Dussehra 2022 में कब है ? शुभ मुहूर्त व संपूर्ण पूजा विधि

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भारत त्योहारों का देश हैं जहां पूरे साल अलग अलग त्योहार बड़ी ही धूमधाम से मनाए जाते हैं। त्योहार कोई भी क्यूँ ना हो इनके आने से जीवन में उत्साह की एक नयी लहर दौड़ जाती है त्योहार लोगों में नयी ऊर्जा का संचार करते हैं, ऐसे ही एक त्योहार dussehra 2022 के बारे में जानकारी लेकर आज हम आपके समक्ष आए हैं इस लेख में आप पढ़ेंगे की दशहरा कब मनाया जाता है, कैसे मनाया जाता है और इसे मनाने के पीछे क्या कारण है आदि।

भारत में मनाए जानें वाले त्योहारों को हम तीन प्रकार से बांट सकते हैं जैसे राष्ट्रीय त्योहार, धार्मिक त्योहार और मौसमी त्योहार। सभी त्योहारों का अपना एक विशेष महत्त्व है और इन्हें मनाने का तरीका भी अलग अलग है। राष्ट्रीय त्योहारों में गणतंत्र दिवस, 15 अगस्त, शिक्षक दिवस, 2 अक्टूबर गांधी जयंती आदि त्योहार प्रमुख हैं। धार्मिक त्योहारों में होली, दिवाली, ईद, क्रिसमस आदि शामिल हैं और मौसमी त्योहरों में मकर संक्रांति, लोहड़ी, बैसाखी, पोंगल आदि बहुत से त्योहार हैं।

dussehra 2021

दशहरा हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे विजयदशमी या दशहरा के नाम से जाना जाता है। पारंपरिक और धार्मिक दृष्टि से इस पर्व का बहुत अधिक महत्व है। भारतीय लोग इसे बड़े उत्साह और विश्वास के साथ मनाते हैं। इस पर्व को सभी हिन्दू बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं।

यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत यानी पाप पर पुण्य की जीत का भी प्रतीक है। लोग इसे कई रीति-रिवाजों और पूजा के माध्यम से मनाते हैं। विजयादशमी/दशहरा का त्योहार हर साल दीवाली से दो हफ्ते पहले सितंबर के अंत और अक्टूबर में पड़ता है। यह महीना बहुत ही शुभ होता है। इस महीने में हल्की सर्दी का मौसम होता है। इस महीने में न ज्यादा गर्मी होती है और न ही ज्यादा सर्दी।

दशहरे का महत्व Importance of dussehra 2022 –

“दशहरा” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द ‘दश- हर’ से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ दस बुराइयों से छुटकारा पाना है। हिंदू परंपरा में दशहरे को बहुत धूमधाम से मनाया जाता हैं, यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में मनाया जाता हैं आज के दिन माँ दुर्गा और भगवान राम की पूजा करने से भक्तों की परेशानियाँ दूर हो जाती हैं, प्राचीन मान्यताओं के अनुसार योद्धा आज के दिन शस्त्रों और शास्त्रों की पूजा की जाती है, ऐसा करके वे अपनी जीत का जश्न मनाते हैं।

किसान भाई भी नई फसलों की खुशी में जश्न मनाते हैं, धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया था और एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था कहा जाता है कि आज के दिन जो भी काम किया जाता है उसका लाभ अवश्य मिलता है प्राचीन समय में राजा विजय की प्रार्थना करते हुए इस दिन युद्ध के लिए जाते थे। इस दिन विभिन्न स्थानों पर मेले लगते हैं।

दशहरा कब मनाया जाता है When is dussehra celebrated –

नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा मनाया जाता है। दशहरा का त्यौहार पूरे भारत में उत्साह और धार्मिक भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम ने राक्षस रावण का वध किया था और माता सीता को उनकी कैद से मुक्त कराया था। राम-रावण युद्ध नवरात्रों के दौरान हुआ था। अष्टमी-नवमी की अवधि के दौरान रावण की मृत्यु हो गई और उसका दाह संस्कार दसवें दिन हुआ। इसीलिए इस पर्व को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है।

