होली पर निबंध [5+] | Holi Essay In Hindi (2022)

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भारत त्यौहार और मेलों का देश है। पूरे विश्व की तुलना में भारत में अधिक त्यौहार मनाए जाते हैं। प्रत्येक त्यौहार अलग अवसर से संबंधित है कुछ वर्ष की ऋतुओं का, फसल कटाई का, वर्षा ऋतु का अथवा पूर्णिमा का स्वागत करते हैं। कुछ धार्मिक अवसर, ईश्वरीय सत्ता व संतों के जन्म दिन अथवा नए वर्ष की शरूआत के अवसर पर मनाए जाते हैं।

होली भी ऐसा ही त्योहार है जो पूरे भारत में मनाया जाता है। आज का ये आर्टिकल holi essay in hindi लेकर आया है। प्रात: छोटी कक्षाओं में होली निबंध लिखने को बोला जाता है। ऐसे में ये आर्टिकल आपके काम आ सकता हैद्य तो चलिए होली पर निबंध शुरू करते हैं।

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होली पर निबंध (Holi Essay In Hindi) –

होली भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है, जो अब पूरी दुनिया में जाना जाता है। यह मुख्य रूप से भारत और नेपाल में मनाया जाता है। मंजीरा, ढोलक, मृदंग की ध्वनि से गूंजता रंगों से भरा होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। ऐसे में मार्च का महीना होली के उत्साह को और बढ़ा देता है।

इस त्यौहार में सबकी ऊर्जा दिखती है, लेकिन होली के मौके पर हमने देखा है कि जो बच्चे सबसे ज्यादा खुश होते हैं, वे अपने सीने पर रंग-बिरंगी पिचकारी लगाते हैं, सभी पर रंग डालते हैं और जोर-जोर से कहते हैं “होली है भाई होली है बुरा ना मानो होली है“। होली का त्योहार अपने साथ सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है और आसमान में बिखरे गुलाल की तरह ऊर्जा को चारों ओर फैला देता है। इस त्योहार की खास तैयारियों में भी लोगों के अंदर काफी उत्साह देखा जा सकता है।

होली की तैयारियाँ (Holi preparations) –

  • होली एक ऐसा त्योहार जो मन को हर्षोल्लास से भर देता।
  • इस त्योहार की तैयारीओं में लोग महीने भर पहले से लग जाते हैं।
  • घरों की महिलाएँ चिप्स, पापढ़, कचरी आदि बनाने में लग जाती हैं।
  • इसके अतिरिक्त घरों और भी बहुत से पकवानो की तैयारियाँ की जाती है।
  • मेहमान के लिए गोलगप्पे, दही भल्ले, पकौड़ियाँ आदि बनाए जाते है।
  • होली के दिन सुबह रंग खेला जाता है। जिसके लिए लोग प्रायः सफेद कपड़े लेते हैं।
  • इस दिन खूब जम के रंग खेला जाता है।
  • इसके पश्चात शाम को लोग रिश्तेदारों या दोस्तों से मिलने जाते हैं।
  • होली के लिए प्रत्येक घर में सभी के लिए नये कपड़े बनवाए जाते हैं।

कैसे मनाई जाती है होली (How is Holi celebrated) –

होली रंगों का त्योहार है। होली से एक रात पहले होलिका दहन का कार्यक्रम होता है। इसके लिए शहर के प्रमुख चौराहों पे होली जलाई जाती है। यह ईश्वर की अनंत शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रमाण देता है। अगली सुबह रंग खेला जाता है। होली पर हर कोई काफी एक्साइटेड होता है। बड़े भी बच्चे बन जाते हैं, हर उम्र के चेहरे को रंगों से इस तरह रंगते हैं कि पहचानना मुश्किल हो जाता है। अमीर-गरीब, ऊंच-नीच का भेद भूलकर सभी होली में खुशी से नाचते नजर आते हैं। नृत्य करने का एक अन्य कारण भांग और ठंडाई भी है, इसे होली पर विशेष रूप से पिया जाता है। घर की महिलाएं सारे पकवान बनाकर दोपहर से ही होली खेलने लगती हैं, वहीं बच्चे सुबह उठकर जोश के साथ मैदान में आते हैं।

