महात्मा गाँधी पर निबन्ध ! Mahatma Gandhi Essay In Hindi (2022)

दोस्तो, हिन्दी व्याकरण में आज हम आपके लिए लाए है mahatma gandhi essay in hindi जो की बहुत ही सरल भाषा में लिखे हैं। महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ। भारत को स्वतंत्रता दिलवाने में उन्होंने एहम भूमिका निभायी थी। आज हम उन्ही के जीवन पर आधारित कुछ बेहतरीन निबंध ले कर आए है। आप हमारे इन निबंधो को स्कूल या कॉलेज में निबंध प्रतियोगिता में लिख सकतें है। और सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं।

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Mahatma Gandhi Essay In hindi – महात्मा गाँधी पर निबन्ध


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प्रस्तावना

महात्मा गांधी (मोहनदास करमचंद गाँधी) का नाम हमारे देश में कौन नहीं जानता उन्हें हम राष्ट्रपिता और बापु के नाम से भी जानते हैं। महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता थे। महात्मा गांधी जी सत्य अहिंसा के पुजारी थे इसलिए इनको महात्मा गांधी के नाम से जानते हैं।

गांधीजी का पूरा नाम और जन्म

महात्मा गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 में पोरबंदर काठियावाड़ नाम के स्थान पर हुआ था, जो कि गुजरात में है।

महात्मा गांधी जी का परिवार

महात्मा गांधी जी के पिता का नाम करमचंद गांधी था। यह राजकोट के दीवान थे माता का नाम पुतलीबाई था, जो कि धार्मिक विचारों वाले थीं।महात्मा गांधी अपने परिवार में सबसे छोटे थे, उन्से एक बड़ी बहन और दो बड़े भाई थे। रलियत (बहन) (लक्ष्मीदास नंद, कुंवरबेन) भाई कृष्णदास (गंगा) भाई इनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था। महात्मा गांधी जी के बेटे का नाम हरिलाल गांधी, मणिलाल गांधी, रामदास गांधी, देवदास गांधी था।

महात्मा गांधी जी की शिक्षा:

महात्मा गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में हुई थी। 1881 में उन्होंने हाई स्कूल में प्रवेश लिया, 1887 में गांधी जी ने मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त की, भाव सागर के रामलदास कॉलेज में उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई की परंतु परिवार वालों के कहने पर उन्हें अपनी शेष पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैंड जाना पड़ा उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई इंग्लैंड पूरी की। उनका मानना था कि मेरे भारत देश में एक भी व्यक्ति अशिक्षित ना रहे,वो शिक्षा को बहुत महत्व देते थे।

महात्मा गांधी जी के आंदोलन

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम : 1916-1945
चंपारण और खेड़ा सत्याग्रह : 1998-1919
खिलाफत आंदोलन :1919-1924
असहयोग आंदोलन : 1920
अवज्ञा आंदोलन एनमक सत्याग्रह एदांडी यात्रा एहरिजन आंदोलन : 1930
भारत छोड़ो आंदोलन ए दित्तीय विशव युद्ध एदेश का विभाजन और भारत की आजादी : 1942

गांधी जी की कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • गांधी जी ने दक्षिण प्रवास के दौरान 1899 में, एंग्लो बोयर युद्ध में स्वास्थ्य कर्मि का काम किया था।
  • जीस ब्रिटिश सरकार से महात्मा गांधी ने लड़ाई लड़ी उन्ही ने उनके सम्मान में उनके निधन के 21 साल बाद उनके नाम का डाक टिकट जारी किया था।
  • गांधी जी के आंदोलन कुल 4 महाद्वीप और 12 देशों तक पहुंचा था।
  • भारत में 53 सड़कें महात्मा गांधी जी के नाम से है जबकि 48 लड़के विदेशों में हैं।
  • महात्मा गांधी जी ने अफ्रीका के डरबन में 3 फुटबॉल क्लब स्थापित कि।
  • महात्मा गांधी जी को शांति नोबेल पुरस्कार अभी तक नहीं मिला जबकि पांच बार वह इसके लिए नॉमिनेट हो चुके हैं।

