Janmashtami 2022 : जानिए कब है जन्माष्टमी, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?

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हम सभी कृष्ण जन्माष्टमी को भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। कान्हा जी भगवान विष्णु के अवतार हैं, जिनका जन्म लगभग पांच हजार साल पहले ‘द्वापर युग’ में मथुरा में हुआ था। कृष्ण जन्माष्टमी को अष्टमी रोहिणी, श्री कृष्ण जयंती, कृष्णष्टमी, सातम आठम, गोकुलाष्टमी और सिर्फ जन्माष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। हम इस दिन को कृष्ण जी के जन्मदिन के रूप में एक साथ मनाते हैं।

भगवान श्री कृष्ण के अनुयायी आज पुर विश्व में विद्यमान हैं इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे विश्व मैं मनाया जाता है आज के लेख janmashtami 2022 में हम जमष्टमी के बारे मैं जानकारी लेकर आए हैं कि जन्माष्टमी क्यूँ मनाई जाती है? कैसे मनाई जाती है? इसका महत्व क्या है? आदि जिसका उपयोग आप अपने विद्यालय के निबंध, भाषण प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में कर सकते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी 2022 (krishna Janmashtami 2022) –

जन्माष्टमी तिथि:30 अगस्त 2021
अष्टमी तिथि का आरंभ:29 अगस्त रात 11 बजकर 25 मिनट
अष्टमी तिथि की समाप्ति:30 अगस्त रात 1 बजकर 37 मिनट तक
पूजा का शुभ मुहूर्त:30 अगस्त रात 11 बजकर 37 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक

जन्माष्टमी का महत्व (Significance of Janmashtami) –

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व इस प्रकार है, इस व्रत को शास्त्रों में ‘व्रतराज’ कहा गया है। इस एक दिन व्रत रखने से अनेक व्रतों का फल मिलता है। कृष्ण जन्माष्टमी पर्व का महत्व बहुत व्यापक है, भगवद गीता में एक बहुत ही प्रभावशाली कथन है “जब-जब धर्म की हानि होगी और अधर्म की वृद्धि होगी, तब मैं जन्म लूंगा। बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, एक दिन उसका अंत अवश्य ही होना चाहिए।

मान्यता यह है कि जो भी भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करता है, उनकी पूजा-अर्चना करता है। उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके साथ-साथ अगर अविवाहित लड़कियां आज के दिन व्रत रखकर कान्हा जी को झूला झूलाती हैं तो उनके विवाह के योग जल्दी बनते हैं।

janmashtami 2022

जन्माष्टमी व्रत विधि (Janmashtami Fasting Method) –

  • इस व्रत को प्रायः विवाहित महिलायें प्रभु श्री कृष्ण के समान नटखट और दिव्य पुत्र प्राप्ति की कामना से करती हैं।
  • इस दिन पुरुष और महिलाएं रात के 12 बजे तक उपवास रखते हैं।
  • इस दिन मंदिरों में झांकियों को सजाया जाता है और भगवान कृष्ण को झूला चढ़ाया जाता है।
  • व्रत से पहले रात को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • व्रत के दिन प्रात:काल स्नान कर नित्य कर्मों से निवृत्त हो जाएं।
  • सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मा को प्रणाम करके पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं।
  • इसके बाद जल, पुष्प, कुशा और गंध लेकर संकल्प करें और इस मंत्र का जाप करें।

ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥

  • अब दोपहर के समय काले तिल के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए ‘सूतिका गृह’ स्थापित करें।
  • उसके बाद भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • मूर्ति या फोटो में माता देवकी प्रभु श्री कृष्ण को स्तनपान करते हुए हो और माता लक्ष्मी उनको प्रणाम कर रही हों
  • इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।पूजा में क्रमशः देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी का नाम लेना चाहिए और पुष्प अर्पित करते हुए निम्नलिखित मंत्र का जाप करें।

प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः।
वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः।
सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।’

