Govardhan Puja 2022 में कब है ? जानिए गोवर्धन पूजा विधि, और शुभ मुहूर्त

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दोस्तों आज की पोस्ट govardhan puja 2022 में हम आपके आमने लेकर आये हैं गोवर्धन पूजा के बारे में पूरी जानकारी लेकर आए हैं। दोस्तों गोवर्धन पूजा का त्यौहार कार्तिक मास की शुक्ल की प्रतिपदा को मनाया जाता है।

इस साल गोवर्धन पूजा 5 नवंबर को है। इस त्यौहार में गाय के गोबर से गोवर्धन की प्रतिमा बनाई जाती है और फिर पूजा की जाती है। ये पूजा कैसे की जाती है, गोवर्धन पूजा का महत्व क्या है? गोवर्धन पूजा क्या होती है? इन सबके बारे में हमने इस पोस्ट में विस्तार से बताया है। तो चलिए शुरू करते हैं।

govardhan puja

गोवेर्धन पूजा का महूर्त Govardhan puja 2022 –

वर्ष:2022
गोवर्धन पूजा की तिथि:5 नवंबर
दिन:शुक्रवार
गोवर्धन पूजा प्रातः काल मुहूर्त:सुबह 6:35 बजे से 8:47 बजे तक
गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त:दोपहर 3:21 बजे से शाम 5:33 बजे तक
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ:5 नवंबर सुबह 2:44 बजे से
प्रतिपदा तिथि समाप्त:5 नवंबर रात 11:14 बजे तक

गोवर्धन पूजा का महत्व Importance of Govardhan puja-

दीपावली पूरे पांच दिनों की होती है और यह त्योहार दीपावली के दूसरे दिन होता है। यानि “गोवर्धन पूजा” इस पर्व का बहुत महत्व है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि को अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है।

पौराणिक कथा के अनुसार इस पर्व की शुरुआत द्वापर युग में हुई थी। क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन और गायों की पूजा के लिए पका हुआ अनाज चढ़ाया था, इसलिए इस दिन का नाम अन्नकूट पड़ा, कई जगहों पर इस त्योहार को गोवर्धन पूजा के नाम से भी जाना जाता है। गोवर्धन के नाम से ही स्पष्ट हैं कि इस पर्व में गाय के गोबर और गाय का बहुत महत्व है।

कैसे मनाई जाती है गोवर्धन पूजा How is Govardhan puja celebrated-

इस दिन को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। देवी अन्नपूर्णा को प्रसन्न करने के लिए 56 प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं। जैसे की आंगन में रंगोली, पूजा स्थल पर रंगोली, पहाड़ के आकार में पके चावल।

लोग पवित्र गाय मां की पूजा करते हैं। जब गोवर्धन पर्वत को बचाया गया, तो लोगों को खुशी हुई कि उनके भोजन का स्रोत बच गया है। और एक श्रद्धांजलि के रूप में, लोग भोजन की देवी यानी मां अन्नपूर्णा को विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ चढ़ाते हैं।

इसके बाद वे श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी पूजा करते हैं। उसके बाद वह अपने रिश्तेदारों और मेहमानों के साथ बाल गोपाल को भोग लगाकर इस महाप्रसाद को भोजन के रूप में लेते हैं।

गोवर्धन पूजा की विधि Govardhan puja vidhi-

● घर के सभी लोग सबसे पहले स्नान करते हैं।
● छप्पन तरह-तरह के पकवानों से घर की रसोई भर जाती है।
● गाय के गोबर से गोवर्धन की प्रतिमा बनाई जाती है।
● गाय के गोबर से खेत, गाय, बेल, खेती के यंत्र और कुछ गोकुल वासियों का चित्रण किया जाता है।
● इसके उपरान्त आज के दिन भगवान कृष्ण, गाय माता और बैलों का विशेष पूजन होता है।
● इनकी आरती उतारी जाती है और मिठाई का भोग लगाते हैं।
● अंत में सभी में प्रसाद का वितरण किया जाता हैं।

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट को क्यों कहा जाता है?

