79+ मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी | Moral Stories In Hindi (2022)

नमस्कार दोस्तों आज हम आपके लिए नैतिक शिक्षा से भरी कुछ moral stories in hindi लेकर आए हैं दोस्तों हम सब जानते हैं की जीवन के प्रत्येक अनुभव से हमे कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है परंतु कुछ ऐसी बातें हैं जो हमे बचपन से ही सिखाई जाती हैं जैसे- झूठ बोलना पाप है, लालच बुरी बला आदि और ये सीख हमे कहानियों के माध्यम से दी जाती रही हैं प्रत्येक बालक के माता-पिता उसको कहानियाँ सुनातें है, जिनसे वह कुछ अच्छी बातें सीख सके तो आज के आर्टिकल में हम ऐसी ही कुछ कहानियाँ लेकर आए हैं आर्टिकल को पूरा पढ़िएगा तो चलिए शुरू करते हैं

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शिक्षा देने वाली कहानियाँ – Moral Stories In Hindi

दोस्तों नैतिक शिक्षा मनुष्य के जीवन में बहुत आवश्यक है। इसका आंरभ मनुष्य के बाल्यकाल से ही हो जाता है। सब पर दया करना, कभी झूठ नहीं बोलना, बड़ों का आदर करना, दुर्बलों को तंग न करना, चोरी न करना, हत्या जैसा कार्य न करना,सच बोलना, सबको अपने समान समझते हुए उनसे प्रेम करना, सबकी मदद करना, किसी की बुराई न करना आदि कार्य नैतिक शिक्षा या नैतिक मूल्य कहलाते हैं।

ये मूल्य उसे सिखाते हैं कि उसे समाज में, बड़ों के साथ, अपने मित्रों के साथ व अन्य लोगों के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए। विद्यालय में किताबों में वर्णित कहानियों और महत्वपूर्ण घटनाओं के माध्यम से उसके मूल्यों को संवारा व निखारा जाता है। कहानी के माध्यम से बच्चों को शिक्षा देना आसान हो जाता है किताबों में प्राणियों के चित्र आदि देख कर बच्चों को कहानी पढ़ने में रूचि आती है और वे कही गई बात को आसानी से समझ पाते हैं तो चलिए शुरू करते हैं

बंदर की जिज्ञासा – Moral Story About Monkey’s Curiosity

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एक व्यापारी ने मंदिर बनवाना के लिए और मजदूरों को काम पर लगा दिया। एक दिन दोपहर में बंदरों का एक झुंड वहाँ आ गया। बंदरों को जो सामान हाथ लगता उसी से वे खेलने लगते। एक बंदर को लकड़ी का एक मोटे लट्टे में एक बड़ी-सी कील लगी दिखाई दी। कील की वजह से लट्टे में बड़ी दरार सी बन गई थी। बंदर मन में सोचने लगा आखिर वह है क्या।

जिज्ञासा से भरा बंदर जानना चाहता था कि वह क्या चीज है। बंदर ने उस कील को हिलाना शुरू कर दिया। वह पूरी ज़ोर से कील को हिलाने और बाहर निकालने की कोशिश करता रहा। उसकी बहुत मेहनत के बाद कील तो बाहर निकल आई लेकिन लट्टे की उस दरार में बंदर का पैर फँस गया।

कील निकल जाने की वजह से वह दरार एकदम बंद हो गई।जिसके कारण बंदर उसी में फँसा रह गया और पकड़ा गया। मजदूरों ने उसको पकड़ कर अच्छी पिटाई की।

नैतिक शिक्षा – जिस बात से हमारा कोई लेना-देना न हो उसमें अपनी टाँग नहीं अड़ाना चाहिए।

मुर्गे का घमंड – Moral Story About Rooster Pride

एक बार की बात है,एक गाँव में बहुत सारे मुर्गे रहते थे। मुर्गे रोज सुबहे ज़ोर ज़ोर से आवाज़ करते थे जिससे लोग बहुत परेशान हो जाते थे। जिससे चिड कर एक बार एक बच्चे ने एक मुर्गे को खूब दौड़ाया और परेशान किया

मुर्गा परेशान हो गया, उसने सोचा कि अगली सुबह मैं आवाज नहीं करूंगा। अगर सब सोते रहेंगे तो सब मेरी अहमियत समझेंगे और मुझे परेशान नहीं करेंगे। अगली सुबह मुर्गा कुछ नहीं बोला।

सब लोग समय पर उठे और अपना काम करने लगे, लेकिन मुर्गा समझ गया कि बिना किसी के कोई काम नहीं रुकता। सबका काम चलता रहता है

नैतिक शिक्षा – गर्व न करें। आपकी अहमियत लोगों को बिना बताए ही पता चल जाती है।

चतुर हिरण – Moral Story Of Clever Deer

एक बार की बात है एक जंगल में एक सरोवर था। जो खूनी झील के नाम से प्रसिद्ध था। शाम के बाद यदि कोई उस सरोवर में पानी पीने जाता तो वापस नहीं आता था। एक दिन उस जंगल में चुन्नू हिरण रहने आया। जंगल में उसकी मुलाकात जग्गू बंदर से हुई। जग्गू बंदर ने चुन्नू हिरण को जंगल के बारे में सब बताया लेकिन उस झील के बारे में बताना भूल गया।

जग्गू बंदर ने दूसरे दिन जंगल के सभी जानवरों के लिए चुन्नू हिरण का परिचय दिया। जंगल में चुन्नू हिरण का सबसे अच्छा दोस्त एक चुटीला खरगोश बन गया। जब भी चुन्नू हिरण को प्यास लगती थी वह उस सरोवर में पानी पीने जाता था।

वह शाम को भी उसमें पानी पीने जाता था। एक शाम जब वह उस सरोवर में पानी पीने गया तो उसने देखा कि एक मगरमच्छ बहुत तेजी से उसकी ओर आ रहा है। यह देख वह तेजी से जंगल की ओर भागने लगा। रास्ते में उसकी मुलाकात जग्गू बंदर से हुई।

जग्गू ने चुन्नू हिरण से इतनी तेज दौड़ने का कारण पूछा। चुन्नू हिरण ने उसे सब कुछ बताया। जग्गू बंदर ने कहा कि मैं आपको बताना भूल गया कि यह एक खूनी झील है। जिसमें शाम के बाद जो भी जाता है वापस नहीं आता।

लेकिन मगरमच्छ उस झील में क्या कर रहा है। हमने उसे कभी नहीं देखा। इसका मतलब है कि मगरमच्छ सभी जानवरों को खा जाता है, जो भी शाम के बाद उस झील में पानी पीने जाता है। अगले दिन जग्गू बंदर जंगल के सभी जानवरों को लेकर उस झील पर चला गया।

सभी जानवरों को आते देख मगरमच्छ छिप गया। लेकिन मगरमच्छ की पीठ अभी भी पानी के ऊपर दिखाई दे रही थी। सभी जानवरों ने कहा कि पानी के बाहर जो चीज दिखाई दे रही थी वह मगरमच्छ थी।

यह सुनकर मगरमच्छ कुछ नहीं बोला। चीकू खरगोश ने दिमाग लगाया और कहा कि नहीं यह पत्थर है। लेकिन हम तभी विश्वास करेंगे जब वह खुद बताएगी। यह सुनकर मगरमच्छ ने कहा कि मैं पत्थर हूं।

