[9]+ My School Essay In Hindi | मेरा विद्यालय पर निबंध (2022)

दोस्तो हिन्दी व्याकरण में आज हम आपके लिए लाए है my school essay in hindi, जो की बहुत ही सरल भाषा में लिखे हैं। विद्यालय और शिक्षा हमारे जीवन में किस प्रकार महत्व रखती है, यह हमने निबंध की सहायता से बताया है। शिक्षित व्यक्ति को समाज में अलग तरह से देखा जाता है। इसलिए हर व्यक्ति का शिक्षित होना जरूरी है। आप हमारे इन निबंधो को स्कूल या कॉलेज में निबंध प्रतियोगिता में लिख सकतें है। और सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं।

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My School Essay In Hindi – मेरे विद्यालय पर निबंध


प्रस्तावना

विद्या हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है, शिक्षित व्यक्ति को समाज में अलग तरह से देखा जाता है। इसलिए हर व्यक्ति का शिक्षित होना जरूरी है। अच्छी शिक्षा उस स्कूल से शुरू होती है जहां शिक्षक ज्ञान देते हैं। विद्यालय शब्द विद्या़+आलय दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है विद्या का घर। विद्यालय का अर्थ यह भी है कि जहां विद्या निवास करती है। जिसकी अहमियत शायद हम बड़े होने के बाद समझ पाते हैं।

विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुल भाग्याक्षय चश्रायो धेनु कामदूध रतिश्च विराहे नेत्रम तृतीया चा सा। सत्कारयतनम् कुलस्य महिमा रत्नैरवीना भूषणम् तस्मादान्यमुपेक्ष्य सर्वविश्यम विद्याधिकारम कुरु।

मेरे विद्यालय का परिचय

मेरे विद्यालय का नाम नवोदय विद्यालय है जो एक आवासीय विद्यालय हैए मेरा विद्यालय एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी एक बड़ी बिल्डिंग है। मेरा विद्यालय एक अंग्रेजी माध्यम विद्यालय है, जिसमें छोटे शहरों और गाँवों के प्रतिभाशाली बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। मेरे विद्यालय में एक प्राचार्य एक उप प्राचार्यए शिक्षक और अन्य कर्मचारी मिलाकर 60 से भी ज्यादा लोगों का स्टाफ है विद्यालय में छठवीं से बाहरवीं तक कक्षाएं है। और लगभग 1000 विद्यार्थी पढ़ते हैं।

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मेरे विद्यालये की गतिविधियाँ

विद्यालय में एक बड़ा सा प्रार्थना स्थल है, जहाँ सभी विद्यार्थी इकठ्ठा होकर प्रार्थना करते है। और अन्य कार्यकर्मो का आयोजन भी यही पर होता है, मेरे विद्यालय में एक पुस्तकालय है, जिसमे हर तरह की पुस्तकें उपलब्ध है। और एक कंप्यूटर कक्ष है, जहाँ हमें कंप्यूटर सिखाया जाता है।

मेरे विद्यालय में कई खेलों के मैदान है जिनमें क्रिकेट, फुटबॉल, बास्केटबॉल, खो-खो, हैंडबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी, कबड्डी जैसे खेल सिखाए जाते हैं विद्यालय में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी की प्रयोगशाला है। जिनमें बच्चों को प्रैक्टिकल जानकारी प्रदान की जाती है।

मेरे विद्यालय के सभी शिक्षक इस विषय में अनुभवी और योग्य हैं। मेरे स्कूल का माहौल पढ़ाई के लिए अनुकूल है और हर साल मेरे स्कूल के छात्र अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण होते हैं। मेरे स्कूल में एक संगीत कक्ष भी है, जहाँ संगीत और वाद्य यंत्रो का वादन करना सिखाया जाता है।

मेरे विद्यालय में प्रतिवर्ष एक वार्षिक उत्सव कार्यक्रम भी होता है। जिसमें बच्चे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, और अपना हुनर दिखाते हैं।

