3+ Diwali Essay in Hindi | दीवाली पर निबंध (2022)

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भारत में त्योहारों का बहुत महत्व है कोई भी त्योहार हो मन में उमंग और उत्साह भर देता है। दीवाली का त्योहार धन धान्य का त्योहार है इसमे माँ लक्ष्मी जी पूजा की जाती है। दीवाली का त्योहार स्वच्छता का प्रतीक है। हमारे विद्यालय में दीवाली का निबंध हमेशा से पढ़ाया जाता रहा हैइसलिए आज की पोस्ट में आपके लिए diwali essay in hindi निबंध लेकर आए हैं।

दीवाली पर निबंध Diwali Essay In Hindi-

diwali essay in hindi

दीपावली का त्यौहार भारतवर्ष मे बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है यह दीप का त्यौहार है इस दिन भगवान राम लंका पर विजय प्राप्त करके आयोध्य वापस लोटे थे तो अयोध्यावासियों ने उनका स्वागत तेल के दिये जलाकर किया था।

इसलिए सभी लोग अपने घरो को दियो से सजाते हैं दीवाली दिन सभी के घरो मे तरह -तरह के पकवान बनते है और सभी लोग एक दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते है और मिठाई और गिफ्ट्स देते है दीवाली के दिन शाम को लक्ष्मी पुजन होता है।

लक्ष्मी पुजन के बाद बच्चे पटाखे चलाते है इस दिन पूरी रात जगमग रहती है पटाखे त्यौहारो की भूमि के रूप मे जाने वाला महान देश है यहाँ प्रसिद्ध और सबसे मनाया जाने वाले त्यौहारो मे से एक दीपावली है।

दिवाली हिन्दुओ का एक महत्वपूर्ण त्यौहार हैए जो देशभर मे और साथ ही देश के बाहर हर साल मनाया जा रहा है यह रोशनी का त्यौहार है, जो की लक्ष्मी के घर आने और बुराई से सच्चाई की जीत का प्रतीक है।

इस दिन भगवान राम-सीता और लक्ष्मण १४ वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लोटे थे, तो इस खुशी में अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था, तभी से दीवाली मनाने की प्रथा आरंभ हुई यही कारण है की इसे प्रकाश का महोत्सव कहा जाता है

इस दिन भगवान राम ने लंका के राक्षस राजा रावण को मार डाला ताकि पृथ्वी को बुरी गतिविधियो से बचाया जा सके यह हिन्दू कैलेंडर द्वारा हर साल कार्तिक के महीने की अमावस्या पर मनाया जाता है दीवाली के दिन हर कोई खुश होता है और एक दूसरे को बधाई देता है।

लक्ष्मी जी का स्वागत करने के लिए लोग अपने घरो, कार्यालयों और दुकानों को साफ करते है और सफेदी भी करवाते है वे अपने घरो को सजाते है और दीपक जलाकर माता लक्ष्मी का स्वागत करते हैं दीवाली के त्यौहार मे पाँच दिन का जश्न है जिसे आनंद और प्र्सन्नता के साथ मनाया जाता है

1- पहला दिन धनतेरस के रूप मे जाना जाता
2- दूसरे दिन नारक चतुदर्शी या छोटी दीवाली
3- तीसरा दिन मुख्य दीपावली या लक्ष्मी पूजा

4- चौथे दिन गोबर्धन पूजा
5- पांचवे दिन भैया दौज

दीवाली समारोह के पाँच दिनो मे से प्रत्येक का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वाश है दीवाली समारोह के पाँच दिनो मे से प्रत्येक का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वाश है। दीवाली समारोह हमारे देश के कोने-कोने में मनाया जाता हैं।

दीपावली का त्यौहार लोगो के बीच अपनापन और एकता की भावना को उजागर करता है, भारत एक ऐसा देश हैं जो हज़ारो सालों से दीवाली को हर्ष और उल्लास के साथ मनाता आ रहा हैं और आगे भी हमेशा मनाता रहेगा, क्यूकी यह हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है।

जब तक रहे ये दुनिया, जब तक चले संसार
हर घर में मनाया जाए दीवाली का त्यौहार ,
दुख दर्द उदासी से हर दिल महरूम रहे
पग पग उजियालों में जीवन की ज्योति जले