इससे सभी जानवरों को पता चला कि यह एक मगरमच्छ है। चुटीले खरगोश ने मगरमच्छ से कहा कि तुम्हें पता भी नहीं है कि पत्थर बोलते नहीं हैं। इसके बाद सभी जानवरों ने मिलकर उस मगरमच्छ को उस झील से निकाल दिया और खुशी-खुशी रहने लगे।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर हम बिना घबराए एक साथ मिलकर किसी समस्या का सामना करें तो उससे छुटकारा पाया जा सकता है।

लालच बुरी बला है – Moral Story Of Greed Is Evil

एक बार एक किसान नयी मुर्गी खरीद के लाया अगले दिन किसान ने देखा कि उसकी नयी मुर्गी ने एक सुनहरे रंग का अंडा दिया है। वह अंडा बहुत चमक रहा था। किसान ने अंडा उठाया वह बहुत भारी भी था।

उसे लगा कि किसी ने उसके साथ भद्दा मजाक किया है। फिर वह अंडे को लेकर अपनी पत्नी के पास गया। पत्नी अंडे को देखकर आश्चर्यचकित होती हुई बोली यह तो सोने का अंडा है तुम्हें कहाँ से मिला? यह सुनके किसान बहुत खुश हुआ और सारी बात पत्नी को बताई

प्रतिदिन सुबह अब किसान को एक सुनहरा अंडा मिलने लगा। अंडे बेचकर शीघ्र ही किसान दम्पत्ति धनवान हो गए। धीरे धीरे दोनो पति पत्नी के मन में लालच आने लगा एक दिन उसकी पत्नी ने कहा क्यों न हम मुर्गी को मार दें तो हमें सारे अण्डे एक दिन में मिल जाएंगे।

किसान को पत्नी की बात सही लगी। उन्होंने मुर्गी को मार डाला पर उन्हे अण्डे मिले ही नहीं। बेचारी मुर्गी को भी मार डाला और कुछ हाथ भी न लगा। अब उनके पास पछताने के अलावा कोई चारा न था।

नैतिक शिक्षा- इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की हमे कभी लालच नही करना चाहिए

सच्चे मित्र Moral Story Of True Friend

एक बार की बात है राधा नाम की एक लड़की अपने पिता के साथ रहती थी। बचपन में ही उनकी मां का देहांत हो गया था। वह घर का काम करती थी और फिर कॉलेज जाती थी। कॉलेज जाने के दौरान वह रोज रास्ते में एक जगह पर पक्षियों को चारा खिलाती थी।

उसके घर में भी 2 पक्षी थे वह उन्हें रोज खिलाती थी। एक दिन जमींदार के बेटे ने उसे पक्षियों को खिलाते देखा। वह अपने पिता के पास गया और राधा से विवाह करने की इच्छा व्यक्त की।

जमींदार ने राधा के पिता से बात कर उसके पुत्र का विवाह राधा से करा दिया। राधा भी घर के पंछी अपने साथ ससुराल ले आई। वह उन पक्षियों को रोज खिलाती थी। राधा की सास को यह बिल्कुल पसंद नहीं था। वह उन पक्षियों को परेशान करती थी।

वह उनके अनाज के पानी को जमीन में फेंक देती थी। एक दिन राधा की सास ने पक्षियों का पिंजरा जमीन पर पटक दिया। राधा ने उसे ऐसा करते देखा। राधा ने मना किया तो उसकी सास ने राधा को भला बुरा सुना दिया।

इन सब बातों से राधा को चिंता होने लगी। एक दिन जब राधा के पति ने परेशानी का कारण पूछा तो उसने सारी बात बता दी।

उनके पति ने राधा को उनकी भलाई के लिए पक्षियों को पार्क में छोड़ने की सलाह दी। अपने पति के कहने पर राधा ने दोनों पक्षियों को अन्य पक्षियों के साथ पार्क में छोड़ दिया। अब पार्क के सभी पक्षी राधा के अच्छे दोस्त बन गए थे।

पंछी अब राधा के घर भी आने लगे। जब राधा की सास को इस बात का पता चला तो वह नाराज हो गईं। वह राधा को साथ लेकर अपने मायके चली गई। रास्ते में कुछ चोरों ने राधा की सास के जेवर चुराने का प्रयास किया।

तभी राधा के पक्षियों ने आकर चोरों पर आक्रमण कर दिया। जिससे चोर फरार हो गए। यह देख राधा की सास को बहुत पछतावा हुआ और उसका मन बदल गया अब राधा की सास ने उसे घर में पक्षी रखने की अनुमति देदी और अन्य पशुओं के प्रति भी उसका व्यवहार बदल गया अब राधा भी बहुत खुश थी

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की हमे पशु पॅक्षियो से अच्छा व्यवहार करना चाहिए |

चतुर सियार – Moral Story Of Clever Jackal

Moral Story Of Clever Jackal

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एक बार की बात है एक गाँव में एक बैल रहता था। जिसे घूमने का शौक था। वह इधर-उधर भटकता हुआ जंगल में पहुंच गया और आते-जाते गांव का रास्ता भूल गया। चलते-चलते वह एक तालाब के पास पहुँच गया। जहां उन्होंने पानी पिया और वहां हरी घास खाई।

जिसे खाने के बाद वह बहुत खुश हुआ और मुंह ऊपर उठाकर चिल्लाने लगा। उसी समय जंगल का शेर राजा तालाब की ओर पानी पीने जा रहा था। जब शेर ने बैल की भयानक आवाज सुनी तो उसे लगा कि जंगल में कोई खतरनाक जानवर आया होगा।

तो शेर बिना पानी पिए अपनी गुफा की ओर भागने लगा। शेर के इस तरह डरकर 2 सियारों ने उसे भागते हुए देखा।

वह सिंह का मंत्री बनना चाहता था। उसने सोचा कि शेर का विश्वास जीतने का यह सही समय है। दोनों सियार सिंह की गुफा के पास गए और बोले हमने तुम्हें डर के मारे गुफा की ओर आते देखा है। आप जिस आवाज से डरते थे

वह बैल की आवाज थी। आप चाहें तो हम इसे आपके पास ला सकते हैं। सिंह की आज्ञा से दोनों बैल को अपने साथ ले आए और सिंह के साथ मिला दिया। कुछ समय बाद शेर और बैल बहुत अच्छे दोस्त बन गए।

शेर ने बैल को अपना सलाहकार बना लिया। यह जानकर दोनों सियार उनकी दोस्ती से जलने लगे क्योंकि उन्होंने जो मंत्री बनने के बारे में सोचा था वह नहीं हुआ। दोनों सियारों ने एक चाल चली और शेर के पास गए।

शेर से बात करने वाला बैल सिर्फ आपसे दोस्ती करने का दिखावा करता है। लेकिन हमने उसके मुंह से सुना है कि वह आपको अपने दोनों बड़े सींगों से मारकर जंगल का राजा बनना चाहता है।

पहले तो शेर को विश्वास नहीं हुआ लेकिन उसे ऐसा लगा। फिर दोनों गीदड़ बैल के पास गए। शेर ने बैल से कहा कि केवल तुमसे दोस्ती करने का दिखावा करता है। अगर मौका दिया गया तो वह तुम्हें मार डालेगा और खा जाएगा।

