Hindi Poem For School | 11+ स्कूल पर कविता (2022)

हैलो दोस्तो आज हम आपके लिए hindi poem for school में लाए हैं स्कूल पर कविताऐ जिन्हे आप सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते है! स्कूल तो सभी ही जाते है लेकिन स्कूल एक ऐसी जगह है जिसे व्यक्ति हमेशा याद करता है जैसे जैसे हम बड़े होते है।

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हमारे स्कूल के वो दोस्त भी हमसे बिछड़ जाते है और हम सब अपने काम मे ही व्यस्त हो जाते है ऐसा मेरा भी हाल है लेकिन अगर कोई बचपन का स्कूल वाला दोस्त मिल जाये तो पुरानी यादे फिर से ताजा हो जाती है!

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Hindi poem for school-बच्चों को स्कूल भिजाएं,

बच्चों को स्कूल भिजाएं,
अक्षरब्रह्म का ज्ञान कराएं।

बच्चे तो अनगढ़ माटी हैं,
इनको सुन्दर गुलदान बनाएं।

शिक्षा सम्मानों की खेती है,
आओ इनका मान कराएं।

विद्यालय शिक्षा के मंदिर हैं,
बच्चों से पूजन करवाएं।

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Poems for kids-स्कूल चलें लेकर बस्ता हाथ

स्कूल चलें हम भाइयों, लेकर बस्ता हाथ
दीदी भाई संग में, आओ तुम भी साथ।
शिक्षा का अधिकार है, मिला सभी को यार
झटपट बस्ता लो उठा, हो जावो तैयार।

गीता मीना भी चलो, बबलू डबलू रोज
पढ़ना लिखना साथ में, करे ज्ञान की खोज।
पढ़ लिख नाम कमा चलो, ज्ञानवान हो सार
एक पढ़े घर भर पढ़े, सबको है अधिकार।

विद्यालय में आ पढ़ो, अक्षर ज्ञान अपार
चलो चलेंगे स्कूल हम, जन्मसिद्ध अधिकार।

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Poem on school in hindi-सैर-सपाटे भूल चले

सैर-सपाटे भूल चले, बच्चे फिर स्कूल चले।
छुट्टी वाले दिन खर्चे शुरू पढ़ाई के चर्चे

आलस पर दे धूल चले, बच्चे फिर स्कूल चले।
कक्षा नई नए बस्ते नन्हे-मुन्ने गुलदस्ते

हंसते-गाते फूल चले, बच्चे फिर स्कूल चले।
रंगों का रेला बच्चे खुशियों का मेला बच्चे
तन-मन झूला झूल चले, बच्चे फिर स्कूल चले।

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Mere vidyalaya par 10 line-वह बचपन की ज़िंदगानी

क्या थी वह बचपन की ज़िंदगानी
याद आती है वो यादें प्यारी
स्कूल जाते थे हम सब मिल के
स्कूल के दिनों के वह दोस्त मिल के

स्कूल जाते वक़्त लगता था वह पेड़
जहा लगते थे अमरूद और बेर
देखते ही कूद पड़ते थे हम सब शेर
स्कूल यूनिफार्म करके थोड़ा सैल

क्या थी वह बचपन की ज़िंदगानी
याद आती है वो यादें प्यारी !!

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Hindi poem for class 3-आओ स्कूल चलें हम

आओ स्कूल चलें हम,
स्कूल में खुब पढ़ें हम।

जब तक सांसे चले,
तब तक ना रुके कदम ।

पढ़ लिख के बन जाएं नेहरू।
खुले गगन में उड़ेगें बन पखेरू।

गाता रहे हमारी सांसो की सरगम।
जैसे परी रानी की पायलकी छमछम।
आओ स्कूल चले हम !!

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Hindi poem for kids-शिक्षकों की यहां है भरमार

शिक्षकों की यहां है भरमार।
हर रोज कुछ अलग बताते।।

नहीं सुनने पर इनकी।
पड़ती थी वो प्यारी मार।।

एक के बाद एक शिक्षकों का आना।
कुछ अलग विषयों का बताना।।

कोई शिक्षक लगता प्यारा।
तो कोई प्यार करता बच्चो को खूब सारा।।

हर किसी की जिंदगी यहां संवरती।
हर किसी को सही रास्ता ये बतलाता।।

एक बार आने के बाद जिसे कोई भूल नहीं सकता।
ऐसा है मेरा प्यारा विद्यालय।।

hindi poem for school students

Mera vidyalaya nibandh-चलो कुछ दर्द हम भूल जातें हैं

चलो कुछ दर्द हम भूल जातें हैं,
आज फिर से हम स्कूल जाते है।

रोक न सकें हमें कोई जंजीरें,
वक्त का पैगाम आज साथ लिए चलते है।

ऐ जिन्दगी मेरे स्कूल वाले ख्वाब लौटा देना,
मेरे बिछडे दोस्तों को मुझसे मिला देना।