दीपावली पर दूसरा निबंध हिंदी में Essay on diwali-

भारत को त्यौहारों का देश माना जाता है। भारत के प्रमुख त्यौहार होली, रक्षाबंधन, दशहरा और दीपावली हैं पर इन सभी त्यौहारों में दीपावली सबसे अधिक प्रमुख त्यौहार है।

दीपावली या दिवाली हर साल शरद ऋतु में मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। दिवाली कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर के महीने में आती है।

दीपावली दीपों का त्योहार है। आध्यात्मिक रूप से यह अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। यह त्यौहार दीपों का पर्व है। जब हम अज्ञान रूपी अंधकार को हटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश प्रज्ज्वलित करते हैं तो हमें एक असीम और आलौकिक आनन्द का अनुभव होता है।

दीपावली भी ज्ञान रूपी प्रकाश का प्रतीक है।इस दिन दीप जलाये जाते हैं इसलिए दीपावली का त्यौहार पांच दिन तक मनाया जाता है।

दशहरे के त्यौहार के बाद से ही दीपावली की तैयारियां की जाने लगती हैं। दशहरे के त्यौहार के बाद से ही दीपावली की तैयारियां की जाने लगती हैं।

इस पर्व के दिन लोग रात को दीपक जलाकर प्रकाश करतें है, दीपकों की रोस्नी से ऐसा लगता हैं मानो की रात दिन में बदल गई हो, यह नज़ारा बहुत ही मनोहर होता है, यह नज़ारा केवन दीवाली में ही देखने को मिलता है।

दीपावली का अर्थ-

दीपावली शब्द संस्कृत से लिया गया है। दीपावली दो शब्दों दीप और अवली से मिलकर बना है जिसका अर्थ है दीपों से सजा हुआ। दीपावली को रोशनी का त्यौहार और दीपोत्सव भी कहा जाता है क्यूकी इस दिन असंख्य दीपक अपनी रोशनी से जगमगाते हुऐ अमावस्या की रात को दिन में बदल देते हैं।

दीपावली का यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, इस पर्व को शीत ऋतू के आगमन के रूप में भी मनाया जाता है।

दीपावली पर्व का महत्व-

भारत में दीवाली को बहुत ही सुंदर और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है, क्यूकी इस दिन भगवान राम ने लंकापति रावन को मारकर हमे बुराई पर अच्छी की जीत का संदेश दिया था

और जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे, तो अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में लाखों दीपक जलाए, जिससे अमावस्या की काली रात दिल में बदल गई।

उसी दिन की पावन स्मृति में यह दिन बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था, इसीलिए दीपावली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

दीपावली की तैयारियां-

दिवाली की तैयारी लोग दशहरे से ही शुरू कर देते हैं। दिवाली से पहले सभी लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और घर को रंग-रोगन करवाते हैं।दीपावली के अवसर पर लोग अपने लिए नए कपड़े, मोमबत्तियां, खिलौने, पटाखे, मिठाईयां, रंगोली बनाने के लिए रंग और घरों को सजाने के लिए बहुत सा सामान खरीदते हैं।

दिवाली के दिन पहनने के लिए नए कपड़े बनाए जाते हैं, मिठाइयां बनाई जाती हैं, घरों को सजाने के लिए बिजली की बत्तियों का प्रयोग किया जाता है।

दिवाली भारत में खुशियों और मनोरंजन का सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन बच्चों से लेकर बूढ़ों तक खुशी की लहर दौड़ जाती है और पटाखों की आवाज से पूरा आसमान गूंज उठता है।

चारों तरफ होगा खुशियो का नज़ारा
सजेगा हर आँगन दीपक का उजाला ।

डलेगी रंगो की रागोली हर एक द्वार
ऐसा है हमारा दीपावली का त्यौहा

महात्मा गाँधी पर निबन्ध
कोविड-19 पर निबन्ध
दीपावली शुभकामना संदेश

दीपावली का वर्णन-

दीपावली त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। दीपावली का त्यौहार पांच दिनों तक चलने वाला सबसे बड़ा त्यौहार होता है ।दिवाली से तीन दिन पहले धनतेरस आता है।