  • कृष्ण को पुष्प अर्पित करें।
  • इसके पश्चात कृष्ण जी की आरती करें और मंत्रों का जाप करें।
  • श्रीकृष्ण को माखन मिश्री अवश्य चढ़ाएं।
  • अंत में प्रसाद बांटें।

जन्माष्टमी कब मनाई जाती है (When is Janmashtami celebrated) –

श्री कृष्ण जन्माष्टमी हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष को मनाई जाती है। यह त्योहार श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार हिंदू धर्म की परंपरा को दर्शाता है और सनातन धर्म का एक बड़ा त्योहार है, इसलिए भारत से दूर दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय भी इस त्योहार को बहुत धूमधाम से मनाते हैं। हर साल अगस्त या सितंबर के महीने में जन्माष्टमी बड़े उत्साह, तैयारी और खुशी के साथ मनाई जाती है। जन्माष्टमी को लोग पूरी श्रद्धा, उल्लास और समर्पण के साथ मनाते हैं।

मान्यता के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। ज्योतिषियों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय रात के 12 बजे अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र था। इसलिए जन्माष्टमी 2 दिनों तक मनाई जाती है। इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व 30 अगस्त को होने वाला है

जन्माष्टमी क्यूँ मनाई जाती है (Why is Janmashtami celebrated) –

सनातन धर्म के लोग श्री कृष्ण को अपना इष्ट मानकर पूजते हैं। इसी वजह से उनके जीवन से जुड़ी कई मशहूर घटनाओं को याद करते हुए हम उनके जन्मदिन के मौके को जश्न के तौर पर मनाते हैं

इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर अवतार लेकर मानव जाति का उद्धार किया था जैसा की कहा जाता है, की जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, अत्याचार बढ़ जाता है तब प्रभु धरती पर जन्म लेते हैं

ऐसे ही द्वापर युग मैं मथुरा के राजा कंस का अत्याचार बहुत बढ़ चुका था। वह खुद को भगवान समझने लगा था उसके इस घमंड को चूर करने के लिए और उसका वध करने के लिए ही भगवान श्री कृष्ण इस पृथ्विलोक पर अवतरित हुए इसी कारण से उनके जनमदिवस के रूप मैं जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है

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कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी (How is Janmashtami celebrated) –

जन्माष्टमी के दिन देश में कई जगहों पर मटकी फोड़ने की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है। दही हांडी प्रतियोगिता में जगह-जगह बच्चे भाग लेते हैं। दही हांडी की प्रथा मुख्य रूप से महाराष्ट्र और गुजरात से संबंधित है। दुष्ट कंस यातना के रूप में सारा दही और दूध मांगता था। इसका विरोध करते हुए श्रीकृष्ण ने कंस को दूध और दही नहीं देने का निश्चय किया। इस घटना को मनाने के लिए, दही हांडी का त्योहार बर्तन को दही से भरकर और बर्तन को बहुत अधिक ऊंचाई पर लटकाकर और फिर इसे युवाओं द्वारा तोड़कर मनाया जाता है।बच्चों द्वारा इस घड़े को तोड़ने का प्रयास किया जाता है। दही हांडी प्रतियोगिता जीतने वाली टीम को उचित इनाम दिया जाता है। जो टीम मटकी फोड़ने में सफल होती है वह इनाम की हकदार होती है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिरों को भी विशेष रूप से सजाया जाता है। जिस दिन जन्माष्टमी होती है, इस दिन पूरे दिन व्रत रखने का विधान है। जन्माष्टमी पर सभी लोग रात 12 बजे तक व्रत करते हैं। इस दिन रासलीला का भी आयोजन किया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन बच्चे के घर के सामने झाँकियाँ सजाते हैं। झाँकियों में कृष्ण के बाल रूप को पालने में सुलाया जाता है। कंस के कारखाने में देवकी और वासुदेव विराजमान होते हैं और कारखाने के बाहर सैनिकों को तैनात करते हैं।

कृष्ण के पास छोटे छोटे खिलौनों को रखा जाता है। झाँकियाँ देखने के लिए आसपास से काफी लोग आते हैं। लोगों के द्वारा मेले का आयोजन भी किया जाता है, झूले लगते हैं और खिलौने बेचने वाले भी होते हैं। इन आयोजनों में सबसे ज़्यादा बच्चे मज़े करते हैं

