स्वच्छता पर निबंध (2022) | [14]+ Swachhata Per Nibandh

नमस्कार दोस्तों आज की पोस्ट swachhata per nibandh में आपका स्वागत है आज हम स्वच्छता के बारें में बताने जा रहें हैं, स्वच्छता पर निबंध आमतौर पर स्कूल या कॉलेज में बच्चों को निबंध लेखन प्रतियोगिता में दिया जाता है | स्वच्छता रखना सभी के लिए आवश्यक है | हमने इस निबंध के माध्यम से लोगो को स्वच्छता के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया है, तो आइए स्वच्छता का महत्व निबंध शुरू करतें है, हमें विस्वास है की आप अब स्वच्छता पर विशेष ध्यान देंगें |

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Swachhata Per Nibandh – स्वच्छता पर निबंध हिंदी में


स्वच्छता को पहली और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में सभी को लेना चाहिए। सभी को यह समझना चाहिए कि भोजन और पानी के रूप में स्वच्छता आवश्यक है। हालांकि, हमें भोजन और पानी के बजाय स्वच्छता को पहली प्राथमिकता देनी चाहिए। हम तभी स्वस्थ हो सकते हैं जब हम अपने भीतर हर चीज को बहुत साफ और स्वच्छ तरीके से रखे।

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स्वच्छता एक नौकरी नहीं है जिसे हमें पैसा कमाने के लिए करना पड़ता है। बल्कि यह एक बहुत अच्छी आदत है जिसे हमें एक अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन के लिए करना चाहिए। स्वच्छता एक सबसे बड़ा गुण है जिसका पालन सभी को जीवन स्तर को बढ़ाने के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में करना चाहिए।


बचपन हर किसी के जीवन का सुखद समय होता है, जिसके दौरान माता-पिता की सावधानी और नियमित निगरानी के तहत साफ-सफाई की आदत का उपयोग केवल चलने, बोलने, दौड़ने, पढ़ने, खाने आदि में किया जाना होता है।

स्कूल और कॉलेजों में, छात्रों को विभिन्न प्रकार की स्वच्छता के विषय पर बहुत सारी परियोजनाए, और घर के काम दिए जाते हैं। यह अब बहुत महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि सफाई की कमी के कारण होने वाली बीमारियों के कारण एक बड़ी आबादी रोजाना मर रही है।


इसलिए हमारे जीवन में स्वच्छता के महत्व और आवश्यकता के बारे में जागरूक होना बहुत आवश्यक है। हम सभी को मिलकर हजारों जिंदगियों को बचाने और उन्हें स्वस्थ जीवन देने के लिए स्वच्छता की दिशा में एक कदम उठाने की जरूरत है। हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत नामक एक अभियान शुरू किया है। एक भारतीय नागरिक के रूप में हम सभी को इस अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में अपनी सक्रिय भागीदारी दिखानी चाहिए।


स्वच्छता एक क्रिया है जिससे हमारा शरीर दिमाग, कपड़े, घर, आसपास और कार्यक्षेत्र साफ और शुद्ध रहते है। हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिये साफ-सफाई बेहद जरुरी है। अपने आसपास के क्षेत्रों और पर्यावरण की सफाई सामाजिक और बौद्धिक स्वास्थ्य के लिये बहुत जरुरी है।

हमें साफ-सफाई को अपनी आदत में लाना चाहिये और कूड़े को हमेशा कूड़ेदान में ही डालना चाहिये, क्योंकि गंदगी वह जड़ है जो कई बीमारियों को जन्म देती है। हमे साफ-सफाई रखने के लिए कुछ बातें याद रखनी है जो निम्नलिखित है,