यह जानकर बैल बहुत क्रोधित हुआ और शेर से मिलने जाने लगा। सियार पहले ही शेर के पास गया और कहा कि बैल तुम्हें मारने आ रहा है। बैल को क्रोधित होते देख शेर को सियारों का सच समझ में आ गया और उसने बैल पर हमला कर दिया।

बैल ने शेर पर भी हमला कर दिया और दोनों आपस में लड़ने लगे। अंत में शेर ने बैल को मार डाला और दोनों सियारों को अपना मंत्री बना लिया।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे शिक्षा मिलती है की दूसरे लोगों की बातों में आकर हमे अपनी मित्रता पर शक नही करना चाहिए

हिरण, चूहा और कबूतर की मित्रता Moral Story Of Friendship Of Deer, Rat And Pigeon

moral story of friendship of deer mouse and pigeon

एक जंगल में एक कबूतर, एक चूहा और एक हिरण घनिष्ठ मित्र हुआ करते थे। वे जंगल में साथ घूमते बातें करते और खूब मस्तियाँ करते थे एकबार एक शिकारी जंगल में शिकार करने आया उसने हिरण को पकड़ने के लिए जाल लगाया।

काफी मशक्कत और कड़ी मेहनत से शिकारी जाल को छिपाने में कामयाब हो गया। हिरण आसानी से शिकारी के जाल में फंस गया। इस पर कबूतर ने कहा, घबराओ मत दोस्त, मैं देखता हूं कि शिकारी कहां है और कितनी दूर हूं।

मैं इसे तब तक पकड़ता हूं जब तक कि हमारे दोस्त चूहा जाल कुतर न जाए और आप जल्दी से निकल जाएं। ऐसा जब कबूतर ने शिकारी की तलाश शुरू कर दी। वह दूर था कबूतर ने अपनी जान जोखिम में डालकर शिकारी पर हमला करना शुरू कर दिया।

कबूतर के हमले से शिकारी को कुछ समझ नहीं आया और वह परेशान होकर भागने लगा लेकिन कबूतर ज्यादा देर तक शिकारी को रोक नहीं पाया। शिकारी ने जल्दी से कबूतर पर काबू पा लिया और जाल की ओर आ गया।

इधर चूहे ने जाल को लगभग काट ही लिया था अब मृग मुक्त होने ही वाला था कि जब शिकारी वहाँ पहुँचा तो कबूतरों का एक झुंड तेज़ी से आया और उस शिकारी पर हमला कर दिया। इस हमले से शिकारी डर गया।

उन कबूतरों पर काबू पाने में कुछ समय लगा। इसमें चूहे ने निर्भय होकर जाल को कुतर दिया जिससे हिरण मुक्त हो गया। अब क्या था जब उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसका दोस्त एक कबूतर शिकारी के चंगुल में आ गया था।

हिरण ने सोचा कि उसने मेरी जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी। हिरण ने सोचा अब मेरी बारी है उसकी जान बचाने की इस पर हिरण धीरे-धीरे लंगड़ाकर चलने लगा शिकारी को लगा कि हिरण घायल हो गया है, उसके पैर में चोट लगी है, इसलिए वह धीरे-धीरे चल रहा है, भाग नहीं सकता।

शिकारी ने झट से कबूतर को छोड़ दिया और हिरण की ओर भागा। शिकारी को आते देख कबूतर उड़ गया और आकाश में चल दिया अब नकल करने वाला हिरण भी तेजी से दौड़ा और चूहा दौड़ कर बिल में घुस गया। इस प्रकार तीनों मित्रों की समझ ने एक दूसरे की रक्षा की।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है आपस में सूझबूझ है तो किसी भी मुसीबत को हल किया जा सकता है।

ईमानदार लकड़हारा Moral Story Of The Honest Woodcutter

एक गांव में एक लकड़हारा रहता था उसका नाम भानु था। वह बहुत ईमानदार और दयालु लकड़हारा था वह जंगल में जाता और लकड़ियां काट कर लाता और उसे बाजार में बेच आता इससे उसके घर का पालन पोषण करता था।एक दिन जब वह जंगल में से लकड़ियां काट कर वापस आ रहा था तो अचानक उसके हाथ से कुल्हाड़ी छूट कर नदी में गिर गई।

लकड़हारे ने नदी में कूद कर कुल्हाड़ी को ढूंढने का प्रयास करने लगाए लेकिन काफी समय गुजर जानें के बाद भी वह अपनी कुल्हाड़ी नही ढूंढ पाया।वह दुखी होकर पुल के एक कोने में बैठ गया और बैठकर रो रहा था। तभी अचानक वहां पर जलदेवी प्रकट हुई और उससे पूछा की क्या बात है तुम इतने उदास क्यों हो रहे हो

लकड़हारा ने उत्तर दिया “मैं इस पुल को पार कर रहा था तब अचानक मेरा पैर पुल मैं फसा और मैं गिर गया और मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई।”जल देवी ने कहा तुम यही ठहरो मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी लेकर आती हूं।

और जल देवी नदी में गई और नदी से एक सोने की कुल्हाड़ी लेकर आई और लकड़हारे को देने लगी पर लकड़हारा ने व कुल्हाड़ी नहीं ली और कहने लगा कि माता यह कुल्हाड़ी मेरी नहीं है मुझे मेरी चाहिए।

फिर जलदेवी वापस नदी में गई और नदी से चांदी की कुल्हाड़ी लेकर आई और लकड़हारे को देने लगी फिर से लकड़हारे ने मना कर दिया यह कुल्हाड़ी भी मेरी नहीं है।

फिर से जलदेवी वापस नदी में गई और नदी से उसकी लोहे की कुल्हाड़ी लेकर आई और उसको देने लगी लकड़हारे ने खुशी-खुशी से अपनी कुल्हाड़ी ले ली इसकी ईमानदारी से जलदेवी बहुत प्रसन्न हुई और लकड़हारे को चांदी और सोने की कुल्हाड़ी भी दे दी।

और लकड़हारे ने तीनों कुल्हाड़ी या लेकर घर आया और उसकी धर्मपत्नी को यह पूरी बात बताईए इससे दोनों पति पत्नी बहुत खुश हुए। और फिर से लकड़हारे ने पहले की तरह रोजाना जंगल में जाता और लकड़ियां काट कर लाता और उसे बाजार में बेचता था और जो पैसा आता उससे अपना घर.बार चलाता था।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की हमे हमेशा ईमानदारी से काम करना चाहिए और लालच नही करना चाहिए

मेहनती कौवा – Moral Story Of Hardworking Crow

कोमलव नामक जॅंगल में एक कौआ रहता था जंगल में भीषण गर्मी पड़ रही थी। जिससे पूरा जंगल सूख गया था और पानी की एक बूंद भी नहीं बची थी। सभी पशु -पक्षी पानी पीने के लिए तरस रहे थे। गर्मी के कारण कौवा को भी बहुत प्यास लगी थी

वह सुबह से पानी की तलाश कर रहा था लेकिन फिर भी उसे पानी की एक बूंद भी नहीं मिली। जब वह दिन भर कड़ी मेहनत से इधर.उधर भटकता रहा तो उसे कहीं घड़ा दिखाई दिया। घड़ा बहुत गहरा था और उसमें बहुत कम पानी था।

घड़े का मुंह भी छोटा था। कौवा बहुत कोशिश कर रहा था, फिर भी चोंच पानी तक नहीं पहुंच पा रही थी। लेकिन पानी तो पीना ही था। उसने हिम्मत नहीं हारी और कोशिश करता रहा, सोचता रहा, अचानक उसे उसका हल मिल गया।