जन्माष्टमी पर बच्चे विशेष रूप से बहुत उत्साहित होते हैं। क्योंकि उन्हें कई तरह के खिलौने खरीदकर अपने पालने को सजाना होता है। कई जगहों पर कृष्ण लीला भी की जाती है। बच्चों द्वारा लोगों को बताया जाता है कि कैसे श्री कृष्ण अपने दोस्तों के साथ गाय चराने जाते थे।

गोपियाँ उनसे कितना प्रेम करती थीं। वह सारा काम छोड़कर उसकी बांसुरी की धुन सुनने के लिए भागी आती थी। इस दिन मंदिरों में ऐसी कई गतिविधियों की झांकियां दिखाई देती हैं। यह त्योहार मथुरा, वृंदावन और ब्रज के अन्य शहरों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन से तीन-चार दिन पहले मंदिर की साज-सज्जा शुरू हो जाती है। जन्माष्टमी के दिन मंदिर की शोभा अपने चरम पर पहुंच जाती है। मंदिरों को रंगीन बल्बों से सजाया जाता है जो बिजली से जलते हैं। कहीं-कहीं झांकियां निकलती हैं जो गलियों, मोहल्लों और दुकानों से मंदिर तक पहुंचती हैं।

सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है जो आधी रात तक नहीं रुकता। इस दिन समाजसेवी भी मंदिर के काम करवाने में मदद करते हैं। जन्माष्टमी के दिन मंदिर में इतनी भीड़ होती है कि लोगों को भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ता है। सुरक्षा के लिए मंदिर के बाहर पुलिस तैनात है।

मथुरा और वृंदावन की जन्माष्टमी (Janmashtami of Mathura and Vrindavan) –

मथुरा की जन्माष्टमी –क्यूंकी मथुरा को श्री कृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है। अतः मथुरा की जन्माष्टमी का अपना अलग ही महत्व है जन्माष्टमी का त्यौहार मथुरा में बहुत ही भव्यता और भक्ति के साथ मनाया जाता है। चूंकि भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी के सारे अनुष्ठान मध्यरात्रि में ही किए जाते हैं। मथुरा का सबसे भव्य और लोकप्रिय मंदिर द्वारकाधीश है। जहाँ जन्माष्टमी को बहुत भव्य रूप से मनाया जाता है, यहाँ कृष्ण भगवान् को दूध और दही में अनुष्ठानिक स्नान दिया जाता है। प्रभु के लिए 56 भोग का प्रसाद तैयार किया जाता है

पूरे महीने मथुरा शहर प्रार्थना में डूबा रहता है, चारों ओर शंख और घंटियों की आवाज गूंजती रहती है। इस पवित्र शहर में भगवान कृष्ण के स्वागत के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद, पंचामृत, शहद, गंगाजल, दही, घी का मिश्रण भक्तों को वितरित किया जाता है।व्रत रखने वाले लोग प्रसाद के साथ अपना व्रत खोलते हैं।

वृंदावन की जन्माष्टमी भगवान कृष्ण ने अपने प्रारंभिक वर्ष यमुना नदी के तट पर स्थित वृंदावन में बिताए। जन्माष्टमी के त्योहार के दौरान भगवान कृष्ण का आशीर्वाद लेने के लिए हर साल लाखों भक्त रासलीला करने के लिए जाने जाने वाले वृंदावन शहर में आते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, वृंदावन में मधुबन एक ऐसा स्थान है जहां भगवान कृष्ण रासलीला करते थे। त्योहार से कम से कम 7-10 दिन पहले इस पवित्र शहर वृंदावन में उत्सव मनाया जाता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर पूरे शहर में कई नाट्य या नाटक और रासलीला का आयोजन किया जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दौरान हजारों मंदिरों में से बांके बिहारी मंदिर, आस्ककॉन मंदिर और श्री कृष्ण बलराम मंदिर सबसे अधिक भक्तों को आकर्षित करते हैं। अनुष्ठानिक स्नान के अलावा, पूरे दिन सभी मंदिरों में कई पूजा और धार्मिक समारोह आयोजित किए जाते हैं।