कैसे रखें साफ – सफाई

  • खुले में शौच न जाएं।
  • घरों का कचरा बाहर न फैलाएं। नालियों की साफ-सफाई का रखें खास ख्याल।
  • पानी की निकासी की सही व्यवस्था करें, गंदे पानी को जमा नहीं होने दें।
  • सार्वजनिक स्थलों पर बिस्किट, चिप्स के खाली पैकेट या फिर फलों के छिलके न फेंके बल्कि इसे एक पॉलीथीन में रखें और फिर किसी डस्टबिन में डालें।
  • नगर-निगम के सफाई कर्मचारियों पर ही सिर्फ-सफाई की जिम्मेदारी न छोड़े, बल्कि खुद भी साफ-सफाई रखने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
  • बच्चों के अंदर घर से ही साफ-सफाई की आदत डालें।
  • अगर नगर-निगम के सफाई कर्मचारी रोजाना सफाई नहीं करें अथवा ढंग से काम नहीं करें तो उनकी लापरवाही से निगम को अवगत करवाएं ताकि उचित सफाई व्यवस्था बनी रहे।
  • जानवरों के लिए उचित प्रबंध करें ताकि वे खुले में मल-मूत्र से गंदगी न फैला सकें और अनावश्यक कीटाणु न पनप सके।

छात्र और बच्चो के लिए स्वच्छता

बचपन से ही बच्चो को स्वच्छता का महत्व बताना चाहिए। अगर यह अच्छी आदत बच्चो को बचपन से लग जाए तो उन्हें आगे चलकर घर और परिसर को साफ़-सुथरा रखने में कोई भी तकलीफ नहीं होगी।

ऐसे करने से उनका भविष्य अच्छा तो बनेगा ही साथ ही उन्हें किसी भी किसी भी बीमारी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।

हमने कभी भी खुद की संपत्ति और सार्वजनिक सम्पति में भेदभाव नहीं करना चाहिए। बस स्टॉप, बाग, अस्पताल, दफ्तर और स्कूल को अपना समझकर साफ़-सुथरा रखने की कोशिश करनी चाहिए। अगर सभी सार्वजनिक जगह साफ़-सुथरी रहेगी तो सभी का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और इसका अप्रत्यक्ष रूप से यह परिणाम होगा की हमारा देश और अर्थव्यवस्था और भी अधिक मजबूत होगी।

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Swachata Par Nibandh – स्वच्छता पर निबंध और भाषण


स्वच्छता मानव समुदाय का एक आवश्यक गुण है । यह विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव के सरलतम उपायों में से एक प्रमुख उपाय है । यह सुखी जीवन की आधारशिला है । इसमें मानव की गरिमाए शालीनता और आस्तिकता के दर्शन होते हैं । स्वच्छता के द्वारा मनुष्य की सात्विक वृत्ति को बढ़ावा मिलता है ।

साफ-सुथरा रहना मनुष्य का प्राकृतिक गुण है । वह अपने घर और आस-पास के क्षेत्र को साफ रखना चाहता है । वह अपने कार्यस्थल पर गंदगी नहीं फैलने देता । सफाई के द्वारा वह साँपों, बिच्छुओं, मक्खियों, मच्छरों तथा अन्य हानिकारक कीड़ों-मकोड़ों को अपने से दूर रखता है । सफाई बरतकर वह अपने चित्त की प्रसन्नता प्राप्त करता है । सफाई उसे रोगों के कीटाणुओं से बचाकर रखती है । इसके माध्यम से वह अपने आस-पड़ोस के पर्यावरण को प्रदूषण से मुक्त रखता है ।

कुछ लोग अपने स्वभाव के विपरीत सफाई को कम महत्त्व देते हैं । वे गंदे स्थानों में रहते हैं । उनके घर के निकट कूड़ा.कचरा फैला रहता है । घर के निकट की नालियों में गंदा जल तथा अन्य वस्तुएँ सड़ती रहती हैं । निवास-स्थान पर चारों तरफ से बदबू आती है । वहाँ से होकर गुजरना भी दूभर होता है । वहाँ धरती पर ही नरक का दृश्य दिखाई देने लगता है ।

ऐसे स्थानों पर अन्य प्रकार की बुराइयों के भी दर्शन होते हैं । वहाँ के लोग संक्रामक बीमारियों से शीघ्र ग्रसित हो जाते हैं । गंदगी से थल, जल और वायु की शुद्धता पर विपरीत असर पड़ता है ।