होलिका दहन (Holika Dahan) –

  1. होली के दिन किसी सार्वजनिक स्थान पर झंडा या बड़ी लाठी गाड़ दी जाती है।
  2. इस झंडे के चारों तरफ लकड़ियाँ जमा की जाती हैं
  3. कुछ लोग अपने घर पुराना टूटा-फूटा लकड़ी का सामान भी लाकर जमा कर देते हैं।
  4. हिंदू धर्म के अनुसार पूजा के बाद इन लकड़ियों में आग लगा दी जाती है
  5. और इसकी राख से तिलक लगाया जाता है।
  6. इसे होलिका दहन का प्रतीक माना जाता है।
  7. इस आग में किसान अपने खेत नयी फसल के कुछ दाने को सेंककर सभी में बांट देते हैं।
  8. इससे एकता और भाईचारे की भावना जागृत होती है।

रंगों की होली (धुलेंडी) – Holi of colors (Dhulendi)

  • होली दो दिवसीय पर्व है। होली की तैयारी कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती है।
  • होली से पहली रात को होलिका दहन किया जाता है।
  • होलिका दहन के अगली सुबह फूलों के रंगों से खेलकर होली की शुरुआत की जाती है।
  • इस दिन को धुलेंडी के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस दिन लोग एक दूसरे पर रंग और गुलाल डालते हैं।
  • होली पर सभी रंग गुलाल और पानी में रंग घोलकर, पिचकारी से एक.दूसरे पर रंग डालकर प्यार से खेलते हैं।
  • बच्चों को नयी नयी प्रकार की पिचकारी से खेलने का बहुत शौक होता है।
  • सड़कों पर बच्चों, बूढ़ों, लड़कियों और महिलाओं के समूह नाचते-गाते, गुलाल लगाते और रंगीन पिचकारी छिड़कते नजर आते हैं।
  • सभी के मन खुशी से झूम उठते हैं। पूरे देश में लोग अपनी-अपनी परंपरा से होली मनाते हैं।
  • सभी रंगों के जरिए अपनी खुशी का इजहार करते हैं।
  • हर कोई अपनों के घर पकवान खाने जाता है और बधाई देता है।
  • चारों दिशाएं खुशियों से भर जाती हैं।

निष्कर्ष –

होली खुशियों से भरे रंगों का त्योहार है, यह भारत की धरती पर प्राचीन काल से ही मनाया जाता है। इस त्योहार की खास बात यह है कि इसकी मस्ती में लोग आपसी नफरत को भी भूल जाते हैं। वास्तव में होली का त्योहार में लोग एक दूसरे के गिले- शिकवे भूल के आपस में मिलते हैं। ये त्योहार आपसी प्रेम और सदभावना का प्रतीक है।

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होली पर दूसरा निबंध (Holi Par Nibandh) –

होली का महत्व (Importance of Holi)

धार्मिक मान्यताओ के अनुसार होलिका दहन की आग बहुत प्रभावी और पवित्र मानी जाती है। जिसके प्रभाव से रोग, दोष दूर हो जाते हैं। इस दिन लोग घर के बाहर बीच चौराहे पर गोबर के उपले को रखकर घर की हर टूटी फूटी चीज़ों को उस पर रख देते हैं। इसके बाद महुर्त के अनुसार उसमे आग लगा दी जाती है। घर की महिलायें इसकी परिक्रमा करती हैं। घर से लाए गये गुज़िया और अन्य पकवानों से इसकी पूजा की जाती है। इस प्रकार अपने घर से अकरात्मकता को दूर करने के लिए प्रार्थना की जाती है।

होली का पौराणिक महत्व (Mythological significance of Holi)

होली के उत्सव के पीछे एक दिलचस्प कहानी है जिसका बहुत महत्व है। प्राचीन काल में इस पर्व की शुरुआत राजा हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका के अहंकार और हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद की भक्ति से हुई थी। हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा से वरदान के रूप में कई शक्तियां प्राप्त हुई थीं, जिसके बल पर वह अपनी प्रजा का राजा बना। कहा जाता है कि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु का नाम लेते थे। प्रह्लाद के पिता ने उसे भगवान का नाम लेने से रोका क्योंकि वह खुद को भगवान मानता था।

प्रह्लाद इस बात को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं कर रहा था। प्रह्लाद को अनेक दण्ड दिये गये परन्तु ईश्वर की कृपा से वे सभी दण्ड असफल रहे। हिरण्यकश्यप की होलिका नाम की एक बहन थी। होलिका को वरदान था कि आग उसे जला नहीं सकती। होलिका ने प्रह्लाद को गोद में लिया और अपने भाई के आदेश पर चिता पर बैठ गई। भगवान की महिमा के कारण, होलिका उस चिता में जलकर राख हो गईए लेकिन प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ। इसलिए इस दिन होलिका दहन भी किया जाता है।