बंदिशे एहसास से बढकर नहीँ होती,
मेरे गुरू के मुझे बस दर्शन करा देना ।

चलो कुछ दर्द हम भूल जातें हैं,
आज फिर से हम स्कूल जाते है।

mera vidyalaya par nibandh

Poem on school life in hindi-यह मेरा प्यारा स्कूल

यह मेरा प्यारा स्कूल
नहीं सकता में इसको भूल
मां ने मुझको जन्म दिया
और दिया ढेर सारा प्यार स्कूल ने

मेरा ज्ञान बढ़ाकर
मेरा जीवन दिया संवार
खूब खेलो और पढ़ो तुम
कहती यह टीचर हमारी

बड़े होकर प्रण तुम करना
देश की सेवा करेंगे मिलकर
कोई वकील कोई देश का नेता
कोई डॉक्टर, कोई इंजीनियर होगा

भारत विश्व में बनेगा अव्वल
हर कोई जब शिक्षित होगा
यह मेरा प्यारा स्कूल
नहीं सकता में इसको भूल !!

mere vidyalaya par nibandh

Hindi poem class 5 – हो जाओ तैयार, स्कूल चले हम

हो जाओ तैयार, स्कूल चले हम..
जूते पहनो यार, स्कूल चले हम..!

रास्तों की सैर..खाते हुए बैर..
दोस्तों की बाते करेगें आते जाते..

हो जाओ तैयार, स्कूल चले हम..
जूते पहनो यार, स्कूल चले हम..

पढ़ाई- लिखाई, मस्ती-धमाल
मिलकर सब करने कमाल

हो जाओ तैयार, स्कूल चले हम
जूते पहनो यार , स्कूल चले हम !

short hindi poems

Short hindi poems – वो कमीज के बटन ऊपर नीचे लगाना

वो कमीज के बटन ऊपर नीचे लगाना
अपने बाल खुद न काढ पाना

पी टी शूज को चाक से चमकाना
वो काले जूतों को पैंट से पोछते जाना

ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना
वो बड़े नाखुनो को दांतों से चबाना

और लेट आने पे मैदान का चक्कर लगाना
वो prayer के समय class में ही रुक जाना

पकडे जाने पे पेट दर्द का बहाना बनाना
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना !!

Hindi poem on school days- ज्ञान का भंडार हैं जहां

ज्ञान का भंडार हैं जहां
इससे बेहतर जगह है कहां
पुस्तकों की यहां कमी नहीं
ज्ञान की जहां अल्पता नहीं।

गुरु का साथ है यहां
मेरा विद्यालय से बेहतर विद्यालय है कहांं
ज्ञान का मंदिर है ये
मेरे लिए जन्नत है ये।

दोस्तों का साथ यहां
जिंदगी का आनंद यहां मिला
यहां आकर ऐसा लगता
जैसे देख लिया हो काला सपना।

बच्चों के लिए है कोई जेल जैसा
अपने लिए है जिंदगी का बड़ा कोना
शिक्षकों की डांट मिलती
जिंदगी हमेशा कुछ नया सिखाती।

रोज का वो लड़ाई झगड़ा
फिर से एक हो जाना
कोई स्कूल जाने से डरता
तो किसी की इच्छा नहीं होती।

हर रोज कुछ नया सिखाता
ऐसा है मेरा विद्यालय।

Hindi poem on school life-आज अम्मी ने मुझे सुबह उठाया है

आज अम्मी ने मुझे सुबह जल्दी उठाया है
नहाया और सजाया, फिर नाश्ता कराया है

सुबह से ही वालिद का स्कूटर मैंने तैयार पाया है
ख़ुशी के साथ थोड़ा अंदाज़ मेरा भी हड़बड़ाया है

बड़ी चाहत से अपना बस्ता मैंने यूँ सजाया है
और कॉपी-किताबों को बड़े क़रीने लगाया है

आज कैसा हो दिन मेरा? पे बस ख़्यालों का साया है
मेरे स्कूल जाने का, आज पहला दिन जो आया है !!

Hindi poem my school-हम चलते नही थकते

कुछ रास्ते हम चलते नही थकते,
कुछ पल रुकाये नही रुकते,
याद बन गया हर वो लम्हा,
स्कूल के दिन वापस नही मिलते….

वो स्कूल का ग्राउंड,
वो सी-सो हमारा,
आज भी याद है,
वो क्लास रूम हमारा…

वो पेन्सील के लिये लढना झगडना,
दोस्तो का वो रूठना मनाना,
बर्थडे के दिन नयी ड्रेस पेहेंना,
हर पल में बस खुशिया मनाना…

होमेवोर्क पुरा हो तो
फस्ट बेंच के लिये झगडना,
वर्ना बुक भूलने के बहाने बनाना…

प्ले अवर का वो सबसे बडा इंतजार,
और उसका चुटकियो में निकल जाना,
ऑटो में बैठ कर फिर,
बोर्नविटा के खयालो में खो जाना….