श्री कृष्ण जन्मकथा (Shri Krishna Birth Story)

भगवान कृष्ण का जीवन मनोरंजक कहानियों से भरा है। उनके पूरे जीवन की तरह उनका जन्म भी एक मनोरंजक कहानी है।द्वापर युग मैं धर्म पर अधर्म की वृधि होती जा रही थी राक्षसों ने पृथ्वी पर कहर बरपा रखा था। द्वापर युग में धर्म पर अधर्म की वृद्धि हुई थी, राक्षसों ने पृथ्वी पर कहर बरपा रखा था। इससे बहुत परेशान होकर धरती माता ने गाय का रूप धारण किया और देवताओं के पास जाकर उनसे कहा, “हे देवताओं, मेरी रक्षा करो। मुझ पर इन राक्षसों का आतंक बढ़ रहा है। उन्हें खत्म करो।” धरती माता की इस बात का देवताओं के पास कोई समाधान नहीं था। इस पर उन्होंने ब्रह्मा जी के पास जाने का निश्चय किया और धरती माता सहित सभी देवता ब्रह्मा जी के पास गए।

ब्रह्मा जी की बात मानकर धरती माता और सभी देवता उनके साथ भगवान विष्णु के निवास क्षीर सागर पहुंचे। उस समय वह शेष नाग के पास लेटे हुए थे। वहां पहुंचकर सभी ने उन्हें प्रणाम किया और पूरी कहानी सुनाई। पूरी कहानी सुनकर भगवान विष्णु ने कहा, “हे देवी, परेशान मत हो। मैं पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में अवतरित होकर पाप का नाश करूंगा।” यह सुनकर धरती माता खुशी-खुशी वहां से चली गई।

उन दिनो मथुरा में राजा उग्रसेन शासन करते थे। वह एक दयालु राजा थे, लेकिन उनका पुत्र कंस बहुत अत्याचारी और लालची था। उसको राजगद्दी से बहुत लगाव था। एक दिन उसने राजा उग्रसेन को बलपूर्वक गद्दी से उतारकर बंदी बना लिया और स्वयं राजा बन गया, लेकिन कंस को अपनी बहन देवकी से बहुत प्रेम करता था।

कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह बहुत धूमधाम से राजा शूरसेन के पुत्र वासुदेव से किया विवाह के बाद जब कंस ने देवकी को विदा करने शुरू लगा, तभी एक आकाशवाणी हुई कि देवकी की 8वीं संतान के हाथों कंस का वध होगा यह सुनते ही कंस के पैरों तले से जमीन खिसक गई और उसने देवकी और वासुदेव को आजीवन कारागार में डाल दिया।

इसके बाद कंस एक के बाद एक देवकी की संतानो को मौत के घाट उतारने लगा ऐसे करते करते उसने देवकी और वासुदेव की 6 संतानो को मार डाला जब देवकी सातवें बच्चे के साथ गर्भवती हुई, तो देवताओं और देवताओं ने उसका छल से गर्भपात करवा दिया। साथ ही उस बच्चे का जन्म वासुदेव की पहली पत्नी रोहिणी के गर्भ में हुआ। बाद में यह बालक श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के नाम से पहचाना गया।

इसके बाद भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को देवकी की 8वीं संतान रोहिणी नक्षत्र में उत्पन्न हुई। उसके पैदा होते ही सारे सैनिक अपने आप सो गए। देवकी और वासुदेव की हथकड़ी खोल दी गई और जेल के दरवाजे भी खोल दिए गए।अपने आप खुल गया। दोनों को कुछ समझ नहीं आया और तभी एक आकाशवाणी हुई कि इस पुत्र को नंद बाबा के पास गोकुल में छोड़ आओ उन्होंने ठीक वैसा ही किया। उन्होंने श्रीकृष्ण को टोकरी में लेटा दिया और यमुना नदी के पार गोकुल में छोड़ दिया और वहीं पालने में सो रही बेटी को अपने साथ जेल ले आए। वासुदेव के लौटने के बाद सब कुछ पहले जैसा हो गया। हथकड़ी और जेल के दरवाजे वापस रख दिए गए और पहरेदारों को होश आ गया।