कौवे ने पास में पत्थर के कुछ टुकड़े देखे। कौवा एक-एक पत्थर उठाकर घड़े में रखने लगा। कौवे को उसकी मेहनत का फल मिला पानी अब धीरे-धीरे ऊपर आने लगा। सफलता देखकर कौवे के प्रयास में तेज़ी आ गई और वह पत्थर फेंकता रहा। पानी अब काफी ऊपर आ गया था, कौवे की चोंच वहाँ पहुँच गई,कौवे ने पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई, अपने ही प्रयास की सराहना की और उड़ गया।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की मुश्किल चाहे कितनी भी बड़ी क्यूँ ना हो हमे उसे हल करने का प्रयास करते रहना चाहिए।

नकलची शेर – Moral Story Of The Imitator Lion

आप सभी जानते ही होंगे कि शेर जंगल का राजा होता है। शेर बहुत मजबूत और गर्वित होता है। वह अपने जंगल के सभी जानवरों को डराना पसंद करता है। एक दिन शेर जंगल में टहलने निकला। वहाँ जंगल में उसने देखा कि एक राजा हाथी पर शान से बैठा हुआ है। उस राजा को हाथी पर बैठा देख शेर को भी हाथी पर बैठने की इच्छा हुई। शेर ने सोचा मैं भी अपने जंगल का राजा हूं, मुझे भी हाथी पर बैठकर घूमना चाहिए फिर क्या था शेर ने अपने जंगल के सभी जानवरों को आदेश दिया शेर ने कहा कि वह भी राजाओं की तरह हाथी पर सवार होना चाहता है। अपने राजा शेर की इच्छा जानकर जंगल के सभी जानवर व्यस्त हो गए और शेर के लिए हाथी पर सवारी लगाने लगे यह सब देखकर शेर बहुत खुश हुआ। वह अगले ही पल हाथी पर सवार हो गया। हाथी को चलने का आदेश दिया सवारी शुरू हुई, लेकिन हाथी जैसे ही थोड़ा आगे चलता है उसकी सीट हिल जाती है और अगले ही पल शेर नीचे गिर जाता है। शेर गिर जाता है और बेचारे का पैर टूट जाता है अब क्या था शेर समझ गया और खड़ा हो गया और कहा “पैदल चलना ही बेहतर है

नैतिक शिक्षा – कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की हमे दूसरों की नकल नही करनी चाहिए।

डरपोक पत्थर – Moral Story Of The Sneaky Stone

बहुत समय पहले एक शिल्पकार एक मूर्ति बनाने के लिए पत्थर खोजने जंगल में गया था। वहाँ उसे एक बहुत अच्छा पत्थर मिला। जिसे देखकर वह बहुत खुश हुए और कहा कि यह मूर्ति बनाने के लिए बहुत उपयुक्त है।

जब वह आ रहा था तो उसे एक और पत्थर मिला वह उस पत्थर को भी अपने साथ ले गया। घर जाकर उसने पत्थर उठाया और अपने औजारों से उस पर काम करने लगा। जब औजार पत्थर से टकराए तो पत्थर कहने लगा कि मुझे छोड़ दो मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

अगर तुम मुझे मारोगे तो मैं टूट जाऊंगा। तुम किसी और पत्थर पर मूर्ति बना लो। पत्थर की बात सुनकर शिल्पी को दया आ गई। वह पत्थर छोड़कर दूसरे पत्थर से मूर्ति बनाने लगा।

पत्थर कुछ नहीं बोला। कुछ समय बाद शिल्पी ने उस पत्थर से भगवान की एक बहुत अच्छी मूर्ति बनाई। मूर्ति बनने के बाद गांव के लोग उसे लेने पहुंचे। उन्होंने सोचा कि नारियल को फोड़ने के लिए हमें एक और पत्थर की आवश्यकता होगी।

वह वहां रखा पहला पत्थर भी अपने साथ ले गये। मूर्ति को मंदिर में सजाया और पत्थर को उसके सामने रख दिया। अब जब भी कोई व्यक्ति मंदिर में दर्शन के लिए आता था तो वह फूल से मूर्ति की पूजा करता था, दूध से स्नान करता था और उस पत्थर पर नारियल तोड़ देता था।

जब जब लोग उस पत्थर पर नारियल तोड़ते तो उसे दर्द होता और वह रोता लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं होता। उस पत्थर ने मूर्ति के बने पत्थर से बात की और कहा कि तुम बहुत मजे कर रहे हो, लोग तुम्हारी पूजा करते हैं।

दूध से नहलाते हैं और लड्डू चढ़ाते हैं। लेकिन मेरी किस्मत खराब है लोग मुझ पर नारियल फोड़ते हैं। इस पर मूर्ति के बने पत्थर ने कहा कि जब शिल्पकार तुम पर काम कर रहा था, अगर उस समय तुमने उसे नहीं रोका होता, तो आज तुम मेरी जगह होते। लेकिन आपने आसान रास्ता चुना इसलिए अब आप पीड़ित हैं। पत्थर समझ गया और कहा कि अब से मैं भी शिकायत नहीं करूंगा

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की हमें कभी भी कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए। और मुश्किलों से घबरा कर कभी भी हार नही माननी चाहिए|

चालाक लोमड़ी – Moral Story Of The Cunning Fox

सुंदरवन नमक एक जंगल में एक कौवा रहता था। एक दिन कौआ पेड़ की डाल पर रोटी का टुकड़ा अपनी चोंच में दबाए बैठा था। तभी एक लोमड़ी वहाँ आई। वह भी बहुत भूखी थी कौवे की रोटी देख उसके मुँह में पानी आ गया।

कौए की रोटी छीनने के लिए उसने एक चाल चली। उसने कौए का अभिवादन किया, लेकिन कौए ने उसका कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि अगर वह मुंह खोलता तो रोटी का टुकड़ा नीचे गिर जाता। तब लोमड़ी ने एक चाल चली बोली “तुम बहुत सुंदर लग रहे हो तुम्हें तो सारे पक्षियों का राजा बना देना चाहिए।

मुझे अपनी मधुर आवाज में एक गाना सुना दो”। चापलूसी से प्रसन्न होकर कौआ स्वयं को रोक नहीं पाया और उसने जवाब दिया धन्यवाद! जैसे ही उसने मुंह खोला उसकी चोंच में दबा रोटी का टुकड़ा नीचे गिर पड़ा। चालाक लोमड़ी ने तुरंत वह टुकड़ा उठा लिया और भाग गई। और कौवा देखता रह गया।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है की हमे कभी झूठी प्रसंसा पर प्रसन्न नही होना चाहिए

भेड़िया आया – Moral Story Of The Wolf Came

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में एक चरवाहा रहता था। हर रोज सुबह वह भेड़ों को जंगल ले जाता और शाम तक वापस घर लौट आता। पूरा दिन भेड़ घास चरतीं और चरवाहा बैठा-बैठा ऊबता रहता। इस वजह से वह हर रोज खुद का मनोरंजन करने के नए नए तरीके ढूंढता रहता था।

एक दिन उसे एक नई शरारत सूझी। उसने सोचा क्यों न इस बार गांव वालों के साथ मज़ाक किया जाए। यही सोच कर उसने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया बचाओ भेड़िया आया -बचाओ भेड़िया आया। आवाज सुन कर गांव वाले लाठी और डंडे लेकर दौड़ते हुए उसकी मदद करने आए।