गोवर्धन पूजा के लिए अन्नकूट बनाकर भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की आराधना की जाती है। इसी कारण इसे अन्नकूट पर्व भी कहते हैं। इतना ही नहीं इस दिन 56 या 108 तरह के व्यंजन बनाकर भगवान कृष्ण को अर्पित किए जाते हैं, इन व्यंजनों को ‘अन्नकूट’ कहा जाता है।

गोवर्धन पर गायों की पूजा का महत्व –

इस पर्व में मनुष्य का प्रकृति से सीधा संबंध दिखाई देता है। इस त्योहार की अपनी मान्यता और लोककथा है। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गाय की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय नदियों में गंगा के समान पवित्र होती है। गाय को देवी लक्ष्मी का रूप भी कहा जाता है। जिस प्रकार देवी लक्ष्मी सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।

उसी प्रकार गाय माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य के रूप में धन प्रदान करती है। उनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है। इस तरह गाय पूरी मानव जाति द्वारा पूजनीय और सम्माननीय है। गाय के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोवर्धन की पूजा की जाती है और गाय को उसका प्रतीक माना जाता है।

गोवर्धन पूजा की कथा Story of Govardhan puja-

इस पूजा की परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। एक बार देवराज इंद्र बहुत अहंकारी हो गए। अपने अहंकार को दूर करने के लिए, श्री कृष्ण ने विष्णु के अवतार में एक लीला बनाई। उस दिन सभी बृजवासी विभिन्न प्रकार के व्यंजन बना रहे थे और पूजा की तैयारी कर रहे थे।

उस समय श्रीकृष्ण बालक थे। उन्होंने अपनी माता यशोदा से पूछा- “माया, सभी बृजवासी किस पूजा की तैयारी कर रहे हैं?” यशोदा बोलीं- “हम सब देवराज इंद्र की अन्नकूट पूजा की तैयारी कर रहे हैं”

श्री कृष्ण ने पूछा कि हम सभी भगवान इंद्र की पूजा क्यों करते हैं? यशोदा ने उत्तर दिया कि देवराज इंद्र वर्षा के देवता हैं। उनकी कृपा से अच्छी वर्षा होती है और हमारी फसलें बढ़ती हैं। हम सब उनके प्रति आभार प्रकट करने के लिए अन्नकूट की पूजा करते हैं।

इससे हमें भोजन मिलता है और हमारी गायों को चारा भी मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि यदि हमारी गाय गोवर्धन पर्वत पर जाकर घास खाती है तो ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। इन्द्र कभी दर्शन नहीं देते।

इस तरह भगवान कृष्ण ने अपनी लीला बनाई और ब्रज के सभी लोगों ने इंद्र की नहीं बल्कि गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इससे देवराज इंद्र नाराज हो गए। वह अपने को अपमानित समझने लगे।

इंद्र देव श्री कृष्ण जी और ब्रज के निवासियों से नाराज हो गए और उन्होंने जमकर बारिश की। सभी लोग अपनी गायों और बछड़ों के साथ गोवर्धन पर्वत के नीचे आ गये।

तब शेषनाग ने मेढ़ बना कर भीषण वर्षा के जल को गोवर्धन पर्वत की तरफ आने से रोका। देवराज इंद्र क्रुद्ध होकर 7 दिनों तक मूसलाधार वर्षा करते रहे। परंतु गोवर्धन पर्वत और उसके नीचे शरण लिए हुए सभी बृजवासी पूरी तरह सुरक्षित रहे।

सब कुछ तबाह होने लगा तब श्री कृष्ण जी ने अपनी अंगुली से गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी देशवासियों को उनके क्रोध से बचाया और उसके बाद उसी समय बृजवासियों ने इंद्र देवता की पूजा छोड़ दी और गोवर्धन पूजा की प्रवृत्ति का पालन किया।

गोवर्धन पूजा में ध्यान देने योग्य बातें –

● गोवर्धन पूजा या अन्नकूट पूजा भूलकर भी बंद कमरे में नहीं करनी चाहिए।
● इस दिन गाय की पूजा करते समय अपने इष्ट देव और भगवान श्री कृष्ण की पूजा करना बिल्कुल
भी नहीं भूलना चाहिए।
● गोवर्धन पूजा के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करना चाहिए।
● गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए।
● गोवर्धन पूजा के दिन भी कोई पेड़ या पौधा नहीं काटना चाहिए।
● गोवर्धन पूजा परिवार के सभी सदस्यों द्वारा अलग-अलग नहीं की जानी चाहिए, बल्कि परिवार के
सभी सदस्यों को एक ही स्थान पर गोवर्धन पूजा करनी चाहिए।
● पूजा में परिवार के किसी भी सदस्य को काले या नीले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

दोस्तों हमारी आज की इस पोस्ट govardhan puja 2022 को पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आशा करता हूँ, आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। इस पोस्ट में हमने आपको गोवर्धन पूजा के विषय में बताया। अगर आप इस ब्लॉग पोस्ट से सम्बंधित कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो आप कमेंट करके दे सकते हैं।

नमस्कार दोस्तों आपको और आपके पुरे परिवार को Hindify.org की तरह से गोवर्धन पूजा की ढेरों बधाईयाँ।

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