साफ-सफाई न रखने पर होने वाले नुकसान

  • साफ-सफाई नहीं रखने पर हैजा, डायरिया, मलेरिया समेत तमाम तरह की बीमारियां पनपती हैं।
  • स्वच्छता नहीं होने पर व्यक्ति स्वस्थ महसूस नहीं करता, इससे उसके शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी नहीं हो पाता जिससे वह अपने जीवन में सफल नहीं हो पाता।
  • अस्वच्छता, स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में बाधा डालती है।

निष्कर्ष – स्वच्छता मानव समुदाय के लिए अतियावश्यक है, साफ-सुथरा रहना मनुष्य का प्राकृतिक गुण है, स्वच्छता के द्वारा मनुष्य की सात्विक वृत्ति को बढ़ावा मिलता है। इसलिए स्वच्छता का होना ज़रूरी है अगर साफ-सफाई नही होगी तो धरती पर केवल गंदगी ही गंदगी रहेगी और चारो तरफ बस बीमारियाँ ही बीमारियाँ पैदा होंगी, जिसका प्रभाव हमारे आने वाले कल पर पड़ेगा, इसलिए अगर हम सभी को अच्छा जीवन जीना है तो साफ-सफाई पर ध्यान देना होगा।

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Swachh Bharat Abhiyan Essay In Hindi – स्वच्छता अभियान पर निबंध


स्वच्छ वातावरण हर किसी को पसंद होता है लेकिन बहुत कम लोगों के पास स्वच्छता बनाए रखने की क्षमता होती है। स्वच्छता के महत्व के कारण, अधिकांश लोग अपने वातावरण को हर समय साफ रखने के लिए संघर्ष करते हैं। यह एक रोजाना कि प्रक्रिया हो सकती है क्योंकि इसे दैनिक आधार पर करने की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता व्यक्ति के जीवन का एक अनिवार्य पहलू है क्योंकि यह सामान्य रूप से सामाजिक संबंधों, आत्म-धारणा और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इसलिए हर समय स्वच्छता रखना महत्वपूर्ण है।

हमारे जीवन पर स्वच्छता का प्रभाव

स्वच्छता दैनिक जीवन की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा में स्वच्छता का झुकाव पर प्रभाव पड़ता है। छात्रों की मानसिकता पर्यावरण से प्रभावित होती है जो छात्रों की सीखने की क्षमता को प्रभावित करती है। एक गंदा वातावरण सीखने के लिए अनुकूल नहीं है क्योंकि यह तनावपूर्ण गति पैदा करता है और छात्रों की सीखने की क्षमता कम हो जाती है।

कार्यस्थल में भी यही बात लागू होती है क्योंकि उत्पादकता पर्यावरण से प्रभावित होती है। एक स्वच्छ वातावरण उत्पादकता को बढ़ाएगा क्योंकि लोग सकारात्मक मानसिकता के साथ काम करेंगे जो तनाव से मुक्त है। साथ ही गंदे वातावरण की तुलना में स्वच्छ वातावरण में उपलब्धियाँ अधिक स्पष्ट होंगी। स्वास्थ्य में, स्वच्छता महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वच्छ व्यवहार व्यक्तियों के अच्छे स्वास्थ्य में योगदान देता है। एक गंदा वातावरण लोगों को बीमारियों का शिकार करता है।

सामाजिक संबंध लोगों के बीच बातचीत के माध्यम से निर्मित होते हैं। व्यक्तिगत स्वच्छता सामाजिक संबंधों को बनाने में एक महत्वपूर्ण पहलू है क्योंकि यह एक गंदे व्यक्ति से संपर्क करना मुश्किल है क्योंकि उन्हें सांस की बदबूए शरीर की गंध और असुविधा के कारण बातचीत सीमित होगी।

स्वच्छता में चुनौतियां

संसाधनों की कमी से स्वच्छता बाधित हो सकती है। सफाई बनाए रखने के लिए पानी, डिटर्जेंट और सफाई उपकरणों जैसे अन्य वस्तु की आवश्यकता होती है। कुछ स्थितियों में ये सभी संसाधन अनुपलब्ध हो सकते हैं | इसलिए स्वच्छता से समझौता किया जाता है।