जैसे ही गांव वाले वहां पहुंचे उन्होंने देखा कि वहां कोई भेड़िया नहीं है और चरवाहा पेट पकड़ कर हंस रहा था। हाहाहा बड़ा मजा आया। मैं तो मजाक कर रहा था। उसकी ये बातें सुन कर गांव वालों का चेहरा गुस्से से लाल-पीला होने लगा।

एक आदमी ने कहा कि हम सब अपना काम छोड़ कर तुम्हें बचाने आए हैं और तुम हंस रहे हो ऐसा कह कर सभी लोग वापस अपने अपने काम की ओर लौट गए। कुछ दिन बीतने के बाद गांव वालों ने फिर से चरवाहे की आवाज सुनी बचाओ भेड़िया आया -बचाओ भेड़िया आया।

यह सुनते ही वो फिर से चरवाहे की मदद करने के लिए दौड़ पड़े। दौड़ते-हांफते गांव वाले वहां पहुंचे तो क्या देखते हैं वो देखते हैं कि चरवाहा अपनी भेड़ों के साथ आराम से खड़ा है और गांव वालों की तरफ देख कर जोर-जोर से हंस रहा है। इस बार गांव वालों को और गुस्सा आया।

उन सभी ने चरवाहे को खूब खरी-खोटी सुनाई लेकिन चरवाहे को अक्ल न आई। उसने फिर दो-तीन बार ऐसा ही किया अब गांव वालों ने चरवाहे की बात पर भरोसा करना बंद कर दिया था।

एक दिन गांव वाले अपने खेतों में काम कर रहे थे और उन्हें फिर से चरवाहे के चिल्लाने की आवाज आई। लेकिन इस बार किसी ने भी उसकी बात पर गौर नहीं किया। सभी आपस में कहने लगे कि इसका तो काम ही है दिन भर यूं मजाक करना।

चरवाहा लगातार चिल्ला रहा था लेकिन इस बार कोई भी उसकी मदद करने वहां नहीं पहुंचा। भेड़िया एक-एक करके उसकी सारी भेड़ों को खा गया। यह सब देख चरवाहा रोने लगा। जब बहुत रात तक चरवाहा घर नहीं आया तो गांव वाले उसे ढूंढते हुए जंगल पहुंचे।

वहां पहुंच कर उन्होंने देखा कि चरवाहा पेड़ पर बैठा रो रहा था।गांव वालों ने किसी तरह चरवाहे को पेड़ से उतारा। उस दिन चरवाहे की जान तो बच गई लेकिन उसकी प्यारी भेड़ें भेड़िए का शिकार बन चुकी थीं। चरवाहे को अपनी गलती का एहसास हो गया था और उसने गांव वालों से माफी मांगी। चरवाहा बोला मुझे माफ कर दो मैंने झूठ बोल कर बहुत बड़ी गलती कर दी। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की हमे कभी झूठ नही बोलना चाहिए

नन्ही रेड राइडिंग हुड Moral Story Of Little Red Riding Hood

बहुत समय पहले एक लड़की अपने माता-पिता के साथ जंगल के एक घर में रहती थी। उसका नाम रोज़ी था जिसे आमतौर पर रेड राइडिंग हूड कहा जाता था क्योंकि वह हर दिन अपनी पसंदीदा लाल चुन्नी पहनती थी।

दूसरी ओर जंगल में एक छोटे से घर में उसकी नानी रहती थी। एक दिन रेड राइडिंग हूड अपनी नानी से मिलना चाहती थी उसने अपनी माँ से नानी के पास जाने के लिए पूछा “क्या मैं नानी से मिलने जा सकती हूँ?” माँ ने कहा “हाँ बेटी जाओ”।

उसकी माँ ने नानी के लिए भी टोकरी में खाना दिया और उसे सलाह दी कि वह इधर-उधर न घूमे और न ही रास्ते में अजनबियों से बात करे।

रेड राइडिंग हुड ने कहा हाँ माँ में आपका कहना मानूँगी और रास्ते में किसी अजनबी से बात नही करूँगी |यह कह कर वह नानी के घर के लिए चल पड़ी रास्ते में उसने कुछ सुंदर फूल देखे और वह उन्हें भी अपनी नानी के लिए ले जाना चाहती थी।

जब वह फूल तोड़ने जंगल में गई तभी वहां एक भेड़िया आया| भेड़िया लड़की को खाना चाहता था इसी इरादे से वह लड़की के पास गया। भेड़िये ने बड़ी चतुराई से उससे से पूछा कि तुम किसके लिए फूल तोड़ रहे हो तो नन्ही रेड राइडिंग हुड ने कहा कि यह मेरी नानी के लिए है मैं उससे मिलने जा रहा हूँ।

लड़की यह भूल चुकी थी कि उसे रास्ते में किसी से बात नहीं करनी है।भेड़िए ने पूछा क्या तुम्हारी नानी यही रहती है, “नन्ही रेड राइडिंग हुड ने कहा जंगल के दूसरी तरफ एक छोटे से घर में रहती है।”भेड़िए के दिमाग में बच्ची को छोड़कर नानी को खाने का ख्याल आया और सीधा नानी के घर पहुंच गया।

उसने नानी पर झपट्टा मारा और नानी बेहोश हो गई। नानी के बेहोश होने पर भेड़िए ने सोच की नन्ही भी अभी आती ही होगी तो पहले उसे खा लेता हूँ बाद में नानी को खा लूँगा यह सोच के वह नानी के साड़ी पह्न कर बैठ गया

जब नन्ही रेड राइडिंग हुड वहाँ पहुँची तो नानी के बड़े बड़े नाख़ून देख क डर गयी और बोली की नानी आपके नाख़ून इतने बड़े क्यूँ हैं ?तब भेड़िया बोला ताकि मैं तुम्हे अच्छे से खा सकूँ यह कह के भेड़िया बच्ची पे झपट पड़ा

भेड़िये को देखकर रेड राइडिंग हूड जोर-जोर से चिल्लाने लगी उसकी चीख सुनकर एक शिकारी दौड़ता हुआ आया और उसने भेड़िये को मार डाला और लड़की को बचा लिया। तब तक नानी को भी होश आ गयी और रेड राइडिंग हूड को अपनी माँ की बातें याद आ गईं।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की हमे कभी अपने बड़ों की बात को नज़रअंदाज़ नही करना चाहिए और बड़ों की बात माननी चाहिए

बंदर और मगरमच्छ की कहानी – Moral Story Of Monkey And Crocodile

moral story of monkey and crocodile

एक नदी के किनारे एक जामुन के पेड़ पर एक बन्दर रहता था उस पेड़ पर बहुत ही मीठे-मीठे जामुन लगते थे एक दिन एक मगरमच्छ खाना तलाशते हुए पेड़ के पास आया

बन्दर ने उससे पूछा ” क़ि भाई मगरमच्छ तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?” तब मगरमच्छ बोला की वह और उसका परिवार बहुत भूका है उसे खाने को कुछ चाहिए उसकी मित्रता नदी में रहने वाले मगरमच्छ के साथ हो गयी

