जागरूक हो गई हैं। आज की नारी ने यह सोच बदल दी है कि वह घर और परिवार की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से निभा सकती है।

पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाली आज की महिलाएं सबसे बड़े कार्य क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। चाहे वह मजदूरी के लिए काम हो या अंतरिक्ष में जाना। महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित कर रही हैं। महिला सशक्तिकरण महिलाओं को वह मजबूती प्रदान करता हैए जो उन्हें उनके हक के लिए लड़ने में मदद करता है। हम सभी को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए।

इक्कीसवीं सदी महिलाओं के जीवन में सुखद संभावनाओं की सदी है। महिलाएं अब हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। आज की नारी अब जाग्रत और सक्रिय हो गई है। वर्तमान में महिलाओं ने रूढ़ियों को तोड़ना शुरू कर दिया है। यह एक खुशी का संकेत है। हालांकि लोगों की सोच बदल रही है, लेकिन इस दिशा में अभी और प्रयास करने की जरूरत है। अंत में मैं इस कविता के साथ अपना भाषण समाप्त करना चाहूँगी-

मैं आज की नारी हूँ । ना तो मैं अबला हूँ ।
ना तो लाचार हूँ ।मैं अपने पैरों पर खड़ी
स्वतंत्र जिंदगी जीती हूँ ।मैं आज की नारी हूँ ।
मैं अपनी परमपराएँ खुद बनाती हूँ ।
ना तो मैं सती हूँ ना तो देवी हूँ ।


आज के युग की मैं सामान्य नारी हूँ ।
अपनी तकदीर की रेखाएँ खुद बनाती हूँ ।
अपने दोनों हाथों में अपनी मान मर्यादा को लेकर आगे बढ़ती हूँ ।
मैं आज की नारी हूँ । मेरा पति मेरा परमेश्वर नहीं
किंतु मेरा जीवन-साथी ए मेरा दोस्त और मेरा हमसफर है।
जिनसे कदम से कदम मिलाकरअपनी लक्ष्मण रेखा खुद खींचती हूँ ।
अपनी और अपने परिवार की रक्षा करती हूँ ।
मैं आज की नारी हूँ ।

International Womens Day Speech
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FAQ

Q.1 महिला सम्मान दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने, उनमें जागरूकता बढ़ाने के लिए कई विषयों पर जोर दिया जाता है।

Q.2 भारत में महिला दिवस किसकी याद में मनाया जाता है?
उत्तर- भारत में महिला दिवस भारत कोकिला कही जाने वाली सरोजिनी नायडू के जन्मदिन 13 फरवरी को मनाया जाता है। सरोजिनी नायडू एक ऐसी कवयित्री थीं जो बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि से संपन्न थीं। महात्मा गांधी ने उन्हें भारत कोकिला की उपाधि दी थी।


Final Words On Women’s Day Speech In Hindi


नारी शक्ति अतुलनीय है और शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती। दोस्तों हमारी आज की पोस्ट women’s day speech in hindi का एकमात्र उद्देश्य महिलाओं के शोषण को समाप्त करना है। लेकिन भारत में ऐसे कई देश हैं या कई ऐसे गांव और कस्बे हैं जहां आज भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, जहां आज भी महिलाओं का शोषण होता है, वे घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं, उनके साथ भेदभाव किया जाता है , उनको अधिकारों से वंचित किया जाता है।
हम चाहते हैं कि महिलाओं को भी समाज में पुरुषों के समान सम्मान और सम्मान मिले। इसलिए मैंने महिलाओं के सम्मान के पक्ष में कुछ speech लिखी हैं, अच्छा लगे तो शेयर जरूर करें।

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