मेरे विद्यालय में रहन सहन की व्यवस्था

मेरे मैं छात्रों के रहने के लिए बहुत अछा हॉस्टिल हैं |जिसमे कई बड़े बड़े हॉल हैं, जो काफ़ी हवादार और साफ हैं, एक हॉल मैं कई विद्यार्थी साथ रहते हैं। विद्यालय में पीने के पानी और शौचालय की उचित व्यवस्था है। मेरे स्कूल में एक मेडिकल रूम और नर्स मैडम भी हैं, जो बच्चों के बीमार होने पर उनका उचित इलाज करती हैं, और साथ ही नियमित रूप से सभी की जांच भी करती हैं।

विद्यालय में छात्रों के खानपान की भी उचित व्यवस्था है, यहाँ हमे खाने के बाद दूध भी दिया जाता है। मेरे विद्यालय में हर महीने माता-पिता और शिक्षकों की मीटिंग का आयोजन भी किया जाता है, जिसमे माता-पिता को बच्चे की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी जाती हैं।

मेरे विद्यालय के प्रवेश द्वार पर एक नोटिस बोर्ड लगा है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को विद्यालय में हो रही गतिविधियों की जानकारी दी जाती है। स्कूल में एनसीसी और स्काउट भी होते हैं, जिसमें बच्चे उत्साह से भाग लेते हैं और स्कूल के लिए मेडल जीतकर लाते हैं।

मेरे स्कूल में भी हरियाली का ध्यान रखा गया है, स्कूल परिसर में तरह-तरह के हरे-भरे पेड़ लगाए गए हैं, और फूलों के बाग भी लगाए गए हैं जो स्कूल परिसर को खास सुंदरता देते हैं।

मेरे विद्यालय की दिनचर्या

मेरे स्कूल का समय सुबह 7 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक है। सभी विद्यार्थी 7 बजे विद्यालय आते हैं और सबसे पहले प्रार्थना स्थल पर एकत्रित होते हैं। सभी छात्रों और शिक्षकों के आगमन के बाद प्रार्थना का आयोजन किया जाता है। इसके बाद सभी छात्र-छात्राएं अपनी-अपनी कक्षाओं में जाकर पढ़ाई करते हैं। लगातार चार पीरियड्स पढ़ने के बाद सुबह 11 बजे ब्रेक होता है और फिर 1;30 बजे सभी क्लास बंद कर दी जाती हैं।

निष्कर्ष

मेरा विद्यालय बहुत सुंदर है और मुझे विद्यालय की प्रत्येक गतिविधि में भाग लेना अच्छा लगता है। हम सभी विद्यार्थी मिलकर विद्यालय परिसर की साफ़-सफाई करते हैं। ताकि गन्दगी की वजह से कोई विद्यार्थी बीमार ना हो | मुझे विद्यालय में कंप्यूटर कक्ष बहुत पसंद हैं। जहाँ हमं तकनीक से जुड़ना सिखाया जाता है, अंत में यही कहना चाहता हूं कि मुझे अपने विद्यालय से बहुत प्यार हैं।

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इस पोस्ट में हमने मेरा विद्यालय पर निबंध हिन्दी में लिखा है। स्कूल के विद्यार्थी जो मेरी पाठशाला पर निबंध की खोज में हैं वे इस निबंध की मदद ले सकते हैं। यह मेरी पाठशाला हिंदी निबंध आपके लिए काफी मददगार साबित होगा। इस लेख में मेरा विद्यालय पर निबंध लिखा गया है जो छोटी कक्षा वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में पूछा जाता है। यह लेख आपको इस विषय पर निबंध लिखने में मदद करेगा। आप अपनी सुविधा के अनुसार इसमें बदलाव कर सकते है।