वह बन्दर उस मगरमच्छ को रोज़ खाने के लिए जामुन देता रहता था स्वादिष्ट जामुन खाने के बाद मगरमच्छ की पत्नी ने सोचा की रोज़ इतने मीठे फल खाने वेल बंदर का कलेजा भी कितना मीठा होगा उसने अपने पति से कहा कि उसे उस बन्दर का दिल चाहिए और वो इसी ज़िद पर अड़ गई, उसने बीमारी का बहाना बनाया और कहा कि जब तक बन्दर का कलेजा उसे मिलेगा वो ठीक नही हो पाएगी।

पत्नी कि ज़िद से मजबूर हुए मगरमच्छ ने एक चाल चली और बन्दर से कहा कि उसकी भाभी उसे मिलना चाहती है बन्दर ने कहा कि वो भला नदी में कैसे जायेगा? मगरमच्छ ने उपाय सुझाया कि वह उसकी पीठ पर बैठ जाये, ताकि सुरक्षित उसके घर पहुँच जाए

बन्दर भी अपने मित्र की बात का भरोसा कर, पेड़ से नदी में कूदा और उसकी पीठ पर सवार हो गया जब वे नदी के बीचों-बीच पहुंचे, मगरमच्छ ने सोचा कि अब बन्दर को सही बात बताने में कोई हानि नहीं और उसने भेद खोल दिया कि उसकी पत्नी उसका दिल खाना चाहती है. बन्दर का दिल टूट गया, उसको धक्का तो लगा, लेकिन उसने अपना धैर्य नहीं खोया

बन्दर तपाक से बोला “ओह मेरे मित्र तुमने, यह बात मुझे पहले क्यों नहीं बताई क्योंकि मैंने तो अपना दिल जामुन के पेड़ में सम्भाल कर रखा है, अब जल्दी से मुझे वापस नदी के किनारे ले चलो ताकि मैं अपना दिल लाकर अपनी भाभी को उपहार में देकर उसे खुश कर सकूं

मूर्ख मगरमच्छ बन्दर को जैसे ही नदी-किनारे लेकर आया बन्दर ने ज़ोर से जामुन के पेड़ पर छलांग लगाई और क्रोध में भरकर बोला, “मूर्ख ,दिल के बिना भी क्या कोई ज़िन्दा रह सकता है ? जा, आज से तेरी-मेरी दोस्ती समाप्त

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है की मुसीबत के समय भी हमे धैर्य नही खोना चाहिए एवं मित्रता में धोखा नही देना चाहिए

मेहनत का फल – Moral Story Of Hard Work Rejalt

एक गांव में दो मित्र राम और सोहन रहते थे। राम बहुत धार्मिक था और भगवान को बहुत मानता था। जबकि सोहन बहुत मेहनती थी। एक बार दोनों ने मिलकर जमीन खरीदी।

जिससे वह बहुत फ़सल ऊगा कर अपना घर बनाना चाहते थे।सोहन तो खेत में बहुत मेहनत करता लेकिन राम कुछ काम नहीं करता केवल मंदिर में जाकर भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करता था।

कुछ समय बाद खेत की फसल पक कर तैयार हो गयी। जिसको दोनों ने बाजार ले जाकर बेच दिया और उनको अच्छा पैसा मिला। घर आकर सोहन ने राम को कहा की इस धन का ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए क्योंकि मैंने खेत में ज्यादा मेहनत की है।

यह बात सुनकर राम बोला नहीं तुमसे ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए क्योकि मैंने भगवान से प्रार्थना की तभी हमको अच्छी फ़सल हुई। जब वह दोनों इस बात को आपस में नहीं सुलझा सके तो धन के बॅटवारे के लिए दोनों गांव के मुखिया के पास पहुंचे।

मुखिया ने दोनों की सारी बात सुनकर उन दोनों को एक – एक बोरा चावल का दिया जिसमें कंकड़ मिले हुए थे। मुखिया ने कहा की कल सुबह तक तुम दोनों को इसमें से चावल और कंकड़ अलग करके लाना तब में निर्णय करूँगा की इस धन का ज्यादा हिस्सा किसको मिलना चाहिए।


दोनों चावल की बोरी लेकर अपने घर चले गए। सोहन ने रात भर जागकर चावल और कंकड़ को अलग किया। लेकिन राम चावल की बोरी को लेकर मंदिर में बैठ गया और भगवान से चावल में से कंकड़ अलग करने की प्रार्थना करने लगा।

अगले दिन सुबह सोहन जितने चावल और कंकड़ अलग कर सका उसको ले जाकर मुखिया के पास गया। जिसे देखकर मुखिया खुश हुआ। राम ने वैसी की वैसी बोरी को ले जाकर मुखिया के सामने रख दिया।

राम ने कहा की मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है की सारे चावल साफ़ हो गए होंगे। जब बोरी को खोला गया तो चावल और कंकड़ वैसे के वैसे ही थे।जमींदार ने राम को कहा की भगवान भी तभी सहायता करते है जब तुम मेहनत करते हो।

जमींदार ने धन का ज्यादा हिस्सा सोहन को दिया। इसके बाद राम भी सोहन की तरह खेत में मेहनत करने लगा और अबकी बार उनकी फ़सल पहले से भी अच्छी हुई।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि बिना मेहनत करे कुछ प्राप्त नही होता भगवान भी उन्ही की मदद करते हैं जो परिश्रम करते हैं

धोबी का गधा – Washerman’s Donkey Moral Story

एक गाँव में एक धोबी अपने गधे के साथ रहता था। हर सुबह वह अपने गधे के साथ लोगों के घरों से गंदे कपड़े लाता और उन्हें धोकर वापस दे देता। यही उसकी रोजी-रोटी का काम था।गधा धोबी के साथ कई वर्षों से काम कर रहा था और समय बीतने के साथ वह अब बूढ़ा हो गया था। बढ़ती उम्र ने उसे कमजोर बना दिया थाए जिसकी वजह से वह ज्यादा कपड़ों का वजन नहीं उठा पाता था।

एक दोपहर धोबी घाट पर अपने गधे के साथ कपड़े धोने जा रहा था। धूप तेज थी और गर्मी के कारण दोनों की तबीयत खराब हो रही थी। गर्मी के साथ-साथ कपड़ों के वजन के कारण गधे को चलना मुश्किल हो रहा था।

दोनों घाट की ओर जा रहे थे तभी अचानक गधे का पैर ठोकर खाकर गहरे गड्ढे में जा गिरा।अपने गधे को गड्ढे में गिरते देख धोबी घबरा गया और उसे निकालने की कोशिश करने लगा। बूढ़ा और कमजोर होने के बावजूद गधे ने गड्ढे से बाहर निकलने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी,

लेकिन गधा और धोबी दोनों ही असफल रहे। धोबी को इतनी मेहनत करते देख कुछ ग्रामीण उसकी मदद के लिए पहुंचे, लेकिन कोई उसे गड्ढे से बाहर नहीं निकाल सका।

तब गांव वालों ने धोबी से कहा कि गधा अब बूढ़ा हो गया है, इसलिए बुद्धिमानी है कि गड्ढे में मिट्टी डालकर यहीं गाड़ दें। थोड़ा मना करने के बाद धोबी भी इस पर राजी हो गया। ग्रामीणों ने फावड़े के सहारे गड्ढा खोदना शुरू कर दिया।

गधे को जैसे ही समझ में आया कि उसके साथ क्या हो रहा है, वह बहुत दुखी हुआ और उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे। गधा कुछ देर रोता रहा, लेकिन कुछ देर बाद चुप हो गया।

