Sharad Navratri 2022: शरद नवरात्र मुहूर्त एवं पूजा विधि

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आज इस पोस्ट sharad navratri 2022 में हम आपके लिए नवरात्री से सम्बंधित पूरी जानकारी लेकर आए हैं। इस पोस्ट में हमने देवी दुर्गा के रूपों का भी वर्णन किया है। दोस्तों हिंदी कैलेंडर के अनुसार साल में 4 बार नवरात्रि मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि और चैत्र और शारदीय नवरात्रि मुख्य रूप से दो बार मनाई जाती है।

नवरात्रि का अर्थ है नौ रातें। नौ दिनों तक चलने वाली शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। चैत्र माघ शरद और आषाढ़ महीनो में नवरात्री का त्यौहार होता है।

शरद और चैत्र महीने नवरात्री माँ दुर्गा के भक्तों के लिए विशेष मानी जाती है। जबकि माघ और आषाढ़ के महीने में पड़ने वाली नवरात्रि तांत्रिकों और अघोरियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

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नवरात्री कब है (Sharad Navratri 2022)-

नवरात्री प्रारम्भ7 अक्टूबर 2021गुरुवार
कलश स्थापना तिथि7 अक्टूबर 2021 गुरुवार
नवरात्री नवमी तिथि14 अक्टूबर 2021 गुरुवार
नवरात्री दशमी तिथि15 अक्टूबर 2021 शुक्रवार

नवरात्रि का पर्व क्यों मनाया जाता है Why is Navratri celebrated?

पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर नाम का दानव था जिसे वरदान मिला था की उसे न तो कोई स्त्री मार सकती है न कोई मानव और न ही कोई देवता इसलिए उसने पृथ्वी लोक और देवलोक में हाहाकार मचा रखा था। महिषासुर से रक्षा करने के लिए देवताओं ने आदि शक्ति की स्तुति की। जिससे सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली जिससे माँ दुर्गा का अवतरण हुआ।

देवी दुर्गा को देख महिषासुर ने उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा। माँ दुर्गा मान गई और कहा मेरी एक शर्त है। तुम्हें मेरे साथ युद्ध करना होगा अगर तुमने मुझे पराजित कर दिया तो मैं तुमसे विवाह करूंगी। महिषासुर मान गया और तब माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच घमासान युद्ध शुरू हो गया। यह युद्ध 9 दिनों तक चला।

दसवें दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया और देवताओं को महिषासुर के आंतक से मुक्त कराया। इसलिए तभी से दुर्गा पूजा या नवरात्रि का पर्व मनाया जाता हैदुर्गा सप्त्सती के अन्तर्गत देवी कवच स्तोत्र में अंकित श्लोक में नवदुर्गा के नाम क्रमश: दिये गए हैं-

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।।

कलश स्थापना का महत्व Importance of Kalash Installation –

घट स्थापना तिथि: – 7 अक्टूबर 2021, गुरुवार

शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि का पहला दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। प्रतिपदा तिथि यानी नवरात्रि के पहले दिन कलश की स्थापना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। इसलिए नवरात्रि पूजा से पहले घटस्थापना यानि कलश की स्थापना की जाती है। कलश को सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और शुभता देने वाला माना जाता है।

कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में रुद्र, जड़ में ब्रह्मा और बीच में देवी शक्ति का वास माना जाता है। नवरात्रि के समय, ब्रह्मांड में मौजूद शक्तियों को घाट में बुलाया जाता है और सक्रिय किया जाता है। इससे घर की सभी हानिकारक तरंगें नष्ट हो जाती हैं और घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। कलश स्थापना के बाद ही नवरात्री पर्व की विधि की शुरुवात मानी जाती है।

कलश स्थापना की विधि-

● प्रातः काल उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
● मंदिर की सफाई के बाद सफेद या लाल कपड़ा बिछाएं।
● इसके बाद इसके ऊपर चावल का ढेर बना लें।
● मिट्टी के बर्तन में जौ बो दें और उसके ऊपर पानी से भरा घट रखें।
● कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाएं, कलावा बांधें।
● एक नारियल लें, उस पर एक चुन्नी लपेटकर कलावा से बांधकर कलश पर स्थापित करें।
● कलश के अंदर एक सुपारी, अक्षत और सिक्का रखें।
● घट के ऊपर अशोक के पत्ते रखें और नारियल रखें।
● नारियल रखते समय मां दुर्गा का आह्वान करना न भूलें।
● अब दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
● घट स्थापना के समय सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी के बर्तन का उपयोग कर सकते हैं।