my school essay 10 line

मेरा विद्यालय पर 10 लाइन

  • मेरे विद्यालय का नाम दयानंद पब्लिक हाई स्कूल है।
  • मेरा विद्यालय बहुत बड़ा और भव्य है, यह भुबनेश्वर में स्थित है।
  • मेरे विद्यालय में प्रथम वर्ष से बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है।
  • मेरे स्कूल का वक्त सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम के 5:00 बजे तक का है।
  • हमारे स्कूल की इमारते पक्की बनी हुई है, जिसमे हर कक्षा के लिए अलग अलग कमरे है।
  • मेरे स्कूल में खेल के लिए मैदान की व्यवस्था है।
  • मरे विद्यालय में पढ़ाई के साथ ही व्यक्तिमत्व विकास और शारीरिक विकास पर भी ध्यान दिया जाता है।
  • मेरे विद्यालय के समस्त शिक्षक बेहतरीन प्रतिभा वाले हैं। जो हमारे लिए आदर्श हैं। और जो हमे शिक्षा के अलावा व्यवहारिक ज्ञान को भी समय समय मे प्रदान करते हैं।
  • यहां पर एक बड़ी सी लाइब्रेरी हैं। जहां पर सभी प्रकार की ज्ञानवर्धक पुस्तको का भंडार हैं। छात्र अपनी आवश्यकता अनुसार यहां से पुस्तक आसानी कुछ दिनों हेतु पा सकते है।
  • मेरे स्कूल में एक बड़ा सा बगीचा भी है, जिसकी देखभाल हम सभी छात्र करते हैं।

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प्रस्तावना

किसी भी राष्ट्र के विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान होता है। बच्चों के भविष्य निर्माण में शिक्षा स्थानों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। संस्कृत में विद्या+आलय अर्थात् विद्या का स्थान। इस रूप में विद्यालय का प्रयोग किया जाता है।

अंग्रेजी के स्कूल शब्द की व्युत्पति ग्रीक शब्द SKHOLE स्कौले से हुई है। जिसका अर्थ है अवकाश । प्राचीन यूनान में इन अवकाश के स्थलों को स्कूल’ कहा जाता था।।और अवकाश को आत्म विकास’ करने के स्थान के रूप में माना जाता था। यूनानी देशों में ऐसे स्थानों को विद्यालय कहा जाता था। जहाँ अवकाश के समय चर्चा या वाद-विवाद होता था। लेकिन बाद में इन स्थानों को व्यवस्थित शिक्षा के केन्द्रों में बदल दिया गया।

टी.पी. नन के अनुसार विद्यालय को ऐसा स्थान नहीं समझा जाना चाहिए, जहां किसी निश्चित ज्ञान को सीखा जाता है, अपितु यह ऐसा स्थान है जहां छात्रों को क्रियाओं के उन विशेष रूपों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जो संसार में सर्वाधिक महत्व रखती है।

हमारे विद्यालय का परिचय

मेरे विद्यालय का नाम गाँधी इंटर कॉलेज है, जो शहर के प्रख्यात विद्यालयों में से एक है। मेरे विद्यालय में कुल एक से लेकर 12वीं तक की शिक्षा दी जाती है। हमारे विद्यालय में कुल दो हज़ार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इसके अलावा बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कुल 80 अध्यापक और 10 सहायक स्टाफ हैं।

मेरे विद्यालय में बिजली की अच्छी व्यवस्था है तथा आवश्यकता के लिए जनरेटर भी लगाया गया है। बच्चों के पीने के लिए साफ पानी की व्यवस्था की गई है। हमारे विद्यालय में हरियाली का ध्यान रखते हुए बहुत से पेड़ लगाए गये हैं, जो पूरे विद्यालय को बेहद ठंडा और सुकून भरा वातावरण प्रदान करते हैं।

हमारे विद्यालय की इमारत

हमारे विद्यालय में कुल चार मंजिलें हैं जिनमें प्रत्येक मंजिलें में 12 कमरे स्थित हैं। यहां के प्रत्येक कमरे अत्यंत हवादार और रोशनी दार हैं।विद्यालय के प्रत्येक कमरों में 6 खिड़कियां हैं जिनसे बाहर का हरा भरा दृश्य दिखाई देता है। बच्चों के बैठने के लिए लकड़ी के बेंच तथा शिक्षकों के बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की गई है।

प्रत्येक कमरे में बड़े-बड़े ब्लैक बोर्ड लगाए गए हैं, जिन पर मेरे शिक्षक लिखकर हमें विभिन्न विषयों के बारे में पढ़ाते हैं।
बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कंप्यूटर लैब की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें सभी बच्चों को सप्ताह में 3 दिन यहां ले जाया जाता है। इसके अलावा मेरे विद्यालय में स्मार्ट बोर्ड की व्यवस्था भी है, जिसके माध्यम से शिक्षक हमें पाठ्यक्रम और अन्य आवश्यक जानकारी देते हैं।