निष्कर्ष

महात्मा गाँधी जी के कार्यों का उल्लेख अगर करने लगे तो शब्दों की कमी पड़ जाएगी। महात्मा गाँधी जी के तीन महत्वपूर्ण सिद्धांत थे – ना बोल बुरा, ना देख बुरा, ना सुन बुरा, महात्मा गाँधी के इन सिद्धांतों को नजरअंदाज़ करके 30 जनवरी 1948 को एक व्यक्ति ने उनकी हत्या कर दी। इस महात्मा ने देश के लिए अपनी जान देदी और हमें इनके कार्यो को ना भूलते हु, इस आजादी का सही उपयोग करना चाहि, क्युकी ऐसे महान व्यक्ति सदियों में एक ही धरती पर अवतरित होते है बार-बार नहीं।

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प्रस्तावना

हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के बारे में कौन नहीं जानता, उनकी छाप सिर्फ हमारे नोटों पर ही नहीं बल्कि हम सभी के दिलों में भी है। महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के प्रवर्तक थे। सारे भारतीय उन्हें बापू और राष्ट्रपिता कहकर पुकारते हैं।

उन्होंने मानवता की सेवा का संदेश दिया और कहा खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है, खुद को दूसरों की सेवा में खो दो। आज हम आपको उनके पूरे जीवन, उनके विचार और उनके आंदोलनों के बारे में बताएंगे। महात्मा गांधी जी स्वतंत्रता के योद्धा थे और उनके अथक प्रयासों, संघर्ष और बलिदान की वजह से ही आज हम स्वतंत्र भारत में जी रहे हैं।

महात्मा गांधी एक महान राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक भी थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अपने अच्छे कामों और अपने आदर्श विचारों के कारण हमेशा याद किये जाते है और वे हमारे दिलों में राज करते हैं।

महात्मा गांधी जी का जीवन परिचय

महात्मा गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर शहर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। वे साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे, उनके पिताजी का नाम करमचंद गांधी था और वे अंग्रेजो के लिए दीवान का कार्य करते थे। महात्मा गांधी जी के माता का नाम पुतलीबाई था। और वे भले स्वभाव की एक धार्मिक महिला थीं।

गांधी जी जब 13 वर्ष के थे तभी उनका विवाह करवा दिया गया था। उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी था, जिन्हें सभी प्यार से ‘बा’ कहकर पुकारते थे। महात्मा गांधी की प्रारंभिक पढ़ाई गुजरात में ही हुई थी और बाद में उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया। गांधी जी ने सन् 1891 में वकालत पास की और वे फिर से भारत वापस आ गए।

इसके बाद उन्होंने मुंबई में रहकर वकालत का काम शुरू कर दिया। उनके जीवन में समय के साथ कई बदलाव आए जिनसे वे प्रभावित हु और उन्होंने अपना जीवन मानव सेवा में समर्पित कर दिया।

गांधी जी के जीवन में परिवर्तन की शुरुआत

गांधी जी के जीवन में कई ऐसी घटनाएं घटी जिनकी वजह से उन्होंने अहिंसा को अपनाया, लेकिन उनके जीवन और विचारों में सबसे पहले परिवर्तन लाने वाली घटना इस प्रकार है। जब वे वकालत की पढ़ाई कर रहे थे तो उस समय उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा था। वहां पर वे रंगभेद के शिकार हु और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ। वहां पर भारतीय और दूसरे काले रंग के लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था।

उन्हें ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में बैठने पर ट्रेन से धक्का मारकर बाहर निकाल दिया गया, जबकि उनके पास प्रथम श्रेणी की टिकट थी। इसके अलावा वहां के कुछ होटलों में भी उन्हें नहीं जाने दिया गया।

इसके पश्चात गांधी जी ने रंगभेद को खत्म करने के लिए बहुत संघर्ष किया और राजनीति में जाने का निर्णय लियाए जिससे वे भारतवासियों के साथ होने वाले अन्याय को खत्म कर पाएं।

महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए प्रमुख आंदोलन

गांधी जी ने अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए अंग्रेज़ो के खिलाफ कई आंदोलन किए, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को कमज़ोर बना दिया। उन्होंने भारतीयों को स्वतंत्रता दिलाने के लिए भी कई आंदोलन किए।

चंपारण आंदोलन

सन् 1917 में उन्होंने चंपारण गांव में आंदोलन शुरू कर दिया। जिसके परिणास्वरूप अंग्रेजों को गांधी जी के आगे घुटने टेकने पड़े। यह आंदोलन चंपारण आंदोलन के नाम से विख्यात हुआ और इसकी कामयाबी से उनमें आत्मविश्वास दृढ़ हुआ।

खेड़ा आंदोलन

गुजरात के खेड़ा नाम के गांव में सन् 1918 में अत्यधिक बाढ़ आई। जिसके वजह से गांव के किसानों की फसल तबाह हो गई और साथ ही उस गांव में अकाल भी पड़ा। इसे आंदोलन को खेड़ा आंदोलन के नाम से जाना जाता है, इस आंदोलन के फल स्वरूप बाद में अंग्रेज़ो ने उनका कर माफ़ कर दिया।

असहयोग आंदोलन

अंग्रेज भारतीयों के साथ बहुत क्रूर और निर्दयतापूर्ण व्यवहार करते थे। उनके अत्याचार दिन ब दिन बढ़ते ही जा रहे थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड में कई बेकसूर मारे गए, जिससे गांधी जी को बहुत दुख हुआ और उन्होंने ठान लिया कि अब अंग्रेजो को भारत से बाहर निकालना ही होगा।

इसके बाद उन्होंने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की और सभी भारतीयों से कहा कि अब उन्हें भारत में स्वदेशी वस्तुओं को अपनाया गया और विदेशी वस्तुओं का उपयोग बन्द कर दिया गया।

इस आंदोलन के दौरान लोगों ने विदेशी कपड़ों की होली जलाई और खादी कपड़ों का उपयोग करना चालू कर दिया। ये आंदोलन करने के कारण अंग्रेजो ने उन्हें 6 वर्ष तक कारावास की सजा दी थी।

डांडी यात्राध्नमक आंदोलन

गांधी जी ने ये आंदोलन अंग्रेजो के नमक पर कर बढ़ाने के कानून के खिलाफ चलाया था। साधारण व्यक्ति इस कानून से बहुत दुखित थे इसलिए 12 मार्च 1930 को गांधी जी ने अहमदाबाद शहर के साबरमती आश्रम में से ये आंदोलन शुरू किया।
ये आंदोलन विदेशो में भी प्रसिद्ध हुआ, इसे दांडी यात्रा भी कहा जाता है।

भारत छोड़ो आंदोलन

भारत को अंग्रेजो की गुलामी से मुक्त करवाने के लिए महात्मा गांधी जी ने इस आंदोलन की शुरुआत की। जब दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था तब अंग्रेजी सरकार अन्य देशों के साथ युद्ध करने में व्यस्त थी।इस आंदोलन को सभी भारतवासियों ने एकजुट होकर सफल बनाया। इसके फलस्वरूप सन् 1947 में भारत गुलामी की जंजीरों से आजाद हुआ।

गांधी जी के कुछ जीवन सिद्धांत

गांधी जी हमेशा सत्य और अहिंसा का पालन करते थे और उनका जीवन सादगी वाला था। वे शुद्ध शाकाहारी थे। महात्मा गांधी जी स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग पर बल देते थे और खादी के वस्त्र पहनते थे। गांधी जी ने तीन बातें कहीं जो प्रसिद्ध हैं – बुरा मत बोलो, बुरा मत सुनो और बुरा मत देखो।