भगवान कृष्ण से पहले यह त्योहार होलिका जलाकर ही मनाया जाता था, लेकिन भगवान कृष्ण ने इसे रंगों के त्योहार में बदल दिया। इस दिन भगवान कृष्ण ने होली के अवसर पर अपने घर आए राक्षस पूतना का वध किया था। बाद में उन्होंने इस त्योहार को रासलीला और गोपियों के साथ रंग खेलने के त्योहार के रूप में मनाया। तभी से इस पर्व पर दिन में रंग खेलने और रात में होली जलाने की परंपरा बन गई है।

होली का सामाजिक महत्व (Social significance of Holi) –

होली के त्योहार का अपने आप में एक सामाजिक महत्व है। यह समाज में रहने वाले लोगों के लिए ढेर सारी खुशियां लेकर आता है। यह सभी समस्याओं को दूर कर लोगों को करीब लाता है। और उनके बंधन को मजबूत करता है। यह त्योहार दुश्मनों को दोस्तों में बदल देता है और उम्र,जाति और धर्म के सभी भेदभाव को दूर कर देता है।

एक दूसरे के प्रति अपना प्यार और स्नेह दिखाने के लिए वे अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को उपहार, मिठाई और बधाई कार्ड देते हैं। यह त्योहार रिश्तों को पुनर्जीवित और मजबूत करने के लिए एक टॉनिक के रूप में कार्य करता है, जो एक दूसरे को महान भावनात्मक बंधनों में बांधता है।

होली मानने का धार्मिक कारण (Religious reason for celebrating Holi) –

हमारा प्रत्येक पर्व किसी-न-किसी प्राचीन घटना से जुड़ा हुआ है। होली के पीछे भी एक ऐसी ही प्राचीन घटना है जो आज से कई लाख वर्ष पहले सत्ययुग में घटित हुई थी। होली उत्सव के प्रारम्भ होने के पीछे भी एक बहुत हो रोचक कहानी है। यह कहानी है एक अहंकारी राजा हिरण्य कश्यप एवं उनकी बहिन होलिका की और राजा के बेटे प्रहलाद की जो भगवान के प्रति समर्पित था।

राजा चाहता था कि सब उसकी भक्ति और पूजा करें लेकिन प्रहलाद भगवान विष्णु के भक्त थे। इसी कारण राजा और होलिका मिल कर प्रहलाद पर अत्याचार करते थे। फिर भी जब वो उसकी भक्ति और भगवान पर विशवास तोड़ नहीं पाए तो उसे मारने के बहुत से उपाय किए। लेकिन जब सारे उपाय विफल हुए तो राजा और होलिका ने मिल कर उसे जला कर मारने की योजना बनाई।

होलिका को एक चुनरी वरदान में मिली थी जिसको आग जला नहीं सकती थी। प्रहलाद को अपनी गोदी में बैठा वो आग की चिता में बैठ गयी। सौभाग्य से प्रहलाद, जिसे भगवान ने आशीर्वाद दिया था बच गया और होलिका आग में जल कर भस्म हो गयी। होली से एक दिन पहले लोग होलिका दहन कर अहंकार पर आस्था की जीत की ख़ुशी मनाते है।

होली मनाने का तरीका (How to celebrate Holi) –

होली का त्योहार प्रमुखत: दो दिन का त्योहार है जिसमे पहले दिन होली दहन का कार्यक्रम होता है। होलिका दहन के दौरान, हर कोई इसके चारों ओर घूमता है और अपने अच्छे स्वास्थ्य और प्रसिद्धि की कामना करता है। और साथ ही साथ अपनी सभी बुराईयों को भस्म करता है। इस त्योहार में ऐसी मान्यता भी है कि सरसों से शरीर की मालिश करने से सभी रोग और बुराइयां दूर हो जाती हैं और साथ ही यह पूरे साल स्वस्थ और फिट रहता है।

होलिका दहन की अगली सुबह के बाद, लोग एक साथ रंगीन होली मनाने के लिए एक जगह इकट्ठा होते हैं। इसकी तैयारी इसके आने के एक हफ्ते पहले से ही शुरू हो जाती है तो क्या बच्चे और बड़े सभी इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं और खूब खरीदारी करते हैं एक हफ्ते पहले ही वह अपने दोस्तों, पड़ोसियों और प्रियजनों के साथ पिचकारी और रंगीन गुब्बारों से खेलना शुरू कर देता था। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं और रंग गुलाल लगाते हैं और मजेदार व्यंजनों का आनंद लेते हैं।