मेरे विद्यालय का अनुशासन

मेरे विद्यालय के नियम बहुत सख़्त हैं, जिन्हें सभी बच्चों को आवश्यक रूप से पालन करना होता है। सभी कक्षाएं नियमित रूप से प्रातः काल निश्चित समय पर लगने शुरू हो जाती हैं। विलंब से आने वाले छात्रों को शिक्षक द्वारा दंडित किया जाता है। मेरे विद्यालय में सभी विद्यार्थियों के वेशभूषा और व्यवहार पर खास ध्यान दिया जाता है। इसके लिए हर रोज शिक्षक सभी बच्चों के नाखून, बाल और यूनिफॉर्म नियमित रूप से देखते हैं। यदि कोई विद्यार्थी विद्यालय के अनुशासन का पालन ना करें तो उसे प्रधानाचार्य द्वारा कड़ी सजा दी जाती है। विद्यालय की सुरक्षा के लिए मुख्य द्वार पर एक चौकीदार बैठता है जिसका मुख्य कार्य स्कूल की सुरक्षा करना है।

मेरे विद्यालय के शिक्षक

मेरे विद्यालय में पढ़ाने वाले प्रत्येक शिक्षक बहुत परिश्रमी और विद्वान हैं, जो हर समय बच्चों के हित का ध्यान रखते हैं। शिक्षको के परिश्रम के कारण मेरे विद्यालय के विद्यार्थियों का परिणाम बहुत अच्छा आता है।
विभिन्न विषयों को अलग-अलग शिक्षकों द्वारा हमें पढ़ाया जाता है। सभी शिक्षक पूरी लगन और श्रद्धा से बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने का प्रयास करते हैं।

वे हमें लिखित तथा मौखिक रूप से अभ्यास करवाते हैं और घर के लिए अभ्यास कार्य भी देते हैं। मेरे शिक्षक सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से ध्यान देते हैं और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।

मेरे विद्यालय का वार्षिकोत्सव

मेरे विद्यालय में प्रत्येक वर्ष वार्षिक उत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थी बड़ी प्रसन्नता से भाग लेते हैं।

वार्षिक महोत्सव के प्रारंभ में प्रधानाचार्य विद्यालय को संबोधित करते हैं जिसके बाद कार्यक्रम प्रारंभ होता है। मेरे विद्यालय में प्रत्येक वर्ष वार्षिकोत्सव के दिन छुट्टी होती है जिसके अंतर्गत विद्यार्थी द्वारा कला प्रदर्शनी और खेलकूद की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा नाटक, नृत्य, संगीत आदि कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।
प्रतियोगिताओं में जीतने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के इनाम दिए जाते और उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मानित भी किया जाता है।

निष्कर्ष

विद्यालय में जब हमारा दाखिला होता है, तो उस वक़्त हम नन्हें पौधे रहते हैं। हमारा विद्यालय ही हमे सींच कर बड़ा वृक्ष बनाता है। और इस दुनिया में रहने योग्य बनाता है। अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घड़ियां हम अपने विद्यालय में ही बिताते है। बड़े होने पर हम सबसे अधिक विद्यालय में बिताये लम्हों को ही याद करते हैं।

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My School Essay In Hindi 10 Lines

विद्याभ्यास स्तपो ज्ञानमिन्द्रियाणां च संयमः।
अहिंसा गुरुसेवा च निःश्रेयसकरं परम्॥

भावार्थ– विद्याभ्यास, तप, ज्ञान, इंद्रिय संयम, अहिंसा और गुरुसेवा- ये परम् कल्याणकारक हैं।

स्कूल का हर व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। आदर्श छात्र हर स्कूल से बनते हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करने में स्कूल एक महत्वपूर्ण कारक है।