दीपावली के दिन लोग अपने घर के पुराने बर्तनों को बेचतें हैं, नयी-नयी वस्तुएँ खरीदतें हैं और घर की पुताई करतें है, धनतेरस के दिन व्यापारी अपने नये बहीखाते बनाते हैं, नरक चौदस के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना अच्छा माना जाता है, अमावस्या के दिन मा लक्ष्मीजी की पूजा की जाती है।

पूजा में खील-बताशे का प्रसाद चढाया जाता है। नए कपड़े पहने जाते हैं। असंख्य दीपों की रंग-बिरंगी रोशनियाँ मन को मोह लेती हैं।दुकानों, बाजारों और घरों की साज-सज्जा दर्शनीय रहती है।

अगले दिन आपसी मुलाकात का दिन है। एक दूसरे को गले लगाकर दीपावली की बधाई दीजाती है। गृहिणियां अतिथियों का स्वागत करती हैं। बड़े-छोटे, अमीर-गरीब का भेद भुलाकर लोग मिलजुलकर इस पर्व को मनाते हैं।

स्वच्छता का प्रतीक-

दीपावली जहां आंतरिक ज्ञान का प्रतीक है, वहीं बाहरी स्वच्छता का भी प्रतीक है। मच्छर, खटमल, पिस्सू आदि धीरे-धीरे घरों में अपना घर बना लेते हैं। मकड़ी के जाले लग जाते हैं, इसलिए दिवाली से कई दिन पहले घरों की सफाई, पेंटिंग, सफेदी और सफेदी शुरू हो जाती है। सफाई से पूरा घर साफ हो जाता है।

उपसंहार-

दीपावली हमारा धार्मिक त्यौहार है। दीपावली का पर्व सभी पर्वों में एक विशिष्ट स्थान रखता है। हमें अपने पर्वों की परम्पराओं को हर स्थिति में सुरक्षित रखना चाहिए। परम्पराएँ हमें उस पर्व के आदिकाल में पहुंचा देती हैं जहाँ पर हमें अपनी आदिकालीन संस्कृति का ज्ञान होता है।

आज हम अपने त्यौहारों को भी आधुनिक सभ्यता का रंग देकर मनाते हैं लेकिन हमें उसके आदि स्वरूप को बिगाड़ना नहीं चाहिए। इसे हमेशा यथोचित रीति से मनाना चाहिए।

जुआ और शराब का सेवन बहुत ही बुरा होता है हमें सदैव इससे बचना चाहिए। आतिशबाजी पर अधिक व्यय नहीं करना चाहिए। हम सभी का कर्तव्य होता है कि हम अपने पर्वों की पवित्रता को बनाये रखें।

दीपावली पर तीसरा निबंध Diwali essay in hindi for child-

यही है रौशनी का अभिवादन, अँधेरे को दूर भगाओ
पहले सब पर प्यार बरसाओ, फिर खुशियों का दीप जलाओ।

essay on diwali 1

दीपावली पूरे भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है। दीपों का विशेष पर्व होने के कारण इसे दीपावली या दिवाली का नाम दिया गया है।दिवाली का दिन भारतवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है।

भारत में हर धर्म के लोग रहते हैं और भारतवासी सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। दिवाली का त्यौहार एक तरह से हिन्दुओं का विशेष त्यौहार है। परंतु भारत में प्रायः सभी धर्मो के लोगों द्वारा दीपावली का त्योहार मनाया जाता हैयह त्यौहार 5 दिनों तक चलता है। इसकी ख़ुशी हर भारतीय को होती है।

भारत में दिवाली-

भारत विभिन्न संस्कृतियों, विचारों, भाषाओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों और विभिन्न धर्मों वाला देश है। यहां सभी धर्मों के त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। हिन्दू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है।

यह हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है और ये हर हिन्दू द्वारा मनाया जाता है। आज के समय में दिवाली का त्यौहार सभी धर्मों के लोग मनाने लग गये हैं। सभी धर्मों के लोगों ने इसका महत्व समझना शुरू कर दिया है।