2021 में दशहरा कब है When is dussehra in 2022-

दशहरा का पर्व तिथि 15 अक्टूबर 2021
दशमी तिथि प्रारंभ14 अक्टूबर शाम 6 बजकर 52 मिनट
दशमी तिथि समापन15 अक्टूबर 2021 शाम 6 बजकर 02 मिनट
श्रवण नक्षत्र प्रारंभ14 अक्टूबर 2021 सुबह 9 बजकर 30 मिनट
श्रवण नक्षत्र समाप्त15 अक्टूबर 2021 सुबह 9 बजकर 16 मिनट

पचांग के अनुसार इस वर्ष दशहरा का पर्व 15 अक्टूबर 2021 को मनाया जाएगा इस दिन चंद्रमा मकर राशि और श्रवण नक्षत्र रहेगा पंचांग के अनुसार इस दिन यानि 15 अक्टूबर 2021 को दोपहर 02:02 मिनट से 02:48 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा।

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दशहरा कैसे मनाया जाता है How is dussehra celebrated –

  • आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था इसी दिन मां दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध किया गया था
  • सनातन धर्म में आज का दिन बहुत शुभ माना जाता है और इस दिन भगवान राम और मां दुर्गा की पूजा की जाती है
  • दशहरा पर्व हमें यह सीख देता है की बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है
  • इस दिन रावण का पुतला जलाकर सभी लोग बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशियां मनाते हैं
  • दशहरे के दिन रामलीला की जाती है।
  • जोर-शोर से आतिशबाजी की जाती है।
  • इस दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाताहै।
  • दशहरे के दिन घरों में लोग अपने वाहनों को साफ़ करके उसका पूजन करते हैं
  • व्यापारी अपने लेखा का पूजन करते हैं
  • किसान अपने जानवरों एवम फसलो का पूजन करता हैं
  • इंजिनियर अपने औजारों एवम अपनी मशीनों का पूजन करते हैं
  • इस दिन क्षत्रियों के यहां शस्त्र की पूजा होती है।
  • नवरात्रि के पहले दिन जो लोग घट स्थापना करते हैं वे दशहरे के दिन अपने परिवारजनो के कान पर जौ लगते हैं।

दशहरा क्यों मनाया जाता है Why is dussehra celebrated –

दशहरा के दिन के पीछे कई कहानियां हैं, जिनमें प्रथम कहानी है भगवान राम और लंकापति रावण के बीच युद्ध की। श्री राम का युद्ध जीतना यानी रावण की बुराई को नष्ट करना और उसका अभिमान तोड़ना। राम अयोध्या नगरी के राजकुमार थे, उनकी पत्नी का नाम सीता था और उनके तीन भाई थे उनका छोटा भाई जिसका नाम लक्ष्मण था।

राजा दशरथ राम के पिता थे। राजा दशरथ की तीन पत्नियाँ थी कौशल्या, कैकयि, सुमित्रा उनकी पत्नी कैकेयी के कारण श्री राम ,लक्ष्मण और सीता तीनों को चौदह वर्ष के वनवास के लिए अयोध्या शहर छोड़ना पड़ा। उसी वनवास के दौरान रावण ने सीता का हरण किया था। रावण एक महान राजा था जो चतुर्वेदो को जानता था, लेकिन उसमें अत्यधिक अहंकार था।

वह एक महान शिव भक्त था और खुद को भगवान विष्णु का दुश्मन कहता था। दरअसल, रावण के पिता विश्रवा एक ब्राह्मण थे और उनकी माता राक्षस कुल की थी, इसलिए रावण को एक ब्राह्मण के समान ज्ञान और एक राक्षस की शक्ति थी, और रावण में इन दोनों चीजों का अहंकार था। इसे खत्म करने के लिए भगवान विष्णु ने रामावतार लिया। श्री राम ने अपनी पत्नी सीता को वापस लाने के लिए रावण से युद्ध किया, जिसमें वानर सेना और हनुमान जी ने श्री राम का साथ दिया।