प्रस्तावना

मेरा विद्यालय मुझे बहुत पसंद है। हमारा विद्यालय हमारे भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी उपयोगिता कोई नज़रअंदाज नहीं कर सकता। विद्यालय ही हैए जो हमें सामान्य से विशेष बनाता है। हमारी छिपी प्रतिभा को खोज निकालता है। हमारा स्वयं से साक्षात्कार कराता है।

मेरे विद्यालय का नाम जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय है। मेरा स्कूल 8 कक्षा तक है। स्कूल की दीवार जानवरोंए पक्षियों और फूलों के सुंदर चित्र चित्रित किए गए हैं। इसलिए स्कूल बेहद सुंदर दिखता है।

मेरे विद्यालय का वातावरण

हमारा स्कूल भवन बहुत छोटा है। लेकिन यह हमारे लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हमारे स्कूल में12क्लासरूम और एक हेडमास्टर का कमरा है। हमारे विद्यालय में एक कंप्यूटर कक्ष भी है। लेकिन हमारे स्कूल में शहर के स्कूल जैसा बड़ा हॉल नहीं है। लेकिन हम इससे कभी नहीं चूके। क्योंकि हमारे स्कूल के सामने एक बड़ा मैदान है। इसलिएए स्कूल में सभी कार्यक्रम एक ही जमीन पर आयोजित किए जाते हैं।

मेरे विद्यालय की कार्य प्रणाली

हमारे विद्यालय में प्रतिदिन ईश्वर की वन्दना फिर उसके बाद राष्ट्रीय गान गाया जाता हैए जिसमें विद्यालय के सभी जन उपस्थित होते हैं । प्रार्थना सभा में ही हमारी उपस्थिति की गणना की जाती है । प्रत्येक शनिवार को प्रार्थना सभा में बाल सभा का आयोजन किया जाता है जिसकी अवधि केवल एक घण्टा होती है।

हमारे स्कूल में छात्रों की कलात्मक प्रतिभा को विकसित करने के लिए हर साल कई समारोहों का आयोजन किया जाता है। इसमें सभी छात्र बड़े उत्साह के साथ भाग लेते हैं।विजेता प्रतियोगियों को पुरस्कार मिलते हैं द्यइन प्रतियोगिताओं मेंए छात्रों की कलात्मक प्रतिभा न केवल विकसित होती हैए बल्कि एक साहसिक रवैया भी विकसित करती है।

हमारा स्कूल हर साल फरवरी के महीने में एक स्कूल ट्रिप भी आयोजित करता है। हमारी स्कूल ट्रिप हर साल कई पर्यटन स्थलों को देखने जाती है। मैं हमेशा स्कूल ट्रिप में हिस्सा लेता हूं। हमारा स्कूल सुबह दस बजे शुरू होता है और शाम चार बजे समाप्त होता है। हमारे स्कूल में दोपहर के एक बजे दोपहर के भोजन का अवकाश होता है। इसमें हम सभी छात्र एक साथ भोजन करते हैं।

हमारा कर्त्तव्य

हमारा विद्यालय हमारा विद्या मन्दिर है। जिस प्रकार भक्त लोगों के लिए मन्दिर व पूजा.स्थल पवित्र स्थान हैए उसी प्रकार एक विद्याथीं के लिए उसका विद्यालय एक पावन स्थल है । इस पावन मन्दिर के भगवान् हैं. हमारे गुरुजन जो हमारे अज्ञान के अन्धकार को दूर कर हमारे दिलों में ज्ञान का प्रकाश फैला देते है। इसलिए हमे अपने गुरुजनों का हार्दिक सम्मान करना चाहिए।

निष्कर्ष

विद्यालय एक सार्वजनिक सम्पत्ति है । यह हमारी राष्ट्रीय निधि हैए इसलिए विद्यार्थी इसकी सुरक्षा के प्रति सदैव जागरूक रहेए। विद्यालय केवल पुस्तकीय ज्ञान का माध्यम नहीं हैए अपितु ज्ञान प्राप्ति के लिए हर प्रकार के अवसर वहाँ पर उपलब्ध होते हैं। विद्यालय बालकों को खेल-कूद, सास्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर देता है ।हमारे विद्यालय के सभी शिक्षक छात्रों के समग्र विकास के लिए प्रयास करते हैं। इसलिए हमारे स्कूल से बाहर निकलने वाले प्रत्येक छात्र को एक आदर्श छात्र के रूप में प्रतिष्ठा मिलती है। मुझे अपने स्कूल से बहुत प्यार है। मेरा विद्यालय मेरे लिए आराध्य है।