विभिन्न धर्मों में दिवाली का महत्व-

हिंदू धर्म- हिंदू धर्म के लोग इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मानते हैं। दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन पूर्ण अंधकार रहता है। इसी दिन भगवान राम रावण का वध करके और अपना 14 वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे।

इस दिन अयोध्यावासियों ने राम के आगमन की खुशी में पूरे अयोध्या को अमावस्या के अंधकार से मुक्त कराया था। भगवान राम के स्वागत के लिए पूरा अयोध्या शहर रोशनी से जगमगा उठा। उस दिन भगवान राम बुराई पर अच्छाई जीतकर अयोध्या लौट रहे थे।

जैन धर्म- जैन धर्म के लोग इस दिन दिवाली मनाते हैं क्योंकि भगवान महावीर को इसी दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी और किसी संयोग से उनके शिष्य गौतम को भी इसी दिन ज्ञान प्राप्त हुआ था।

सिख धर्म- सिख धर्म के लोग दिवाली इस लिए मानते हैं क्योंकि इसी दिन ही 1577 में पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर का शिलन्यास हुआ था और इसी दिन ही सिखों के छठे गुरु गुरू हरगोबिन्द साहब जी को जेल से रिहा किया गया था।

दिवाली कैसे मनाते हैं-

दिवाली का नाम सुनते ही सबके चेहरे पर एक अलग ही खुशी है। इस दिन सभी लोग अपने घरों, दुकानों आदि की साफ-सफाई करते हैं। उन्हें नए रंग से रंगते हैं। इस दिन घरों को दीयों से सजाया जाता है और यह त्योहार 5 दिनों तक चलता है।

लोग अपने घरों में नई चीजें खरीदते हैं और कई अन्य सामान, कपड़े, वाहन और जरूरी चीजें खरीदते हैं। इस दिन को घर में लक्ष्मी के आने का संकेत माना जाता है और इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। जाती है।

घरों में मिठाइयां बनाई जाती हैं इस दिन मां लक्ष्मी के साथ गणेश जी की भी पूजा की जाती है।

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दिवाली पर चौथा निबंध Short essay on diwali in hindi-

दीपावली का पर्व सुख-समृद्धि का पर्व है। यह हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार है। दिवाली का त्योहार भारत के हर राज्य में मनाया जाता है। इस दिन काली अमावस्या की रात होते हुए भी पूरा भारत रोशनी से जगमगाता है।

दीपावली का त्योहार असत्य पर सत्य की जीत और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। यह त्यौहार हमारे देश में ही नहीं विदेशों में भी मनाया जाता है, इससे इसकी प्रमुखता का पता लगाया जा सकता है। यह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि इसका सामाजिक, आध्यात्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व भी है।

दिवाली त्यौहार का इतिहास-

दिवाली का त्योहार भारत में प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। अलग-अलग राज्यों के लोग इस त्योहार के इतिहास को अलग-अलग मानते हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना ​​है कि जब भगवान राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, तो अयोध्या के लोगों ने उनके स्वागत के लिए घी के दीपक जलाए थे।

अयोध्या की हर सड़क को सुनहरे फूलों से सजाया गया था। जिस दिन भगवान राम अयोध्या लौटे, उस दिन काली अमावस्या की रात थी, जिसके कारण वहां कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए अयोध्या के लोगों ने वहां दीपक जलाए। इस दिन को अंधकार पर प्रकाश की जीत भी माना जाता है।

जैन धर्म के लोग दीपावली का त्योहार इसलिए मनाते हैं क्योंकि इस दिन चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी और संयोग से इसी दिन उनके शिष्य गौतम को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

सिख धर्म के लोग भी इस त्योहार को बहुत धूमधाम से मनाते हैं, वे इस त्योहार को मनाते हैं क्योंकि इस दिन 1577 में अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की आधारशिला रखी गई थी और साथ ही सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह जी को भी जेल से रिहा किया गया था।

दिवाली कैसे मनाते हैं?