निष्कर्ष

गांधी जी ने सदा ही मानवता की सहायता की और अहिंसा का मार्ग अपनाया। उन्होंने जातिवाद से प्रताड़ित लोगों को हरिजन कहा और उन्हें अपना हक दिलवाया। वे महात्मा बुद्ध के जीवन और विचारों से प्रभावित हु, और उन्हीं की तरह सभी की सेवा की। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे नाम के व्यक्ति ने गांधी जी को गोली मारकर हत्या कर दी।
उनके विचार और उनका जीवन संघर्ष हम सब के लिए आदर्श है। आज की युवा पीढ़ी को उनके मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

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Mahatma Gandhi Information In Hindi

प्रस्तावना

महात्मा गांधी जी ने अपना पूरा जीवन भारत के स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करके बिताया था महात्मा गांधी जी को भारत में बापू या राष्ट्रपिता के नाम से जाना जाता है, इनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। गांधी जी के पिता राजकोट में दीवान थे, उनके पिता एक छोटे से गांव में रहा करते थे। इनका जन्म 2 अक्टूबर 1969 में पोरबंदर गुजरात भारत में हुआ था।

इसीलिए आज भी 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जी के जन्मदिन को एक त्योहार के रूप में पूरे भारत में मनाया जाता है, उन्होंने लोगों से कहा कि विदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करना बंद कर दें और स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करें। गांधी जी ऐसे महान पुरुष थे जो अहिंसा और सामाजिक एकता पर विश्वास रखते थे।

गांधी जी बहुत ही शांत स्वभाव के थे। 13 वर्ष की आयु में गांधी जी का विवाह कस्तूरबा से हुआ था। कस्तूरबा ने गांधी जी का हर तरह से सहयोग किया। और कस्तूरबा ने अपने पत्नी धर्म का पालन किया।

महात्मा गाँधी का जीवन परिचय

गांधी जी भारत में चल रहे अछूत और भेदभाव की परंपरा को खत्म करना चाहते थे, ताकि सभी लोग मिलजुल कर रहे और भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराना चाहते थे। गांधीजी की पढ़ाई भारत में हुई थी और उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैंड चले गए और फिर उसके बाद वकील के रूप में भारत लौटे थे।

कानून की पढ़ाई करके जब गांधी जी भारत आए तो उन्होंने भारत पर अपना कानूनी अभ्यास करना शुरू कर दिया ताकि भारत में भारत के ही लोगों से हो रहे अन्याय को खत्म किया जा सके और इस अन्याय को खत्म करने के लिए ब्रिटिश शासन को खत्म करना बहुत ही ज्यादा जरूरी था।

महात्मा गाँधी का राजनीतिक जीवन

उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए बहुत ही ज्यादा संघर्ष किया था। उन्होंने 1930 में नमक सत्याग्रह के लिए नेतृत्व किया। गांधी जी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए बहुत से लोगों को प्रेरित किया।

एक महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में गांधीजी को कई बार जेल भी हुआ लेकिन गांधी जी ने और भारत के और सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और यह लड़ाई बहुत समय तक चली जिसमें कई सारे भारतीय वीर वीरगति को प्राप्त हुए।
लेकिन उन सभी भारतीय वीरों के बलिदान सफल हुए, सभी वीरों और गांधीजी के कड़ी संघर्ष से 15 अगस्त 1947 को हमारा भारत देश आजाद हुआ।

भारत स्वतंत्र होने के बाद 30 जनवरी 1948 को गांधी जी का निधन हो गया गांधी जी का हत्या नाथूराम ने की थी। महात्मा गांधी जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिसके लिए आज भी उन्हें बहुत ही याद किया जाता है, इसलिए उनके याद में आज भी 2 अक्टूबर को उनका जन्म दिवस मनाया जाता है।

निष्कर्ष

गांधी जी ने अपने जीवन मे बहुत से बलिदान हमारे देश के लिए किए। गांधी जी के स्वभाव से आज पूरा भारत प्रशन्न है और भी हमारी सरकार शांति पर यकीन करती है और गांधी जी के मार्ग पर चलती है।