Mera Vidyalaya Nibandh – मेरा विद्यालय निबंध


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आज विद्यालय को ऐसी सामाजिक संस्था के रूप में माना जाता है, जहां बालक अपनी योग्यताओं, क्षमताओं, रुचियों और रुझानों के अनुसार अपना विकास करते है। समाज के आदर्शों, मूल्यों, विचारों, परम्पराओं, आशाओं, अभिलाषाओं और आकांक्षाओं को जीवित रखने के लिये विद्यालयों को शिक्षा का केन्द्र माना जाता है।

विद्यालय की परिभाषा

हुमायूँ कबीर के अनुसार- विद्यालय सामुदायिक जीवन की अभिव्यक्ति है।

रॉस के अनुसार- विद्यालय वे संस्थाएँ हैं, जिनकी स्थापना सभ्य व्यक्ति द्वारा समाज में व्यवस्थित और सक्षम सहायता के लिए बच्चों को तैयार करने में मदद करने के उद्देश्य से की जाती है। वर्तमान समय में विद्यालय की छवि एक इमारत से एक सामाजिक संस्था में बदल गई है, जहाँ छात्र विभिन्न क्षेत्रों की जाति, धर्म, संस्कृति और जीवन शैली से परिचित होकर अपनी रुचिए योग्यता और कौशल विकसित करते हैं।

विद्यालय की आवश्यकता एवं महत्व

समाज में विद्यालय के स्थान, महत्व एवं आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए ‘एस बालकृष्ण जोशी ने लिखा है, ष्किसी भी राष्ट्र की प्रगति विधायिकाओं, अदालतों और कारखानों में नहीं, बल्कि स्कूलों में तय होती है।

विद्यालयों को यह महत्वपूर्ण स्थान निम्नलिखित कारणों से दिया गया है

अभिभावकों की व्यवस्ताओं के चलते विद्यालय विद्यार्थियों का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व निभा रहे है।
विद्यालय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं हस्तांतरण में सहायक है।
विद्यालय परिवार और वाह्य जीवन को जोड़ने वाली कड़ी है।
विद्यालय को विद्यार्थियों के बहुमुखी प्रतिभा विकास का महत्वपूर्ण साधन समझा जाता है।
राज्य के आदर्शों और विचारधाराओं को फैलाने के लिए विद्यालय को अति महत्वपूर्ण साधन माना गया है।

इसलिए हम कह सकते हैं कि ष्किसी राष्ट्र के स्कूल उसके जीवन का एक हिस्सा हैं, जिसका विशेष कार्य उसकी आध्यात्मिक शक्ति को मजबूत करना, उसकी ऐतिहासिक निरंतरता को बनाए रखना, उसकी पिछली सफलताओं को संरक्षित करना और उसके भविष्य को सुनिश्चित करना है।

मेरा विद्यालय का परिचय

जिस नगर एवं क्षेत्र में हम रहते हैं ए यहां पर कई विद्यालय मौजूद हैं। मैं ऋषि कुल एकेडमी का छात्र हूं। मेरा विद्यालय 12वीं तक है। मैं जिस क्षेत्र में रहता हूं, विद्यालय से घर का रास्ता पक्की सड़क से होकर गुजरता है। मेरा विद्यालय तीन मंजिला है। मेरे विद्यालय के अंदर बहुत से ऐसे बगीचे हैं, जहां पर हम लंच करने के बाद आराम से बैठकर कुछ समय पढ़ाई भी कर सकते हैं। हमारे इस विद्यालय में सभी प्रकार की सुविधाएं हैं, जो एक छात्र एवं छात्राओं के लिए जरूरी होती हैं।