भारत में दिवाली के त्योहार की तैयारियां एक महीने पहले से ही शुरू कर दी जाती हैं क्योंकि भारत में ज्यादातर हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों का वास है।

इसलिए यह त्योहार उनका सबसे बड़ा त्योहार है। लोग इस त्योहार की तैयारियों को लेकर इतने उत्सुक हैं कि वे एक महीने पहले से ही अपने घरों और प्रतिष्ठानों की सफाई शुरू कर देते हैं।

हिंदू धर्म के लोगों का मानना ​​है कि अगर घर में साफ-सफाई रहेगी तो उनके घर में मां लक्ष्मी का आगमन होगा और साथ में सुख-समृद्धि भी आएगी। आजकल लोग दिवाली से कुछ दिन पहले अपने घरों को रंग-रोगन करवाते हैं।

साथ ही अपने घर और प्रतिष्ठान को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाते हैं। इस त्योहार से पहले बाजारों में एक अलग ही रोशनी आती है, बाजार भीड़ से खचाखच भरे रहते हैं, लोग हर जगह खरीदारी करते नजर आते हैं।

दीपावली का यह पर्व 5 दिनों तक चलता है, जिसका पहला दिन धनतेरस होता है
लोग धनतेरस के दिन खरीदारी करना पसंद करते हैं, लोग अपने घरों में कुछ बर्तन जरूर ले जाते हैं, साथी लोग भी इस दिन सोने और चांदी के आभूषण खरीदना पसंद करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीदारी करने से घर में सुख समृद्धि आती है।

“दीपावली का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है”
क्योंकि इसी दिन भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। इस दिन को कुछ लोग छोटी दिवाली के रूप में भी मनाते हैं। इस दिन घर के बाहर 5 दीपक जलाए जाते हैं।

” तीसरा दिन दिवाली त्योहार का मुख्य दिन होता है “
दिवाली के दिन शाम को सभी लोग मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस दिन घर में दीया जलाकर रोशनी की जाती है। भारत में इस दिन रात के समय सबसे अधिक प्रकाश होता है।

दिवाली के चौथे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है “
क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र के क्रोध के कारण हुई मूसलाधार बारिश से लोगों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी एक अंगुली पर उठा लिया था। इस दिन महिलाएं घर के बाहर गाय का गोबर रखकर पारंपरिक पूजा करती हैं।

दीपावली पर्व का अंतिम दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है “
इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधती है और साथ ही तिलक लगाकर मिठाई खिलाती है और बदले में भाई उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं और उन्हें अच्छे उपहार भी देते हैं।

दीपावली का महत्व-

दिवाली त्योहार के पीछे सबसे पुराना आर्थिक महत्व इस तथ्य से जुड़ा है कि भारत में लगभग सभी फसलें मानसून पर निर्भर करती हैं, इसलिए गर्मियों की फसल इस त्योहार से कुछ दिन पहले पक कर तैयार हो जाती है, तो किसान इस फसल को बेचकर आय अर्जित करता है। इस दिन कई ऐतिहासिक घटनाएं घटी हैं, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।

इस दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काट कर अयोध्या लौटे थे उन्हें इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कहा गया था। इस दिन समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, जिन्हें धन और सुख-समृद्धि की देवी भी कहा जाता है। दिवाली के दिन, सिखों के छठे गुरु, हरगोबिंद सिंह जी को जेल से रिहा किया गया था। इस दिन महावीर स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।

उपसंहार-

यह पर्व हमें सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है, यह पर्व हमें अन्धकार से कभी नहीं डरना सिखाता है क्योंकि एक छोटे से दीये की लौ भी अँधेरे को प्रकाश में बदल सकती है। इसलिए जीवन में समय हमेशा आशावादी होना चाहिए और जीवन में हमेशा खुश रहना चाहिए।

सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक है दीपावली का पर्व, यह पर्व सभी के जीवन में खुशियां लेकर आता है, इस पर्व के कारण आज भी लोगों में सामाजिक एकता बनी हुई है। .

(Source: Beautiful Life Forever)

दोस्तों ! जैसा की आपने पढ़ा की दीवाली अमन और शांति का त्योहार है तो हम सब का यह कर्तव्य बनता है की हम इस त्योहार की गरिमा को बनाए रखते हुए इसका आनंद लें और माता लक्ष्मी की पूजा पूरे हर्षोलास से करें दोस्तों आपको हमारा यह diwali essay in hindi कैसा लगा हमे ज़रूर बताइगा

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