निष्कर्ष अंत में, स्वच्छता एक बड़ी जिम्मेदारी है जिसके लिए प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। प्रदर्शन और उपलब्धियों पर एक स्वच्छ वातावरण के प्रभाव एक प्रेरक कारण होने चाहिए। यदि आप एक साफ जगह से प्यार करते हैं तो इसे साफ करना आपकी जिम्मेदारी होनी चाहिए |

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Essay On Swachata In Hindi – स्वच्छता का महत्व हिंदी निबंध


स्वच्छता का अर्थ होता है हमारे शरीर, मन और चारो तरफ की चीजो की सफाई रखना। स्वच्छता को मानव समुदाय के एक सबसे आवश्यक गुणों में से एक माना जाता है। विभीन्न प्रकार की बीमारियो से बचने का यह बिलकुल सरल उपाय है।

स्वच्छता हर एक मनुष्य को मानसिक, सामाजिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए जरूरी है। भारतीय संस्कृति में भी वर्षों से मान्यता है कि जहां पर स्वच्छता होती है वहां पर लक्ष्मी का वास होता है

भारत के धर्म ग्रंथों में भी साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़े कई निर्देश दिए गए हैं। भारत देश के एक वास्तविकता यह है कि यहां पर अन्य स्थानों की अपेक्षा सबसे अधिक गंदगी पाई जाती है।

धार्मिक स्थलों पर विविध आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालु नेकेड स्वच्छता से अंजान होकर बहुत गंदकी फैलाते हैं। स्वस्थ शरीर, तन और आत्मा के लिए स्वच्छता बहुत ही महत्वपूर्ण है।

शारीरिक स्वच्छता के साथ-साथ हमारे आचरण कि स्वच्छता बहुत जरूरी होती है शुद्ध आचरण से मनुष्य का चेहरा उज्जवलित या तेजोमय रहता है। जिसके कारण सभी लोग उस व्यक्ति को आदर की दृष्टि से देखते हैं। स्वास्थ्य रक्षा के लिए भी स्वच्छता बहुत अनिवार्य होती है। जब मनुष्य स्वच्छ रहता है तो उसमें एक तरह की स्फूर्ति और प्रसन्नता आति है।

स्वच्छता हमे मानसिक, शारीरिक, सामाजिक, और बौद्धिक हर तरीके से स्वस्थ बनता है। सामान्यतः, हमने हमेशा अपने घर मे ये ध्यान दिया होगा कि हमारी दादी और मां पूजा से पहले स्वच्छता को लेकर सख्त होती है | तब हमें यह व्यवहार कुछ अलग नहीं लगता, क्योंकि वो बस साफ सफाई को हमारी आदत बनाना चाहती है। लेकिन वो ग़लत तरीका अपनाती है, क्योंकि वो स्वच्छता के उद्देश्य और फायदे को नहीं बताती है, इसी वजह से हमे स्वच्छता का अनुसरण करने में समस्या आती है।

हर अभीवावक को तार्किक रूप से स्वच्छता के उद्देश्य, फायदे और जरूरत आदि के बारे में अपने बच्चो से बात करनी चाहिए। उन्हे जरूर बताना चाहिए कि स्वच्छता हमारे जीवन में खाने और पानी की तरह पहली प्राथमिकता है।

अपने भविष्य को चमकदार और स्वस्थ बनाने के लिए हमे हमेशा खुद को और अपने आसपास के पर्यावरण का ख्याल रखना चाहिए। हमे साबुन से नहाना, नाखूनों को काटना, साफ और इस्त्री किए हुए कपड़े आदि कार्य रोज करना चाहिए।

