Diwali 2022 में कब है ? शुभ मुहूर्त व लक्ष्मी पूजा विधि

Diwali 2022, दिवाली कब की है, जानें डेट और दिवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, दीवाली कब मनाई जाती है।

आज के इस लेख में दीवाली के बारे में जानकारी लेकर आए हैंआज की इस पोस्ट में हम आपको दिवाली से सम्बंधित पूरी जानकरी देने वाले हैं। अक्सर प्राइमरी से लेकर बोर्ड कक्षाओं तक दीवाली पर निबंध लिखने को बोला जाता हैऐसे में हमारा लेख आपकी मदद कर सकता है, तो चलिए शुरू करते है दीवाली पर लेख।

diwali 2022
Diwali 2021

दीवाली का धार्मिक महत्व Diwali 2022-

दिवाली से जुडी कुछ महत्वपूर्ण कहानियां हैं जो इस पर्व के महत्व को बताती है। हिंदू धर्म के लोग इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मानते हैं।

ऐसा माना जाता है कि दीवाली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के बाद लौटे थे। अयोध्यावासियों ने श्रीराम के स्वागत में घी के दीपक जलाए। कार्तिक मास की तीव्र काली अमावस्या की वह रात दीयों के प्रकाश से जगमगा उठी।

रौशनी का यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार पुरे पांच दिनों तक चलता है और चारों ओर खुशियों का माहौल होता है। आज के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

दीपावली का यही अर्थ है – “अस्तो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय”। अर्थात (हे भगवान!) मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। दीपावली स्वच्छता और प्रकाश का पर्व है।

दीवाली का शुभ मुहूर्त Diwali 2022 timing –

पंचांग के अनुसार यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। वर्ष 2022 में कार्तिक अमावस्या की तिथि 04 नवंबर गुरुवार को है।

दिवाली24 अक्टूबर 2022, सोमवार
दिवाली पूजन शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर, सायं 07:16 PM से 08:23 PM तक
दिवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्तशाम 06 बजकर 09 मिनट से रात्रि 08 बजकर 20 मिनट
अवधि1 घंटे 55 मिनट

दीवाली कब मनाई जाती है When Is Diwali Celebrated –

दिवाली का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। दीपोत्सव का यह पर्व 5 दिनों (धनतेरस, नरक चतुर्दशी, अम्मास्या, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, भाई दूज) का होता है। तो यह एक धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होता है।

इसमें तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा की जाती है। दिवाली त्योहार की तारीख हिंदू कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाती है। लेकिन यह त्योहार आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने में पड़ता है।

दीपावली शुभकामना संदेश
दि‍वाली पर कविता
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दीवाली पर्व को कैसे मनाया जाता है How is Diwali festival celebrated –

दिवाली की तैयारी कई दिनों से शुरू हो जाती है, लक्ष्मी साफ-सुथरी जगह पर रहती हैं, इसलिए लोग अपने पूरे घर की खास सफाई करवाते हैं।
● घरों को विभिन्न तरीकों से रंगा और सजाया जाता है।
● पूरे घर को बिजली की खूबसूरत लड़िओ और फूलों से सजाया जाता है।
● घरों के मुख्यद्वार पर रंगोली सजाई जाती है।
● दिवाली में व्यंजनों का खास महत्व होता है, इस दिन मीठे और नमकीन व्यंजन बनाए जाते हैं।
● दीपावली में हर व्यक्ति नए कपड़े पहनकर पूजा करता है।
● दोस्तों और रिश्तेदारों को उपहार से दिए जाते हैं।
● घर और अन्य जगहों पर काम करने वाले कर्मचारियों को उपहार भी दिए जाते हैं।
● दिवाली के बाद सभी अपने खास रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाते हैं,
● दिवाली के दिन बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है और छोटों को आशीर्वाद दिया जाता है।

दीपावली पूजन विधि व सामग्री –

दीपावली के दिन प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह व्यवसाय से हो, सेवा कार्य से हो या नौकरी से, प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यापार स्थान और घर पर देवी लक्ष्मी और गणेश जी की विधिवत पूजा करता है,