वो जितना हारना,
वो बालों को खिचना,
याद है मुझे,
हर पल वो सुहाना…

वो छुट्टी में हमारा,
ड्रोइंग् क्लास लगाना,
वो बटरफ्लाय वो गुलदस्ता बनाना,
वो विडीओ गेम हमारा,
वो ताश का घर बनाना…

वो घर टूट गया,
वो बचपन बीत गया,
बोहोत सारी प्यारी प्यारी यादे दे गया,
वो बचपन मेरा चुपके से चला गया

Hindi poem for school students – क्या दिन थे वो जब हम स्कूल जाते थे

क्या दिन थे वो जब हम स्कूल जाते थे
हर एक ख़ुशी को मनाया करते थे
मन करे तब खेलने जाते थे
साथ बैठकर एक दूसरे का खाना खाते थे।

क्या दिन थे वो जब हम स्कूल जाते थे
हर एक ख़ुशी को मनाया करते थे।

एक चॉकलेट दस लोगों में बांटते थे
सजा मिली तो भी खुश हो जाते थे
बिना पहचान के दोस्ती कर लेते थे
कुछ पल के लिए ही झगड़ते थे।

क्या दिन थे वो जब हम स्कूल जाते थे
हर एक ख़ुशी को मनाया करते थे।

फिर से दोस्ती का हाथ बढ़ाते थे
एक दिन अचानक सब बड़े हो गए
अपनी ही दुनिया में सब खो गए
एक दूसरे से सब बिछड़ते गए।

क्या दिन थे वो जब हम स्कूल जाते थे
हर एक ख़ुशी को मनाया करते थे।

देखे हुए सपनों को हक़ीकत में बदलते गए
फिर एक दिन जीवन जग मगा गया
जैसे आसमान ध्रुवा तारों से हो भर गया
दिलों में बचपन की यादें छोड़ गया।

क्या दिन थे वो जब हम स्कूल जाते थे
हर एक ख़ुशी को मनाया करते थे।

इतने सालों बाद भी हम साथ है
इस बात का हमको एहसास दे गया
पहचान का क्या वो तो हो ही जाएगी
ध्रुव तारे है हम इसमें ही सब मिल गया।

क्या दिन थे वो जब हम स्कूल जाते थे
हर एक ख़ुशी को मनाया करते थे।

Vidyalaya par lekh – नहीं देखता था घड़ी जब बच्चा था

नहीं देखता था घड़ी जब बच्चा था
क्योंकि वक्त उस समय मेरा अच्छा था
हर समय खेलता था नहीं थी कोई टेंशन
ना थी शेलरी की चिंता न थी कोई पेंशन।

दूर तक साईकिल से घूमने जाता था
क्योंकि ये सब करने में मजा आता था
रोज सुबह उठकर वो स्कूल जाना
छुट्टी मांगने के नए बहाने बनाना।

पढ़ाई की टेंसन से हिम्मत का टूटना
छोटी छोटी बातों पे माँ से रूठना
स्कूल जाना पूरे रास्ते दोस्तों से बतियाना
इंटरवल में दोस्तों के टिफिन हथियाना।

यूनिफार्म पहन के जाने का वो रूल
पहन कर न आने पर प्रिंसिपल का हूल
सोचता था कि कब ख़तम होगा स्कूल
जायेगे हम स्कूल के उस रास्ते को भूल।

जिस रास्ते में पड़ता है मेरा वो स्कूल
क्या भूल पाऊँगा वो अतीत पुराना
अब कहता फिरता हु की था वो वक्त सुहाना
अब चाहता हु क्या लौट आयेगा फिर वो जवना।

नहीं देखता था घड़ी जब बच्चा था
क्योंकि वक्त उस समय मेरा अच्छा था
हर समय खेलता था नहीं थी कोई टेंशन
ना थी शेलरी की चिंता न थी कोई पेंशन।

दूर तक साईकिल से घूमने जाता था
क्योंकि ये सब करने में मजा आता था
रोज सुबह उठकर वो स्कूल जाना
छुट्टी मांगने के नए बहाने बनाना।

पढ़ाई की टेंसन से हिम्मत का टूटना
छोटी छोटी बातों पे माँ से रूठना
स्कूल जाना पूरे रास्ते दोस्तों से बतियाना
इंटरवल में दोस्तों के टिफिन हथियाना।

यूनिफार्म पहन के जाने का वो रूल
पहन कर न आने पर प्रिंसिपल का हूल
सोचता था कि कब ख़तम होगा स्कूल
जायेगे हम स्कूल के उस रास्ते को भूल।

जिस रास्ते में पड़ता है मेरा वो स्कूल
क्या भूल पाऊँगा वो अतीत पुराना
अब कहता फिरता हु की था वो वक्त सुहाना
अब चाहता हु क्या लौट आयेगा फिर वो जवना।

(Source : Infobells – Hindi)
 

निष्कर्ष Conclusion-

हमारी पोस्ट hindi poem for school को पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद ! अगर हमारी ये कवितायें आपको पसंद आयी हो तो कमेंट और शेयर जरूर करें। और इसी तरह हमारे ब्लॉग hindify.org के साथ जुडे रहे !

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