हमारे विद्यालय में कुल 15 कमरे एवं दो हॉल मौजूद हैं, हमारे स्कूल में बहुत से पेड़ हैं, जिनकी छाया में बच्चे लंच के समय बैठकर वार्तालाप करते हैं। इन पेड़ों को एक पंक्ति में लगाया गया है। छोटे बच्चों के खेलने के लिए झूलों का भी प्रबंध किया गया है। हमारे स्कूल सभी विद्यार्थियों के पढने के लिए एक पुस्तकालय का भी निर्माण किया गया जिसमें विद्यार्थी निश्चिंत होकर अध्धयन कर सकते हैं।

हमारे स्कूल में एक बहुत बड़ा स्थान है, जहाँ पर कार्यक्रम के समय पर एक सुंदर मंच को सजाया जाता है। हमारे विद्यालय में एक हरा भरा मैदान भी है, जहां पर सभी विद्यार्थी खेलते हैं एवं व्यायाम आदि करते हैं। हमारे विद्यालय में कुल 1000 विद्यार्थी पढ़ते हैं , जिनको शिक्षा प्रदान करने के लिए कुल 35 अध्यापक एवं अध्यापिका ने मौजूद है।

इसके अतिरिक्त हमारे विद्यालय में एक प्रधानाचार्य एवं दो चपरासी मौजूद हैं। हमारे विद्यालय में मौजूद सभी अध्यापक एवं अध्यापिकाएं हमारे सभी विद्यार्थी भाइयों को हर सहयोग से मार्गदर्शन प्रधान करते रहते हैं।

मेरा विद्यालय के अध्यापक

हमारे विद्यालय के अध्यापक बहुत ही परिश्रमी विद्वान् और छात्रों के हित का ध्यान रखने वाले अध्यापक हैं। हमारे स्कूल के अध्यापक बहुत ही परिश्रम और लगन से पढ़ाते हैं। वे हमें लिखित कार्य का भी अभ्यास कराते हैं। हमारे विद्यालय के अध्यापक हमें सिलेबस के अनुसार पढ़ाते हैं। सभी अध्यापक हमारे लिखित कार्य को बहुत ही सावधानीपूर्वक देखते हैं और हमारी अशुद्धियों की ओर हमारा ध्यान दिलाते हैं। इससे हमें शुद्ध भाषा सीखने और उसका शुद्ध प्रयोग करने में सहायता मिलती है।

हमारे स्कूल के अध्यापक बहुत ही दयालु हैं जो हमें अनुशासन का अनुसरण करना सिखाते हैं। हमारे शिक्षक हमेशा हमें खेल क्रियाओं, प्रश्न उत्तर प्रतियोगिताए मौखिक-लिखित परीक्षाए वाद-विवाद, समूह चर्चा, स्कॉउटेड आदि दूसरी क्रियाओं में भाग लेने के लिए भी प्रेरित करते हैं। हमारे स्कूल के अध्यापक हमें स्कूल में अनुशासन को बनाए रखने और स्कूल परिसर को साफ और स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं।

हमारे विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बहुत कठोर एवं सभी विद्यार्थियों के लिए सामान्य अनुशासन बनाया है। विद्यालय के सभी अनुशासन का पालन करना हमारे विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है। यही कारण है, कि हमारे विद्यालय का परीक्षा परिणाम बहुत ही अच्छा रहता है।

निष्कर्ष

सभी प्रकार के विद्यालय एक सार्वजनिक संपत्ति होती है। यह हमारे देश की राष्ट्रीय निधि भी है। इसलिए हमें अपने विद्यालय की रक्षा करनी चाहिए एवं इसके प्रति हमें सदैव जागरूक रहना चाहिए। विद्यालय में केवल पुस्तक की अध्ययन नहीं किया जाता इसमें हर एक प्रकार के ज्ञान को विद्यार्थियों के साथ साझा किया जाता है। विद्यालय के जरिए ही विद्यार्थी खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। हम सभी विद्यार्थियों को ज्ञान के इस घर को सदैव स्वस्थ एवं सम्मानजनक रूप से रखना चाहिए। इतना ही नहीं विद्यार्थियों को इस घर का सही प्रयोग करके अपने भविष्य को बनाना चाहिए।

(Source : Suvichar Kosh)

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