दीपावली पूजन सामग्री –

● महालक्ष्मी पूजन में रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर,
● अगरबत्तियां, दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़,
● धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील,
● बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत, श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला,
● शंख, लक्ष्मी व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, मिष्ठान्न,
● दीपक इत्यादि वस्तुओं को पूजन के समय रखना चाहिए।

दीपावली पूजन विधि –

● सबसे पहले, पवित्रीकरण करें। अपने हाथ में पूजा के बर्तन से थोड़ा जल लें और अब इसे मूर्तियों पर छिड़कें।
● मंत्र और जल के छिड़काव से अपने और अपने आसन को पवित्र करें। शाम को लक्ष्मी पूजा की तैयारी शुरू कर दें।
● देवी लक्ष्मी और भगवान गणेशजी की मूर्तियों को एक चौकी पर इस तरह रखें कि लक्ष्मी जी गणेश जी के दाईंओर हो। और उनका मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए।
● अब उनके सामने बैठकर चावल पर कलश स्थापित करें।
● इस कलश पर एक नारियल को लाल कपड़े में इस प्रकार लपेटें कि उसका केवल ऊपरी भाग ही दिखाई दे।
● अब दो बड़े दीये लें और एक में घी भरें और दूसरे में तेल रखें एक को मूर्तियों के चरणों में और दूसरे को चौकी के दाहिनी ओर रखें।
● इसके अतिरिक्त गणेशजी के पास भी एक छोटा सा दीपक रखें।
● शुभ मुहूर्त में जल, मौली, अबीर, चंदन, गुलाल, चावल, धूप, दीप, गुड़ सबसे पहले फूल, धनी, नैवेद्य आदि लेकर अभिषेक करें।
● फिर सभी दीपक जलाएं (यह शुभ माना जाता है) कम से कम 26 दीये जलाने के लिए) और उन्हें सलाम करें। उन पर चावल छोड़ दें।
● सबसे पहले पुरुष और बाद में महिलाएं गणेशजी, लक्ष्मीजी और अन्य देवी-देवताओं की पूजा करती हैं।
● श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त और पुरुष सूक्त का पाठ करती हैं और आरती करती हैं।
● हिसाब-किताब की पूजा करके नया बहिखाता लिखना शुरू करें।
● दिये जलाकर घर के कमरों में, तिजोरी के पास, आंगन, दीर्घा आदि में रख दें ताकि कहीं भी अँधेरा न हो।
● पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में रखें।
● मिठाइयां, पकवान, खीर आदि का भोग लगाकर सबको प्रसाद बांटें।
● घर के सभी सदस्य अपने से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें और उल्लास व प्रेमपूर्वक इस पर्व को संपन्न करें।
● मां लक्ष्मी की कृपा से दुनिया की खुशी प्राप्त हो सकती है. इसके लिए सभी को मां लक्ष्मी की पूजा, व्रत व आरती विधि-विधान से करनी चाहिए।

दीवाली पर्व के लाभ Benefits of Diwali festival –

● दिवाली के साथ हर तरह के कारोबार में उछाल आता है क्योंकि इस त्योहार में लोग घर की साज-सज्जा, कपड़े, गहने, खाने-पीने की हर चीज पर खर्च करते हैं।
● दिवाली का त्योहार पूरा परिवार साथ मिलके मनाता हैं इससे आपसी प्यार बढ़ता है, जिससे रिश्तों में मधुरता आती है।
● दीवाली के त्योहार में स्वच्छता का बहुत महत्व है, जिससे घर और आसपास का वातावरण स्वच्छ रहता है, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।
● इस पर्व के बहाने साल में एक बार पूरे घर की साफ-सफाई कर उन्हें एक नया रंग दिया जाता है। अगर यह त्योहार न हो तो इसका होना मुश्किल है।
दिवाली का त्योहार छोटा काम करने वालों के लिए भी खुशियां लेकर आता है।
कुटीर उद्योग जैसे मिट्टी के दिए, हाथ से बने साज़ सज्जा के सामान को ज्यादा खरीदा जाता है। जिससे वे अपना जीवन यापन करते हैं।

दीपावली के पाँच दिन के त्योहार Five days festivals of Diwali –

हम दिवाली की तैयारी एक महीने पहले से ही शुरू कर देते हैं, इसके लिए हम पूरे घर को साफ करते हैं और घर को रंग देते हैं, ताकि घर सुंदर और साफ-सुथरा दिखे। दीपावली पर सभी घरों की महिलाएँ घरों के मुख्यद्वार पर रंगोली बनाती हैं, ऐसा कहा जाता है की देवी महालक्ष्मी को रंगोली पसंद है और वह रंगोली देख कर आकर्षित होती है