घर को कैसे स्वच्छ और शुद्ध बनाए ये हमे अपने माता-पिता से सीखना चाहिए। हमे अपने आसपास के वातावरण को साफ रखना चाहिए ताकि किसी प्रकार की बीमारी ना फैले। कुछ खाने से पहले और खाने के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिए। हमे पूरे दिन साफ और शुद्ध पानी पीना चाहिए, हमे बाहर के खाने से बचना चाहिए, साथ ही ज्यादा मसालेदार और तैयार पेय पदार्थ से परहेज़ करना चाहिए। इस प्रकार हम खुद को स्वच्छ के साथ-साथ स्वस्थ भी रख सकते है।

जिन लोगो को गन्दी आदते होती हैं वो भी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों को फैलाते है। संक्रमित रोग बड़े क्षेत्रों में फैलाते है और लोगो को बीमार करते है। कई बार तो इससे मौत भी हो जाती है, इसलिए हमे नियमित तौर पर अपने स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। हम जब भी कुछ खाने जाए तो अपने हाथो को साबुन से धो ले। अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हमे बिल्कुल साफ कपड़े पहनने चाहिए। स्वच्छता से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और दुसरो का भी हम पर भरोसा बनता है। ये एक अच्छी आदत है जो हमे हमेशा खुश रखेगी। ये हमे समाज मे बहुत गौरांवित महसूस कराएगी।

निष्कर्ष अगर हमे जानलेवा बीमारियों से बचना है, अपने भविष्य को चमकदार और स्वस्थ बनाना है, तो अपने साथ-साथ अपने आस-पास वालो को भी साफ-सफाई के महत्व को समझाना होगा, ताकि हमारा भारत हमेशा साफ सुथरा रहे बीमारियो से दूर रहे |

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Essay On Cleanliness – स्वच्छता पर निबंध हिंदी में


हम सब जानते हैं, कि हम रोज़ाना स्वास्थ्य के आने वाले जोखिम से पूरी तरह से अवगत हैं | और इसने स्वच्छता को हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है। असल मेंए बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू जैसे नई दुनिया के विशाल रोगों को स्वच्छता की कमी के साथ संबद्ध किया गया है। हम आज बेहतर स्वच्छता बनाए रखने की दिशा में काम करते हैं, तो इससे निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी को मदद मिलेगी।

स्वच्छता एक आदत है जिसे महत्व दिया जाना चाहिए और कम उम्र से ही बच्चों में इसकी शुरुआत की जानी चाहिए। स्वच्छता सिर्फ हमारे शरीर के बारे में नहीं होना चाहिएय इसे हमारे परिवेश को अच्छा बनाए रखने पर भी ध्यान देना चाहिए।

भारत में कठोर मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुएए स्वच्छ रहना और अपने प्रियजनों को स्वच्छता के महत्व की शिक्षा देना बेहद जरूरी है। एक भारतीय होने के नाते हमने हमेशा स्वच्छता के बारे में अपनी कमी देखी है और यह उचित समय है कि हम उस धारणा को बदल दें।

हमें अपनी आदतों में स्वच्छता लानी चाहिए और हर जगह से गंदगी को हमेशा के लिए हटा देना चाहिए क्योंकि गंदगी ही वह माँ है जो विभिन्न बीमारियों को जन्म देती है। यदि वह प्रतिदिन स्नान नहीं करता हैए गंदे कपड़े पहनता हैए घर और आसपास के वातावरण को गंदा रखता है आदि।

आसपास के इलाकों या घर में गंदी चीजें कीटाणुए बैक्टीरिया, वायरस और फंगस पैदा करती हैं। गंदी आदतें रखने वाले लोग खतरनाक और घातक जानलेवाद्ध बीमारियों के फैलने का कारण भी बनते हैं। संक्रामक रोग विशाल क्षेत्रों में फैले हुए हैं | और लोगों को बीमार और कभी.कभी मौत का कारण बनाते हैं।