Essay On Mahatma Gandhi In Hindi – महात्मा गाँधी पर निबन्ध हिंदी में


10 lines about mahatma gandhi
Essay On Gandhiji In Hindi

प्रस्तावना

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर जिले में हुआ था। महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहन दास करमचंद गांधी है। महात्मा गांधी का जन्म एक बहुत ही सामान्य परिवार में हुआ था। महात्मा गांधी अपने पिता के चौथी पत्नी के पुत्र थे। महात्मा गांधी के पिता जी का नाम करमचंद गांधी है और उनकी माता जी का नाम श्रीमती पुतलीबाई है।

महात्मा गांधी की माता जी बहुत ही धार्मिक विचारधारा की थी। उन्होंने महात्मा गांधी को धर्म के रास्ते पर चलने का आदेश दिया था। महात्मा गांधी बचपन से ही बहुत ही आदर्शवादी और दयालु थे। उन्होंने अपने जीवन में श्रवण के माता-पिता की भक्ति के विचार को बहुत ही अच्छे से उतार लिया था। वह अपने माता जी का बहुत ही ख्याल रखते थे और अपने पिताजी का हर काम में मदद करते थे। गांधी जी की शादी बहुत ही कम उम्र में हुई थी। उनकी शादी 13 वर्ष कस्तूरबा गांधी के साथ करवाई गई थी।

महात्मा गांधी की शिक्षा

महात्मा गांधी ने 1887 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और आगे की पढ़ाई के लिए गुजरात के भावनगर में स्थित श्याम लाल दास कॉलेज में दाखिला लिया, उनके घर वालों को उनके भविष्य की चिंता होने लगी। गांधीजी एक डॉक्टर बनना चाहते थे पर उनके पिताजी चाहते थे कि गांधी जी गुजरात के किसी बड़े राजघराने में एक अच्छे पद पर नौकरी करें और उस पद पर नौकरी करने के लिए उन्हें बैरिस्टर की डिग्री लेनी जरूरी थी। तब उन्होंने बैरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड में दाखिला लिया और वह इंग्लैंड चले गए।

महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में

दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी 21 साल तक रहे हैं, वहां उन्होंने राजनीति को समझा मानव अधिकार के नियमों को समझाण् गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में रंग के आधार पर भेदभाव को महसूस किया दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ बहुत ही अधिक भेदभाव किया जा रहा था। एक बार गांधीजी ट्रेन में सफर कर रहे थे उनकी टिकट एसी फर्स्ट क्लास की थी।

पर उन्हें वहां बैठने नहीं दिया गया, यह कहकर कि यहां पर सिर्फ अंग्रेज लोग बैठ सकते हैं। जब महात्मा गांधी ने इस बात का विरोध किया, तो उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया। इस घटना के बाद गांधी जी ने मानव अधिकार और रंग के भेदभाव को दूर करने के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक आंदोलन शुरू कर दिया। यह आंदोलन 7 वर्षों तक चला।

महात्मा गांधी जी द्वारा किए गए आंदोलन

भारत आते ही उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा वादी आंदोलन शुरू कर दिया। महात्मा गांधी जी ने ऐसे कई आंदोलन किए, जिसमें उन्होंने हमारे किसान और हमारे देशवासियों के लिए अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाई। गांधीजी को इन आंदोलन के वजह से कई बार जेल में भी रहना पड़ा, पर फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हमारे देश और हमारे देशवासियों के लिए हमेशा लड़ते रहे।

असहयोग आंदोलन

13 अप्रैल 1919 में जनरल डायर ने पंजाब के जलियांवाला बाग में बैशाखी पर्व में निर्दोष लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया। इस हत्याकांड में सैकड़ों लोगों की जान चली गई। महात्मा गांधी ने इस निर्मम हत्या कांड के खिलाफ एक असहयोग आंदोलन शुरू किया।

चोरी चोरा आंदोलन की वजह से गांधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया, क्योंकि चोरी चोरा में किसानों ने अंग्रेजी पुलिस थानों में जाकर आगजनी की जिसमें बहुत से पुलिसवाले मारे गए। गांधी जी ने उसी वक्त इस आंदोलन को वापस ले लिया, उन्होंने कहा मैंने यह आंदोलन अहिंसा के रास्ते पर शुरू किया था। इसीलिए उन्होंने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया था।