यह पर्व पांच दिनों (धनतेरस, नरक चतुर्दशी, अमावस्या, कार्तिक सुधा पदमी, यम द्वितीया या भाई दूज) का होता है। दीवाली त्योहार के पाँचों दिनों का अपना अलग महत्व है आइए आपको बताते प्रत्येक दिन को कैसे मनाया जाता है।

धनतेरस (Dhanteras) –

कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस कहा जाता है। इस दिन घर के दरवाजे पर तेरह दीपक जलाए जाते हैं। यह त्यौहार दीपावली के आगमन की पूर्व सूचना देता है। इस दिन नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है।

शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। ऐसा माना जाता है कि भगवान धन्वंतरि विष्णु के अवतार हैं। विश्व में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए भगवान विष्णु ने धन्वंतरि का अवतार लिया।

नरक चतुर्दशी –

नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है। क्योंकि दीपावली के एक दिन पहले दीयों के प्रकाश से रात का अँधेरा प्रकाश की किरण से उसी प्रकार दूर हो जाता है जैसे दीपावली की रात में होता है। इस रात में दीया जलाने की प्रथा के संबंध में कई किंवदंतियां और लोक मान्यताएं हैं।

(एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने इस दिन अत्याचारी और शातिर नरकासुर का वध किया था और नरकासुर के कारागार से 16,100 लड़कियों को मुक्त करा के उन्हें सम्मान दिया था। इस अवसर पर दीपों का जुलूस सजाया जाता है) यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है।

मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। शाम को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है।

दीपावली (Deepawali) –

दीपावली त्योहार के पाँचों दीनो में से तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है इस दिन दीवाली का त्योहार मनाया जाता है दिवाली के दिन शाम को सभी लोग मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस दिन घर में दीया जलाकर रोशनी की जाती है।

भारत में इस दिन रात के समय सबसे अधिक प्रकाश होता है। दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन को अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन को बहुत ही खूबसूरत और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। जब भगवान श्री राम लंकापति रावण का वध कर और चौदह वर्ष का वनवास काट कर अयोध्या लौटे थे।

गोवेर्धन पूजा (Goverdhan Puja) –

इस दिन गोबर, चावल, फूल, जल, मौली, दही और तेल से गोवर्धन की आकृति बनाकर कृष्ण के सामने गाय और चरवाहे उनके पास बैठ जाते हैं। दीप जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है।

भैया दूज (Bhai Dooj) –

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व यमद्वितीय के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व पर बहनें रोली चंदन की लाठी लगाकर अपने भाइयों के उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। हर त्योहार की तरह भैया दूज का भी मनाने का अपना तरीका होता है।

इस दिन बहनें सुबह स्नान कर भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा कर व्रत रखती हैं और अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं। इसके बाद बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारकर व्रत रखती हैं।

दीवाली पर्व की हानि –

● लोग दिखावे में आकर अति से ज़्यादा पटाखे जलते हैं जीने प्रदूषण बढ़ जाता है।
● दीवाली के नाम पर कुछ लोग जुआ खेलते हैं जो सही नही है।
● ज्यादा मिठाइयां और व्यंजन सेहत को खराब करते हैं।
● रोशनी की सजावट के कारण विद्युत ऊर्जा बर्बाद होती है।
● आजकल लोग दिखावे के चक्कर में लोग फिजूलखर्ची करते हैं।

निष्कर्ष Conclusion

दोस्तों आप सभी को दीवाली की शुभकामनाएँ आपको हमारी ये पोस्ट diwali 2022 कैसी लगी, हमे कॉमेंट करके ज़रूर बताएं दिवाली हमारा धार्मिक त्योहार है। सभी त्योहारों में दीपावली का विशेष स्थान है। हमें अपने त्योहारों की परंपराओं को हर हाल में सहेज कर रखना चाहिए। परंपराएं हमें उस त्योहार की शुरुआत में ले जाती हैं, जहां हमें अपनी आदिम संस्कृति के बारे में पता चलता है।

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