होली मनाने का समय (Holi Celebration Time) –

यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्यौहार बुराई की सत्ता पर अच्छाई की विजय का भी संकेत है। यह ऐसा त्यौहार है जब लोग एक दूसरे से मिलते हैं, हँसते हैं, समस्याओं को भूल जाते हैं और एक दूसरे को माफ करके रिश्तों का पुनरुत्थान करते है। यह चंद्र मास,फाल्गुन की पूर्णिमा के अंतिम दिन, गर्मी के मौसम की शुरुआत और सर्दियों के मौसम के अंत में, बहुत खुशी के साथ मनाया जाता है। यह बहुत सारी मस्ती और उल्लास की गतिविधियों का त्यौहार है जो लोगों को एक साथ बाँधता है। हर किसी के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान होती है और अपनी खुशी को दिखाने के लिए वे नए कपड़े पहनते हैं।

होली का वास्तविक अर्थ (Real meaning of Holi) –

होली वसंत ऋतु में मनाए जाने वाला भारतीय और नेपाली लोगों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। होली रंगों और हंसी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है जिसे आज पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। रंगों का त्योहार कहा जाता है यह त्योहार पारंपरिक रूप से दो दिनों तक मनाया जाता है।

यह त्यौहार कई अन्य देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है जहां अल्पसंख्यक हिंदू रहते हैं। पहले दिन होलिका जलाई जाती है जिसे होलिका दहन भी कहा जाता है। दूसरे दिन जिसे मुख्य रूप से धुलेंडी और धुरडी, धुरखेल या धुलीवंदन के नाम से जाना जाता है, लोग एक-दूसरे पर रंग,अबीर-गुलाल आदि फेंकते हैं, ढोल बजाकर होली के गीत गाए जाते हैं और लोग घर-घर जाकर रंग लगाते हैं।

ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कड़वाहट को भूलकर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर आराम करने के बाद नए कपड़े पहनकर शाम को लोग एक दूसरे के घर जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाई खिलाते हैं।

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होली के दोष –

होली अपने आप में एक महान त्योहार है लेकिन कुछ असमाजिक तत्व इस त्योहार का नाम खराब करते है और ऐसी हरकतें कर देते हैं जिनसे लोग होली की परंपराओं में दोष निकलना शुरू कर देते हैं। जैसे-

  • इतनी खुशियों के त्यौहार में भी कई लोग शराब पीकर और नशे में चूर होकर लड़ाई-झगड़े पर उतर जाते हैं।
  • कुछ लोगअपनी शत्रुता का बदला लेने के लिए अनुचित साधनों का प्रयोग कर देते है। जिसके फलस्वरूप रंग का त्यौहार रंज के त्यौहार में बदल जाता है।
  • कुछ लोग रंगों के स्थान पर कीचड़ और गोबर जैसी चीज़ों का इस्तेमाल करके इस त्योहार को दोषी बना देते हैं।
  • कुछ असमाजिक तत्व होली के बहाने महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ करके इस त्योहार का माहौल खराब करते है।

निष्कर्ष –

वास्तव में होली का त्योहार बहुत ही उच्च दृष्टिकोण के साथ लोकप्रिय है। लेकिन आज के लोगों ने इसका स्वरूप खराब कर दिया है। होली के महत्व को न समझने वाले ही ऐसा करते हैं। होली सद्भाव, एकता,प्रेम, खुशी और आनंद का का संदेश लेकर आता है। इस दिन लोग भेदभाव भूल के खुशी से नाचते नज़र आते हैं। इस दिन की खुशी नसों में नया रक्त प्रवाह करती है। बच्चे ,बूढ़ों सभी में एक नया जोश भर जाता है। सभी के मन से निराशा दूर हो जाती है। अतः हमे होली का त्योहार शांति और प्रेम के साथ मनाना चाहिए।

तो दोस्तों ये था holi essay in hindi का संग्रह ,आपको ये निबंध कैसे लगे कॉमेंट करके हमे ज़रूर बताए। पोस्ट पसंद आई हो तो लाइक ज़रूर करें। आगे भी ऐसी पोस्ट पढ़ने के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए। धन्यवाद !

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