नमक सत्याग्रह

गांधी जी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिन के पैदल यात्रा शुरू की जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार का नमक पर जो एकाधिकार का कानून लाया गया था। उसके खिलाफ आवाज उठाई उन्होंने कहा नमक हमारे लिए आधारभूत खाद्य सामग्री है और इसमें सभी मनुष्यों का एक समान अधिकार है।

दलित आंदोलन

हमारे देश में उस वक्त दलितों के साथ बहुत भेदभाव किया जा रहा था। जैसे कि उन्हें सार्वजनिक जगहों पर आने जाने की अनुमति नहीं थी। उनके साथ लोगों छुआछूत जैसी जघन्य भेदभाव करते थे। इस भेदभाव का पुरजोर विरोध किया और हमारे लोगों को समझाया कि हमें अभी एकता की जरूरत है अगर हम अपने लोगों के साथ एक नहीं रहेंगे, तो हमें आजादी कभी नहीं मिलेगी।

चंपारण सत्याग्रह

बिहार के चंपारण जिले में अंग्रेजों ने गरीब किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा किया और उनसे जबरन नील की खेती करवाई। गई नील की खेती का उन्हें बहुत कम मूल्य दिया जाता था और उन पर बहुत ज्यादा कर्ज भी थोप दिया गया था। इस वजह से वहां के किसान बहुत ही परेशान थे।

भारत छोड़ो आंदोलन

गांधी जी ने 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की यह आंदोलन उन्होंने कांग्रेस का मुंबई अधिवेशन की बैठक से शुरू की। इसी आंदोलन के तहत 15 अगस्त 1947 को हमारे देश को आजादी मिली। अंग्रेजों ने गांधी जी के दृढ़ संकल्प और निर्णय के सामने घुटने टेक दिए और हमारे देश को छोड़ कर चले गए।

गांधी जी की मृत्यु

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की हत्या कर दी। इस दिन हमारे देश के सबसे वीर पुत्र और हमारे देश के राष्ट्रपिता हमें छोड़ कर चले गए।

निष्कर्ष

गांधी जी के जीवन से हमें बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा मिलती है, कि हमें अपने परेशानियों से डरना नहीं चाहिए, हमें उस परेशानियों के खिलाफ लड़ना चाहिए और अपने आप को मजबूत रखना चाहिए। हमें कभी जिंदगी में झूठ नहीं बोलना चाहिए, अगर हमने गलती की है, तो हमें गलती को स्वीकार करना चाहिए।


Gandhi Ji Per Nibandh – गाँधी जी पर निबंध


10 points on mahatma gandhi in hindi
Few Lines About Mahatma Gandhi

प्रस्तावना

महात्मा गांधी एक स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, समाज सुधारक और महान व्यक्तित्व के व्यक्ति थे। इसीलिए भारत में उन्हें राष्ट्रपिता और बापू के नाम से पुकारा जाता है। भारत का प्रत्येक व्यक्ति महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित है। उनके विचारों और उनके द्वारा किए गए भारत के लिए आंदोलन को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

उन्होंने अपना पूरा जीवन भारत के लोगों को समर्पित कर दिया था इसी समर्पण की भावना के कारण उन्होंने भारत के लोगों के हितों के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कई आंदोलन आंदोलन किए थे।

गांधी जी के जीवन से हमें बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षा मिलती है, कि हमें अपने परेशानियों से डरना नहीं चाहिए, हमें उस परेशानियों के खिलाफ लड़ना चाहिए और अपने आप को मजबूत रखना चाहिए। हमें कभी जिंदगी में झूठ नहीं बोलना चाहिए, अगर हमने गलती की है, तो हमें गलती को स्वीकार करना चाहिए। जिनमें वे पूरी तरह से सफल रहे थे। उनका अंतिम आंदोलन भारत छोड़ो आंदोलन अंग्रेजी हुकूमत के ताबूत पर अंतिम कील साबित हुई।