हम सभी लोग साफ सफाई कैसे रखेंFew lines On Swachhata Per Nibandh

  • सुनिश्चित करें कि आप एक प्रतिदिन पर दो बार अपने दांतों को ब्रश करें।
  • सुनिश्चित करें कि आप दैनिक स्नान करेंए और मौसम की स्थिति पर निर्भर होते हुए दो बार स्नान करने से परहेज़ न करें अगर ज़रूरी लगे। स्नान वास्तव में महत्वपूर्ण है।
  • सुनिश्चित करें कि रोज अपने नाख़ून काटेंगें
  • सुनिश्चित करें कि आप घर और घर के आसपास के इलाकों को साफ रखेंगें
  • सुनिश्चित करें कि आप खुली जगहों पर ना थुकें
  • साफ कपड़े पहनेगें
  • नालियों की साफ.सफाई का रखें खास ख्याल।
  • खुली जगहों पर शौच न करें

साफ सफाई क्यू ज़रूरी है? स्वच्छता पर 10 लाइन– 10 Points On Swachhata Per Nibandh

  • वातावरण स्वच्छ और सुंदर रखने के लिए साफ.सफाई जरूरी है।
  • स्वच्छता हमारे जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
  • बचपन से ही हमें अपने साफ.सफाई को आदत में लाना चाहिए।
  • गंदगी से कई तरह की बीमारियाँ पैदा होती है जो मानव जीवन के विकास में बाधा डालती है।
  • स्वच्छता से ही हम बीमारियों को खत्म कर सकते हैं।
  • हमें अपने घर के साथ ही आसपास की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।
  • वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए हमें पौधे लगाने चाहिए।
  • स्वच्छता को बनाए रखने के लिए हमें इधर.उधर कचरा नहीं भेजना चाहिए। कूड़ेदान में हमेशा कचरा फेंकना चाहिए।
  • हमारे लिए शरीर की भी स्वच्छता बहुत जरूरी है जैसे रोज नहाना, स्वच्छ कपड़े पहनना, दाँत साफ करना, नाखून काटना आदि।
  • कहा भी गया है स्वच्छता पर ईश्वर का वास होता है। अंततः स्वच्छता को अपनाएं और देश को आगे बढ़ाएं।

निष्कर्ष – हमारे लिए शरीर की भी स्वच्छता बहुत जरूरी स्वच्छता है, स्वच्छता से ही हम बीमारियों को खत्म कर सकते हैं। स्वच्छता आवश्यक रूप से अपनानी चाहिए | गंदगी कई तरह की खतरनाक और जानलेवा बीमारियों की उत्पत्ति का कारण होती हैं। स्वच्छता जानलेवा बीमारियों को कम करती हैं। इसलिए स्वच्छता अति आवश्यक है।

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Swachata Ka Mahatva – साफ-सफाई का महत्व निबंध


स्वच्छता एक आदत होनी चाहिये जिसे हम सभी को आवश्यक रूप से अपनाना चाहिए। अच्छे परिवेश और अच्छे संस्कार के लिए स्वच्छता काफी जरूरी है।

अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हमें अपने शरीर की सफाई बहुत आवश्यक है। वहीं हमें अच्छे सामाजिक और बौद्धिक स्वास्थ्य के लिए आसपास के क्षेत्रों और पर्यावरण की स्वच्छता पर बहुत आवश्यक ध्यान देना चाहिए ।

गंदगी कई तरह की खतरनाक और जानलेवा बीमारियों की उत्पत्ति का कारण होती हैं। कई तरह के बैक्टीरिया वायरस का जन्म अपने आसपास स्वच्छता ना रखने के कारण ही होता है।

अस्वच्छता बीमारियों की उत्पत्ति का सबसे बड़ा कारक है। अतः हम सभी को नियमित रूप से अपने शरीर और अपने आस-पास की सफाई करनी चाहिए।

खाना खाने से पहले हमें अपने हाथों को अच्छी तरह से धोना चाहिए। कपड़ों की साफ सफाई खुद रखनी चाहिए।
स्वच्छता आत्मविश्वास के साथ.साथ आत्मसम्मान को भी बढ़ाने का काम करती है। एक स्वस्थ जीवन शैली और जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए स्वच्छता बहुत आवश्यक है।

स्वच्छता रखने से जिंदगी में खुशहाली भी आती है तथा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। स्वच्छता रखने से देश का ही आर्थिक विकास होता है।