होश में आने पर सैनिकों ने जाकर कंस को देवकी के 8वें बच्चे की खबर दी। कंस दौड़ता हुआ जेल आया और देवकी की गोद से उसका बच्चा छीन लिया। इसके बाद जैसे ही कंस ने उसे मारने के लिए हाथ उठाया, वह उसके हाथ से छूट गई और हवा में उड़ गई और कहा, “दुष्ट कंस, मैं योगमाया हूं। आपको मारने के लिए भगवान ने गोकुल में अवतार लिया है। अब तुम्हारा अंत निश्चित है।”

इसके बाद कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए कई राक्षसों को गोकुल भेजा, लेकिन कोई कुछ बिगाड़ नही पाया। अंत में उसने कंस का वध किया और मथुरा को उसके आतंक से मुक्त कराया।

FAQ (जनमाष्टमी से सम्बंधित कुछ प्रशन) –

Q1. जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?
द्वापर युग में कंस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था वह अपने आप को ही भगवान समझने लगा था और लोगों से अपनी पुजा करवाने के लिए उन पर अत्याचार करता था उसके इस घमंड को चूर करने के लिए और उसका वध करने के लिए ही भगवान श्री कृष्ण इस पृथ्विलोक पर अवतरित हुए। इसी कारण से उनके जनमदिवस के रूप मैं जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।

Q.2 जन्माष्टमी का महत्व क्या है?
श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व इस प्रकार है, इस दिन जो भी मनुष्य पूरी श्रद्धा के साथ भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं। उनकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, मान्यता यह भी है की अगर आज के दिन कोई कुँवारी कन्या व्रत रखकर कान्हा जी को झूला झूलाती हैं, तो उसकी सादी जल्दी होने के योग बनते हैं।

Q.3 भारत में जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है?
जन्माष्टमी के दिन देश में कई जगहों पर मटकी फोड़ने की प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। दही हांडी प्रतियोगिता में जगह-जगह बच्चे भाग लेते हैं। मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता हैं मंदिरों में झांकिया लगाई जाती हैं और भगवान श्री कृष्ण को झूला झुलाया जाता है।

Q.4 कृष्ण का जन्मदिन कब है?
कृष्ण जी का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी को हुआ था। इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी ३० अगस्त को हैं।

Q.5 कृष्ण जी का व्रत कौन से दिन रखा जाता हैं?
कृष्ण जन्माष्टमी दिन ही कृष्ण जी के लिए व्रत रखा जाता है।

Q.6 २०२१ में जन्माष्टमी पूजा कब है?
इस बार जन्माष्टमी तिथि 30 अगस्त को है। अष्टमी तिथि का आरंभ 29 अगस्त रात 11 बजकर 25 मिनट से शुरू होगा और 30 अगस्त रात 1 बजकर 37 मिनट पर अष्टमी तिथि की समाप्ति होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त रात 11 बजकर 37 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक है।

Q.7 कृष्ण के जन्मदाता कौन हैं?
कृष्ण की माता देवकी व पिता वासुदेव है कृष्ण इनकी 8वीं संतान है।

Q.8 श्री कृष्ण के गुरु का नाम क्या था?
आचार्य संदीपनी।

Q.10 श्री कृष्ण का जन्म स्थान कहां है?
श्री कृष्ण का जन्म स्थान गोकुल में है।

Q.11 श्री कृष्ण कहां के राजा बने थे?
द्वारिका।

तो दोस्तों ये था janmashtami 2022 के सन्दर्भ में हमारा लेख। इस लेख में हमने जन्माष्टमी को लेकर सभी पक्षों को विस्तृत रूप से बताया है आशा है आपको यह लेख पसंद आया होगा आगे भी ऐसे लेख पढ़ने के लिए हमसे जुड़े रहिए एवं पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद

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