प्रारंभिक जीवन

महात्मा गांधी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिताजी करमचंद गांधी अंग्रेजी हुकूमत के दीवान के रूप में काम करते थे। उनकी माताजी पुतलीबाई गृहणी थी। वह भक्ति भाव वाली महिला थी, जिनका पूरा दिन लोगों की भलाई करने में बीतता था।
महात्मा गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य की पोरबंदर शहर में हुआ था। महात्मा गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा गांधी की प्रारंभिक पढ़ाई गुजरात में ही हुई थी। उनका विवाह 13 साल की छोटी सी उम्र में ही कर दिया गया था उनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा था। जिन्हें प्यार से लोग ‘बा’ के नाम से पुकारते थे।

उनके बड़े भाई ने उनको पढ़ने के लिए इंग्लैंड भेज दिया था। 18 वर्ष की छोटी सी आयु में 4 सितंबर 1888 को गांधी यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन में कानून की पढाई करने और बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड चले गए। 1891 में महात्मा गांधीजी इंग्लैंड से बैरिस्टरी पास करके सुदेश आए और मुंबई में वकालत प्रारंभ कर दी।

अहिंसावादी जीवन का प्रारंभ

महात्मा गांधी के जीवन में एक अनोखी घटना घटने के कारण उन्होंने अहिंसा वादी जीवन जीने का प्रण ले लिया था। दक्षिण अफ्रीका में प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने 1899 के एंगलो बोअर युद्ध के समय स्वास्थ्य कर्मी के तौर पर मदद की थी। लेकिन इस युद्ध की विभीषिका को देख कर अहिंसा के रास्ते पर चलने का कदम उठाया था। इसी के बल पर उन्होंने कई आंदोलन अनशन के बल पर किये थे, जो कि अंत में सफल हुए थे।

उन्होंने ऐसे ही दक्षिण अफ्रीका के जोल विद्रोह के समय एक सैनिक की मदद की थी। जिसे लेकर वे 33 किलोमीटर तक पैदल चले थे और उस सैनिक की जान बचाई थी। जिसे प्रतीत होता है कि महात्मा गांधी के जीवन के प्रारंभ से ही रग-रग में मानवता और करुणा की भावना भरी हुई थी।

राजनीतिक जीवन का प्रारंभ

दक्षिण अफ्रीका में जब गांधी जी वकालत की पढ़ाई कर रहे थे, उसी दौरान उन्हें काले गोरे का भेदभाव झेलना पड़ा। वहां पर हमेशा भारतीय एवं काले लोगों को नीचा दिखाया जाता था। एक दिन की बात है, उनके पास ट्रेन की फर्स्ट एसी की टिकट थी। लेकिन उन्हें ट्रेन से धक्के मार कर बाहर निकाल दिया गया और उन्हें मजबूरी में तृतीय श्रेणी के डिब्बे में यात्रा करनी पड़ी।

यहां तक कि उनके लिए अफ्रीका के कई होटलों में उनका प्रवेश वर्जित कर दिया गया था। यह सब बातें गांधीजी के दिल को कचोट गई थी। इसलिए उन्होंने राजनीतिक कार्यकर्ता बनने का निर्णय लिया ताकि वे भारतीयों के साथ हो रहे भेदभाव को मिटा सके।

भारत में महात्मा गांधी का प्रथम आंदोलन

महात्मा गांधी जी का भारत में प्रथम आंदोलन अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ था, क्योंकि अंग्रेजों ने किसानों से खाद्य फसल की पैदावार कम करने और नील की खेती बढ़ाने को जोर दे रहे थे और एक तय कीमत पर अंग्रेजी किसानों से नील की फसल खरीदना चाहते थे।
इसके विरोध में महात्मा गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ वर्ष 1917 में चंपारण नाम के गांव में आंदोलन छेड़ दिया था। अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बाद भी गांधीजी मानने को तैयार नहीं थे। अंत में अंग्रेजों को गांधी जी की सभी बातें माननी पड़ी। बाद में इस आंदोलन को चंपारण आंदोलन के नाम से जाना गया।