इस युद्ध में रावण के छोटे भाई विभीषण ने भी भगवान श्री राम का साथ दिया और अंत में भगवान राम ने रावण का वध किया और उसके अभिमान को नष्ट कर दिया।इसी घटना की याद के फलस्वरूप इस त्योहार को मनाया जाता है यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

दूसरी कथा इस प्रकार है – प्राचीन काल में महिषासुर नाम का एक राक्षस तपस्या कर रहा था, उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने उसे अजेय होने का वरदान दिया, वरदान प्राप्त करने के बाद महिषासुर अधिक हिंसक हो गया, पृथ्विलोक पर चारों ओर उसका आतंक फैल चुका था। महिषासुर ने स्वर्ग में देवताओं पर आक्रमण किया था। महिषासुर बहुत ही शक्तिशाली था जिसके कारण उसे कोई भी हरा नहीं सकता था।

उस समय ब्रह्मा, विष्णु और शिव भगवान के द्वारा एक आंतरिक शक्ति का निर्माण किया गया जिनका नाम दुर्गा रखा गया था। महिषासुर के आतंक से बचने के लिए देवताओं ने देवी दुर्गा को अपने हथियार दिए थे। उसके बाद देवी दुर्गा और अधिक शक्तिशाली हो गईं, उसके बाद देवी दुर्गा ने महिषासुर को खत्म करने के लिए 9 दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन महिषासुर को मारने के बाद, देवी दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी कहा गया। बंगाल में देवी दुर्गा की इसी विजय के कारण विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है।

दशहरे से जुड़ी अन्य कहानियाँ Stories related to dussehra –

1-श्री राम और रावण का युद्ध
2-देवी दुर्गा और महिसासुर का युद्ध
3-पांडवों का वनवास से लौटना
4-देवी सती का अग्नि में समाना

दशहरे की सीख Lessons of dussehra –

  • मनुष्य चाहे कितना भी विद्वान क्यूँ ना हो लेकिन उसके अंदर अहंकार और बुराई है तो उसका सर्वनाश निश्चित है।
  • हमें भी अपनी बुराइयों को त्यागकर अच्छाइयों को ग्रहण करना चाहिए तभी यह दिन सार्थक सिद्ध होगा।
  • हमे अपने मन के अंदर व्याप्त बुराई, लालच, घमंड, ईर्ष्या रूपी रावण का अंत कर सच्चाई और अच्छाई की रह पर चलना चाहिए।

दशहरे के बारे में कुछ प्रमुख बातें

  • दशहरा (विजयादशमी या आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है।भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।
  • नेपाली दशहरे की एक ख़ास बात होती है कि वहां इस मौके पर पशुओं की बलि चढ़ाई जाती है इसके चलते बकरे, भैंसे, बत्तखों की ख़ूब बिक्री होती है नेपाल में इस मौके पर स्थानीय नेवार समुदाय के लोग नृत्य करके जश्न मनाते हैं और अलग अलग देवी देवताओं के मास्क पहन कर सामुदायिक तौर पर उत्सव में शरीक होते हैं
  • शस्त्र पूजन की परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है, जानकारों के अनुसार शास्त्र की रक्षा और आत्मरक्षा के लिए धर्मसम्म्त तरीके से शस्त्र का प्रयोग होता रहा है। प्राचीन समय में क्षत्रिय युद्ध पर जाने के लिए इस दिन का ही चुनाव करते थे। उनका मानना था कि दशहरा पर शुरू किए गए युद्ध में विजय निश्चित होगी।
  • मध्य प्रदेश में इस दिन भगवान राम, देवी अपराजिता तथा शमी के पेड़ की पूजा की जाती है
  • दशहरे से नौ दिन पहले नवरात्रा होता है, इसमें नौ दिनों तक देवी की अराधना भी होती है।
  • इन दिनों रामलीला भी होती है और दशहरे के दिन रावण के वध के साथ इसका समापन होता है।
  • दशहरे के दिन स्कूल और सरकारी दफ़्तर बंद रहते हैं।
  • दशहरे को विजयादशमी या आयुधपूजा के नाम से भी जाना जाता है।
  • अँग्रेज़ी कॅलंडर के अनुसार दशहरा का त्योहार सितंबर माह के अंत और अक्तूबर माह की शुरुआत में आता है।
  • इसी दिन नया कार्य, उद्योग आदि प्रारंभ करना शुभ माना जाता है तथा माना जाता है कि इस दिन प्रारंभ किए गए कार्य में सफलता मिलती है