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के नाम –

शैलपुत्रीब्रह्मचारिणीचन्द्रघण्टा
कूष्माण्डास्कंदमाताकात्यायनी
कालरात्रिमहागौरीसिद्धिदात्री

शारदीय नवरात्र में माँ दुर्गा के 9 रूपों का वर्णन –

इस साल शरद नवरात्रि 7 अक्टूबर,गुरुवार से शुरू हो रही है। शक्ति का रूप मानी जाने वाली मां दुर्गा को समर्पित ये 9 दिन बेहद फायदेमंद होते हैं। इन 9 दिनों के दौरान, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और पूरे भारत में भक्ति और उल्लास का माहौल होता है।

प्रथम नवरात्रि – शैलपुत्री (7 अक्टूबर 2021, गुरुवार)-

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम अवतार मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। जिन्हें माता पार्वती के नाम से भी जाना जाता है और देवी शैलपुत्री को पहाड़ों की पुत्री भी कहा जाता है। देवी शैलपुत्री का वाहन बैल है।

द्वितीय नवरात्रि- ब्रह्मचारिणी (8 अक्टूबर 2021, शुक्रवार)

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। संस्कृत में ब्रह्म शब्द का अर्थ है तपस्या। इस रूप की पूजा करके हम मां दुर्गा के अनंत रूप को जानने का प्रयास करते हैं।

तृतीया नवरात्रि- चंद्रघंटा (9 अक्टूबर 2021, शनिवार)

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माता चंद्रघंटा का रूप चंद्रमा के समान होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा नाम दिया गया है। मां दुर्गा के चंद्रघंटा रूप में 10 भुजाएं हैं और माथे पर आधा चंद्रमा है। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से लड़ने का साहस मिलता है।

चतुर्थ नवरात्रि- कूष्माण्डा (9 अक्टूबर 2021, शनिवार)

कूष्माण्डा मां दुर्गा के चौथे अवतार हैं। मां दुर्गा के इस रूप को सृष्टि का जनक भी माना जाता है। माँ कुष्मांडा की पूजा करने से हमें खुद को उन्नत करने और अपने मन की सोचने की शक्ति को शीर्ष पर ले जाने में मदद मिलती है।

पंचम नवरात्रि- स्कंदमाता (10 अक्टूबर 2021, रविवार)

नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में भी जाना जाता है। स्कंदमाता की पूजा करने से हमारे आंतरिक व्यावहारिक ज्ञान में वृद्धि होती है जो हमें व्यावहारिक चीजों से निपटने में सक्षम बनाती है।

षष्ठम नवरात्रि- कात्यायनी (11 अक्टूबर 2021, सोमवार)

माँ कात्यायनी माँ दुर्गा का छठा रूप है, उनका नाम कात्यायनी रखा गया क्योंकि उनका जन्म ऋषि कात्यायन के घर उनकी बेटी के रूप में हुआ था। मां कात्यायनी की पूजा करने से हमारे अंदर मौजूद नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है।

सप्तम नवरात्रि- कालरात्रि (12 अक्टूबर 2021, मंगलवार)

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती हैं माँ कालरात्रि का यह रूप बेहद ही विशाल और भयंकर हैं माँ कालरात्रि को काल का नाश करने वाली देवी के रूप में जाना जाता हैं माँ कालरात्रि का वाहन गधा हैं इस दिन माँ कालरात्रि की पूजा करने से यश, वैभव और प्राप्ति होती हैं

अष्टमी नवरात्रि- महागौरी (13 अक्टूबर 2021, बुधवार)

नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी के दिन के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान शंकर की कठोर तपस्या के कारण उनका शरीर काला हो गया था। जिसे भगवान शिव ने प्रसन्न कर गंगा जल से धो दिया था और उसका शरीर गौर वर्ण का हो गया था, इसलिए उसे महागौरी कहा जाता है।

नवमी नवरात्रि- सिद्धिदात्री (14 अक्टूबर 2021, गुरुवार)

मां दुर्गा के नौवें और अंतिम रूप को मां सिद्धिदात्री के दिन के रूप में मनाया जाता है। मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से हमारे अंदर एक ऐसी क्षमता पैदा होती है जिससे हम अपने सभी कार्यों को आसानी से कर सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं।

दशम तिथि- दुर्गा (15 अक्टूबर 2021, शुक्रवार)

इस दिन शरद नवरात्रि समाप्त होगी और देवी दुर्गा का विसर्जन किया जाएगा। शरद दशमी तिथि को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है।

दोस्तों आपको नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं। आपको आज की पोस्ट navratri 2021 की ये जानकारी कैसी लगी। हमें कमेंट करके जरूर बताएं। अगर पोस्ट अच्छी लगी हो तो सोशल मिडिया पर जरूर शेयर करें।

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