अचानक धोबी ने देखा कि गधा अजीब काम कर रहा है। जैसे ही गांव वाले उस पर मिट्टी डालते, वह अपने शरीर से मिट्टी को गड्ढे में गिरा देता और उस मिट्टी के ऊपर चढ़ जाता। ऐसा लगातार करने से मिट्टी गड्ढे में भरती रही और गधा उस पर चढ़कर ऊपर आ गया। अपने गधे की इस चतुराई को देखकर धोबी की आंखों में खुशी के आंसू आ गए और उसने गधे को गले से लगा लिया।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से ये सीख मिलती है कि मुश्किल समय मैं भी दिमाग़ का इस्तेमाल करके बड़ी से बड़ी कठिनाई को पार किया जा सकता है

कामचोर गधा – Moral Story Of Doodle Donkey

एक व्यापारी के पास एक गधा था। वह रोज अपने गधे पर नमक की बोरियां व अन्य सामान लादकर आसपास के कस्बों में बेचने जाया करता था।वहां तक जाने के लिए उसे कई छोटी-छोटी नदियां और नाले पार करने पड़ते थे।

एक दिन नदी पार करते समय गधा अचानक फिसलकर पानी में गिर पड़ा। इससे गधे की पीठ पर लदा हुआ ढेर सारा नमक पानी में घुल गया। व्यापारी ने जैसे-तैसे उसे बाहर निकाला। अब गधे का बोझ काफी हलका हो गया।

बोझ हलका होते ही गधा बहुत खुश हुआ। नमक का व्यापारी गधे को लेकर घर वापस लौट आया। अब वह जाकर भी क्या करता, माल तो पानी में बह गया था।फलस्वरूप उस दिन गधे को अच्छा आराम मिल गया।अब तो गधे ने सोचा कि रोज ऐसे ही किया करूंगा।


दूसरे दिन वह व्यापारी फिर गधे पर नमक की बोरियां लादकर बेचने निकला।उस दिन फिर नदी पार करते समय गधा जानबूझकर पानी में गिर पड़ा। उसकी पीठ का बोझ इस बार भी हलका हो गया। पर आज व्यापारी ने साफ-साफ देखा था कि गधा जान-बूझकर पानी में गिरा था।

उसे गधे पर बहुत गुस्सा आया। मगर गधा अपनी कामयाबी पर बहुत इतराया। अगले दिन व्यापारी ने गधे की पीठ पर रूई के गट्ठा लाद दिए। गधा बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि आज तो पहले ही कम बोझ है।

जब मैं पानी में गिरने का नाटक करूंगा तो कुछ बोझ और हल्का हो जाएगा। यही सोचकर वह खुशी-खुशी चल दिया।नदी आते ही वह पानी में गिर गया। पर इस बार उल्टा ही हुआ। व्यापारी ने उसे जल्दी से बाहर नहीं निकाला।

फलस्वरूप रूई के गट्टों ने खूब पानी सोखा और बोझ पहले से कई गुना बढ़ गया। पानी से बाहर आने में गधे को बहुत परिश्रम करना पड़ा। अब उससे चला भी न जा रहा था। जब गधे से न चला गया तो उसने डंडे से उसकी खूब पिटाई की।उस दिन के बाद से गधे ने पानी में गिरने की आदत छोड़ दी।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे ये सीख मिलती है कि हमे अपने काम को मंन लगा के करना चाहिए और कामचोरी नही करनी चाहिए

कछुए और खरगोश की दौड़ – Moral Story Of Tortoise And Hare Race

moral story of tortoise and hare race

एक बार किसी घने जंगल में एक खरगोश रहता था, जिसे अपने तेज दौड़ने पर बहुत घमंड था। वह जॅंगल के प्रत्येक जानवेर को अपने साथ दौड़ लगाने की चुनौती दे देता। दूसरे जानवरों के बीच वो हमेशा खुद की तारीफ करता और कई बार दूसरे का मजाक भी उड़ाता।

एक बार उसे एक कछुआ दिखा खरगोश ने कछुए को भी दौड़ लगाने की चुनौती दे दी। कछुए ने खरगोश की चुनौती मान ली और दौड़ लगाने के लिए तैयार हो गया।

जंगल के सभी जानवर कछुए और खरगोश की दौड़ देखने के लिए जमा हो गए। दौड़ शुरू हो गई और खरगोश तेजी से दौड़ने लगा और कछुआ अपनी धीमी चाल से आगे बढ़ने लगा। थोड़ी दूर पहुंचने के बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा, तो उसे कछुआ कहीं नहीं दिखा।

खरगोश ने सोचा, कछुआ तो बहुत धीरे-धीरे चल रहा है और उसे यहां तक पहुंचने में काफी वक्त लग जाएगा क्यों न थोड़ी देर आराम ही कर लिया जाए। यह सोचते हुए वह एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा।

पेड़ के नीचे ठंडी हवा में सुस्ताते-सुस्ताते कब उसकी आंख लग गई,उसे पता भी नहीं चला। उधर, कछुआ धीरे-धीरे बिना रुके लक्ष्य तक पहुंच गया। उसकी जीत देखकर बाकी जानवरों ने तालियां बजानी शुरू कर दी। तालियों की आवाज सुनकर खरगोश की नींद खुल गई और वो दौड़कर जीत की रेखा तक पहुंचा लेकिन कछुआ तो पहले ही जीत चुका था और खरगोश पछताता रह गया।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे ये सीख मिलती है कि जो धैर्य और मेहनत से अपना काम करता है उसकी हमेशा जीत होती है

हाथी और सियार – Moral Story Of Elephant And Jackal

चंदनवन नामक जंगल में सभी प्रकार के जानवर रहते थे जंगल में मोती नाम का एक हाथी भी रहता था। एक बार चंदनवन में दूसरे वन से घूमते -घूमते एक सियार आया सियार ने जब मोती हाथी को देखा।

उसे देखकर सियार के मुँह में पानी आने लगा सियार, हाथी को खाने के बारे में सोचने लगा और मन ही मन शिकार करने की योजना बनाने लगा। सियार हाथी के पास गया और उससे बोला, हाथी दादा हमारे जंगल में कोई राजा नहीं है, हमारे जंगल के सभी जानवर चाहते हैं,

कि कोई बड़ा और समझदार जानवर हमारे जंगल का राजा बने, आप बड़े और समझदार दोनों है,क्या आप हमारे जंगल का राजा बनना पसंद करोगे ? सियार की बात सुनकर हाथी खुश हो गया उसने राजा बनने के लिए हाँ बोल दिया इसपर सियार ने हाथी को अपने साथ चलने के लिए बोला हाथी राजा बनने की ख़ुशी में झूमते हुए सियार के साथ जाने के लिए तैयार हो गया सियार हाथी को ऐसे तालाब में ले गया।

जिस तालाब में दलदल था हाथी राजा बनने की ख़ुशी में इतना मस्त था कि वह बिना सोचे तालाब में नहाने उतर गया। जैसे ही हाथी दलदल वाले तालाब में उतरा हाथी के पैर दलदल में धंसने लगे उसने सियार से बोला तुम मुझे कैसे तालाब में ले आये मेरी मदद करो मेरे पैर दलदल में धंस गए हैं।