स्वच्छता को हम सभी को एक आंदोलन बनाकर अपने स्तर पर साफ.सफाई रखकर लोगों को जागरूक करना चाहिए।

स्वच्छता को आदत बनाकर रखने से कई तरह के नकारात्मक प्रभाव से हम बच सकते हैं। हमें अपनी दिनचर्या में साफ.सफाई के बारे में सोचना चाहिए। और कचरो के उचित निपटान के पहलुओं पर ध्यान देकर गंदगी का सही तरीके से निपटारा करना चाहिए। ताकि संक्रमण न फैले और हमए हमारा और हमारा समाज कई तरह की बीमारियों से बच सकें।

स्वच्छता प्रत्येक कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।

स्वच्छता हम सभी की सभ्यता को भी दर्शाती हैं इसलिए हम सभी को शपथ लेना चाहिए कि स्वच्छता रखकर अपने समाज को सभ्य बनाने का प्रयास करेंगे।

स्वच्छता पर महात्मा गाँधी के विचारGandhi JI Thoughts On Swachhata Per Nibandh

  • महात्मा गांधी जी ने कहा था कि राजनीतिक स्वतंत्रता से ज्यादा स्वच्छता है।
  • यदि कोई व्यक्ति स्वच्छ नहीं है तो वह स्वास्थ्य नहीं रह सकता।
  • मैं किसी को गंदे पैर के साथ अपने मन सेए नहीं गुजरने दूँगा।
  • नदियों को स्वच्छ रख कर हम अपनी सभ्यता को जिंदा रख सकते हैं।
  • बेहतर साफ-.सफाई से ही भारत के गांव को आदर्श बनाया जा सकता है।
  • स्वच्छता को अपने आचरण में इस तरह से लोग कि वह अपनी आदत बन जाए।
  • अपनी गलती को स्वीकार ना झाड़ू लगाने के समान है जो सतह को चमकदार व साफ कर देता है।
  • हर किसी एक को अपना कूड़ा खुद साफ करना चाहिए।
  • स्वच्छता भक्ति के बाद दूसरी महत्वपूर्ण चीज है।
  • जब तक आप झाड़ू और बाल्टी को अपने हाथ में नहीं लेते हैं, तब तक आप अपने कस्बों को साफ नहीं कर सकते हैं।

निष्कर्ष – हम सबको मिलजुल करके अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ और साफ सुथरा रखना होगा। तभी हमारा और हमारे देश का विकास होगा। हम बीमारियो से पीछा छुड़ा पाएँगें, सरकार चाहे जीतने भी स्वच्छता कार्यक्रम चला ले जब तक देश की जनता स्वच्छता पर ध्यान नही देगी। तब तक कुछ नही हो सकता अब केवल हमे ही एकजुट होकर स्वच्छता कार्यक्रम को बढ़ावा देना होगा।

Source : Suvichar Kosh

हमारी आज की पोस्ट swachhata per nibandh को पढ़ने के लिए धन्यवाद। अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगीं हो तो इसे शेयर करना ना भूलें, हमारे ब्लॉग पर हमेशा उच्च गुणवता वाला पोस्ट लिखा जाता है। हमारी आज की पोस्ट का बस एकमात्र उद्देश्य ये है की भारत हमेशा स्वच्छ और साफ सुथरा रहे। बीमारियो से मुक्त रहे, मैने गंदगी की समस्या को सुलझाने और उनके बारे में aware करने की एक छोटी सी कोशिश है। मेरा मानना है कि अगर समस्या है तो उसका समाधान भी है। जरुरत है तो उसके खिलाफ काम करने की।

आशा करता हूं! एक भारतीय होने के नातें आप भारत को स्वच्छ बनानें पर अमल करेंगें। एक motivational ब्लॉग होने के कारण मेरा पूर्ण प्रयास रहता है कि जिन भी विषयों पर मै लेख लिखू। वो आप के लिए ज्ञान और शिक्षा का अच्छा स्रोत हो।

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