दशहरे का मेला और रामलीला मंचन Dusshera mela –

दशहरे से दस दिन पहले रामलीला की जाती है। दशहरे का महत्व रामलीलाओं के लिए जाना जाता है। रामलीला भारत के हर शहर और गांव में दिखाई जाती है। दिल्ली की हर कॉलोनी में रामलीला का आयोजन होता है।रामलीला मंचन के द्वारा वास्तविक लोग रामायण के पात्रों और उनके इतिहास को बताते है। दशहरा के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। उस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। ज्यादातर लोग इन पुतलों को देखने आते हैं।

रामलीला के अलावा दशहरे के दिन खूब आतिशबाजी भी होती है जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। आतिशबाजी प्रतियोगिता कई शहरों में आयोजित की जाती है जिनमें आगरा शहर प्रमुख है। जो सबसे अच्छी आतिशबाजी करता है उसे पुरस्कृत किया जाता है। आतिशबाजी दिखाने के बाद रामचंद्र जी रावण का वध करते हैं। फिर एक-एक कर पुतलों में आग लगा दी जाती है। सबसे पहले कुंभकर्ण का पुतला जलाया जाता है। उसके बाद मेघनाद के पुतले में आग लगा दी जाती है और उसके बाद रावण के पुतले में आग लगा दी जाती है।

रावण का पुतला सबसे बड़ा होता है। उसके दस सिर होते हैं और दोनों हाथों में तलवार और ढाल है। श्रीराम रावण के पुतले को आग के गोले से जलाते हैं। रावण के पुतले में आग लगने के बाद सभी दर्शक अपने-अपने घर चले जाते हैं। इस दिन घर के सभी पुरुष और बच्चे दशहरा मैदान में जाते हैं। सभी शहरवासियों के साथ इस शानदार जीत का जश्न मानते हैं। लोग शमी की पत्तियाँ तोड़ कर घर लाते हैं जिन्हे सोना – चाँदी का प्रतीक माना जाता है घर में आने के बाद घर की महिलाएं आरती उतारकर दरवाजे पर तिलक लगाकर उनका स्वागत करती हैं।

ऐसा माना जाता है कि मनुष्य अपनी बुराई को जलाकर घर लौटा है, इसलिए उसका स्वागत किया जाता है। इसके बाद वह व्यक्ति शमी पत्र देकर और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है। इस तरह घर के सभी लोग पड़ोस और रिश्तेदारों के पास जाते हैं और शमी को पत्र देते हैं और बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं, छोटों को प्यार देते हैं और समानों को गले लगाकर खुशियां बांटते हैं।

मेले में विभिन्न प्रकार के मिष्ठान और पकवानो की दुकानें सजती हैं। बच्चे अपने मनपसंद खिलौनों की दुकानो की तरफ आकर्षित होते हैं और मेले से तीर-कमान, धनुष, गदा आदि ज़रूर लेकर आते हैं।

निष्कर्ष Conclusion

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