हाथी की बात सुनकर सियार जोर जोर से हंसने लगा और हाथी से बोला मैं तुम्हारा शिकार करना चाहता था इसलिए मैंने तुमसे राजा बनने की बात का झूठ बोली अब तुम दलदल में फंसकर मर जाओगे और मैं तुमको अपना भोजन बनाऊंगा सियार की बात सुनकर हाथी की आँखों से आंसू आने लगे उसने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की मगर वो बाहर नही निकल सका।

हाथी के मरने के बाद सियार हाथी को खाने के लालच में उसकी पीठ पर चढ़ गया। हाथी को खाने के लालच में सियार यह भूल गया कि वह भी हाथी के साथ दलदल में नीचे जाता जा रहा है और अंत में सियार भी हाथी के साथ धीरे धीरे दलदल में धंसकर मर गया।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि जो दूसरों का बुरा करता है उसके साथ भी बुरा होता है।

नन्ही चिड़िया – Moral Story Of The Tittle Bird

बहुत समय पहले एक बहुत घना जंगल हुआ करता था। एक बार किसी कारणवश पूरे जंगल में भीषण आग लग गई। यह देख सभी जानवर डर गए। कुछ ही देर में जंगल में भगदड़ मच गई, सारे जानवर इधर-उधर भाग रहे थे, पूरा जंगल जान बचाने में लगा हुआ था

उस जंगल में एक नन्ही चिड़िया रहती थी, उसने देखा कि सभी लोग डरे हुए हैं जंगल में आग लगी है मुझे लोगों की मदद करनी चाहिए। यह सोचकर वह शीघ्र ही पास की नदी के पास गई और चोंच में पानी लाकर आग में डालने लगी।

वह बार-बार नदी के पास जाती और अपनी चोंच में पानी भरकर आग पे डालती। एक उल्लू गुजर रहा था उसने पक्षी की इस हरकत को देखा और मन ही मन सोचने लगा कि यह पक्षी कितना मूर्ख हैअपनी चोंच में पानी भरकर इतनी भीषण आग कैसे बुझा सकता है।

यह सोचकर वह चिड़िया के पास गया और बोला कि तुम मूर्ख हो ऐसे में आग नहीं बुझाई जा सकती। चिड़िया ने बड़ी विनम्रता से उत्तर दिया”मुझे पता है कि मेरे प्रयास से कुछ नहीं होगा लेकिन मुझे अपनी पूरी कोशिश करनी होगी चाहे आग कितनी भी भयंकर क्यों न हो मैं अपना प्रयास नहीं छोड़ूँगी” यह सुनकर उल्लू बहुत प्रभावित हुआ। फिर वह भी चिड़िया के साथ आग बुझाने में लग गया उन दोनो को ऐसा करते देख जंगल के बाकी जानवर भी उनके साथ हो गये और देखते देखते जंगल की आग बुझ गई

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि कोई परेशानी आने पे हार नही मान लेनी चाहिए अपितु उसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए

लालची कुत्ता – Moral Story Of The Greedy Dog

छोटा सा कुत्ता था वह बहुत भूख से व्याकुल था। घूमते घूमते हैं उसे एक हड्डी मिली। जिसे देखकर बहुत खुश हुआ और लेकर चल दिया।रास्ते में आते हुए उसे एक तालाब मिला जिसमें उसकी परछाई दिखाई दे रही थी। पर उसे यह बात नहीं समझ में आई।

उसे लगा कि एक हड्डी और नीचे है। उसको उठाने के चक्कर में अपना मुंह खोला और उसके मुंह के हड्डी पानी में गिर गई। यह देखकर वह बहुत दुखी हुआ। इसीलिए कहते हैं लालच बुरी बला है।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे शिक्षा मिलती है की लालच बुरी बला है हमे लालच नही करना चाहिए

फूटा घड़ा – Moral Story Of Broken Pot

एक गांव में रमेश नाम का किसान रहता था उसका छोटा सा खेत था।उसके पास दो मिट्टी के घड़े थे। जिससे वहां रोज अपने घर के लिए पानी लाता था। लेकिन उनमें से एक घड़ा फूट चुका था।

जिससे नदी से पानी लाने पर एक घड़ा भरा रहता था और दूसरा घड़ा आधा खाली हो जाता था। जिस कारण फूटा घड़ा बहुत ही शर्मिंदा रहता था। सही घड़े को इस बात का बहुत घमंड था कि वह पूरा का पूरा पानी घर पहुंचाता है। सही खड़ा फूटे घड़े से कहता है तुम मालिक की मेहनत बर्बाद करते हो।

यह सुनकर फुटा घड़ा बहुत दुखी होता है। इस तरह दोनों घड़े की बातें सुनकर रमेश कहता है। कि तुम सिर्फ अपनी बुराई देख रहे हो पर मैं उस बुराई के साथ-साथ तुम्हारी अच्छाई भी देख रहा हूं। इसीलिए मुझे तुम्हारे अंदर कोई कमी दिखाई नहीं दी और तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि तुम हमारे किसी काम के नहीं हो। जाने अनजाने में तुमने हमारी बहुत मदद की है।

घड़ा बोला वह कैसे रमेश कहता है नदी से जब हर रोज घर वापस आते हैं तो तुम्हारा पानी वहां लगे पौंधों पर गिरता है जिससे उनमे फूल उगते है।घड़ा बोला इन सब में आपकी मदद कैसे हुई।रमेश बोला मैं खेती के साथ-साथ उन फूलों को भी बाजार में बेचता हूं जिससे हमें धन मिलता है। और यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है इसलिए तुम अपने आप को कभी कम मत समझना।

नैतिक शिक्षा – इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि हमे किसी के हुनर का मज़ाक नही ब्नाना चाहिए | अपितु उसकी अछाईयों को ढूंढकर उन्हे निखारने में मदद करनी चाहिए।

चींटी और कबूतर Moral Story Of Ant And Pigeon

एक समय की बात है एक चींटी पेड़ पर से तालाब में गिर गई। एक कबूतर ने उसे पानी में डूबते देखा। कबूतर ने तुरंत एक पत्ता तोड़ा और चींटी के पास फेंक दिया। चींटी झट से पट्टे पर चढ़ गई और कबूतर को धन्यवाद किया।

कुछ सप्ताह बाद एक बहेलियां जंगल में आया उसने कुछ दाने जमीन पर फेंके और अपना जाल बिछा दिया। वह चुपचाप किसी पक्षी के फसने का इंतजार कर रहा था। चींटी वहीं कहीं से गुजर रही थी तो उसने यह तैयारी देखी।

फिर देखती है कि वही कबूतर जिसने उसकी जान बचाई थी। उसी जाल में फंसने के लिए धीरे-धीरे नीचे उतर रहा है। चींटी ने जल्दी-जल्दी आगे बढ़ बहेलिए के पैर पर जोर से काट दिया। जिससे बहेलिया के मुंह से चीख निकल गई। और कबूतर उसकी आवाज सुनकर सब कुछ समझ गया। कबूतर दूसरी ओर उड़ गया जिससे उसकी जान बच गई।

नैतिक शिक्षा – ये कहानी हमे सिखाती है की कर भला तो हो भला।

तो दोस्तों आपको हमारा moral stories in hndi संग्रह कैसा लगा इस संग्रह में हमने बच्चों के लिए नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ लिखी हैं अगर आपको ये कहानियाँ पसंद आई हों तो पोस्ट को लाइक ज़रूर करें आपके कोई और सुझाव हों तो कॉमेंट करके हमें ज़रूर बतायें पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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