खेड़ा सत्याग्रह

खेड़ा आंदोलन में महात्मा गांधी ने किसानों की स्थिति में सुधार लाने के लिए ही किया था। वर्ष 1918 में गुजरात के खेड़ा नाम के गांव में भयंकर बाढ़ आई थी, जिसके कारण किसानों की सारी फसलें बर्बाद हो गई थी और वहां पर भयंकर अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
इतना सब कुछ होने के बाद भी अंग्रेजी हुकूमत के अफसर करो में छुट नहीं करना चाहते थे। गांधीजी अंग्रेजी हुकूमत के इस बर्बरता पूर्वक निर्णय से काफी दुखी हुए फिर उन्होंने खेड़ा गांव से ही अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा पूर्वक आंदोलन छेड़ दिया।

असहयोग आंदोलन

महात्मा गांधी जी पर जलियांवाला बाग हत्याकांड का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था जिसके बाद वर्ष 1920 में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन की शुरुआत कर दी। इस आंदोलन के अंतर्गत गांधी जी ने सभी देशवासियों से निवेदन किया, कि वे विदेशी वस्तुओं का उपयोग बंद कर दें और स्वदेशी वस्तुएं अपनाएं। इस आंदोलन के कारण ब्रिटिश हुकूमत के पैर उखड़ने लगे थे।

नमक सत्याग्रह

नमक पर अत्यधिक कर लगाए जाने के कारण महात्मा गांधी जी ने 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से नमक पर भारी कर लगाए जाने के विरोध में दांडी यात्रा प्रारंभ की जो कि 6 अप्रैल 1930 को गुजरात के दांडी नामक गांव में समाप्त हुई।

इस आंदोलन की खबर देश विदेश में आग की तरह फैल गई थी, जिसके कारण विदेशी देशों का भी ध्यान इस आंदोलन की तरफ आ गया था। यह आंदोलन गांधी जी की तरफ से अहिंसा पूर्वक लड़ा गया था, जो कि पूर्णतरू सफल रहा। इस आंदोलन को नमक सत्याग्रह और दांडी यात्रा के नाम से जाना जाता है।
नमक आंदोलन के कारण ब्रिटिश हुकूमत विचलित हो गई थी और उन्होंने इस आंदोलन में सम्मिलित होने वाले लोगों में से लगभग 80,000 लोगों को जेल भेज दिया था

भारत छोड़ो आंदोलन

महात्मा गांधी जी ने ब्रिटिश हुकूमत को भारत से जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ किया गया। इस आंदोलन की नींव उसी दिन पक्की हो गई थी, जिस दिन गांधी जी ने नमक आंदोलन सफलतापूर्वक किया था।
महात्मा गांधी का भारत छोड़ो आंदोलन पूर्ण रूप से सफल रहा। इसकी सफलता का श्रेय सभी देशवासियों को भी जाता है क्योंकि उन्हीं की एकजुटता के कारण इस आंदोलन में किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं हुई और अंत में सफलता प्राप्त हुई।

निष्कर्ष

महात्मा गाँधी बहुत ही सरल स्वभाव के व्यक्ति थे, वे हमेशा सत्य और अहिंसा में विश्वास रखते थे।
उनके जीवन पर भगवान बुद्ध के विचारों का बहुत प्रभाव था, इसी कारण उन्होंने अहिंसा का रास्ता बनाया था। उनका पूरा जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। लेकिन अंत में उन्हें सफलता प्राप्त हुई थी। उन्होंने भारत देश के लिए जो किया है, उसके लिए धन्यवाद सब बहुत कम है।
गांधीजी के अनुसार अगर शत्रु पर विजय प्राप्त करनी है, तो हम अहिंसा का मार्ग भी अपना सकते है। जिसको अपनाकर गांधी जी ने हमें ब्रिटिश हुकूमत से आजादी दिलवाई थी।

https://www.youtube.com/watch?v=CtksM-aRDZ8
(Source : KING Status)

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