4 Direction Name in Hindi – दिशाओं के नाम हिंदी में (2022)

Direction Name in Hindi : दोस्तों आज की पोस्ट बहुत की अच्छी साबित होने वाली है। आज यहाँ आप पढ़ेंगे दिशाओं के नाम और उनका महत्व। दिशाए मुख्यतः चार होती है। जो की सभी को पता है। लेकिन चार दिशाओं के अलावा और भी कई दिशाए होती हैं। जिनके बारे में हमने इस पोस्ट में लिखा है। आप इन्हे पढ़िए और आगे भी शेयर कीजिए। दोस्तों कई बार एग्जाम में दिशाओं के ऊपर भी प्रश्न पूछे जाते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं।

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दिशाओं के नाम हिंदी में Direction Name in Hindi –

हम सभी ये जानते हैं की पृथ्वी पर चार दिशाएं पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण हैं जो सर्वमान्य हैं। यदि हम प्रातःकाल सूर्य की ओर मुख करके खड़े हों तो हमारे सामने की दिशा पूर्व, पश्चिम पीछे, बायें हाथ से उत्तर और दायीं ओर दक्षिण होगी।

इनके अलावा, इन दिशाओं से 45 डिग्री के कोण पर चार दिशाएँ स्थित हैं और ऊर्ध्वाधर (ऊपर) और अधो (नीचे) सहित कुल दस दिशाएँ हैं। प्राचीन काल में लोग ध्रुव तारे को दिशा के ज्ञान का आधार मानते थे, जो वैज्ञानिक रूप से भी सही प्रतीत होता है।

ध्रुव तारा उत्तर की ओर है यह स्थिर है, विचलित नहीं होता है। आज के समय में कम्पास का उपयोग किसी भी दिशा को खोजने के लिए किया जाता है। कम्पास पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का अनुसरण करता है। यात्री उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव की दिशा का अनुमान लगाकर यात्रा करते हैं।

S.noDirections in english Directions in hindi
1-Eastपूरब,
2-Westपश्चिम
3-Northउत्तर
4-Southदक्षिण
5-North-Eastउत्तर -पूर्व
6-South-Eastदक्षिण- पूर्व
7-North-Westउत्तर- पश्चिम
8-South-Westदक्षिण -पश्चिम
9-Zenithईशान
10-Nadirआग्नेय

दिशाओं का महत्व Importance of direction –

आइए आपको बताते हैं दिशाओं के बारे में कि ये कितनी प्रकार की होती हैं एवं इनमे से प्रत्येक का महत्व क्या है ? दिशायें मुख्यत; चार प्रकार की होती हैं-

▪ पूर्व
▪ पश्चिम
▪ उत्तर
▪ दक्षिण

पूर्व दिशा East –

दिशाओं में सबसे पहला नाम पूर्व दिशा का नाम आता है। यह दिशा सभी तरह से शुभ मानी गई है। हम सभी यह जानते हैं की सूर्य भी पूर्व दिशा से उगता है पूर्व दिशा को अंग्रेजी में ‘East’ कहते है। भगवान इंद्र को पूर्व दिशा का दिग्पाल माना जाता है।

पश्चिम दिशा West –

पूर्व के बाद पश्चिम दिशा का नाम आता है। यह पूर्व के विपरीत वाली दिशा है सूर्य दिन ढलने के बाद पश्चिम मैं छिपता है। हिंदू धर्म में वरुण देव को पश्चिम दिशा का ईष्ट माना जाता है।

उत्तर दिशा North –

दिशाओं में तीसरे स्थान पर उत्तर दिशा का नाम आता है। पृथ्वी की उत्तर दिशा में स्थित नार्थ पोल इसी दिशा को बताता है। धन के देवता कुबेर को उत्तर दिशा का ईष्ट माना जाता है।

दक्षिण दिशा South –

दिशाओं में चौथे स्थान पर दक्षिण दिशा का नाम आता है। यह दिशा पृथ्वी के दक्षिण छोर को बताती है जहाँ पृथ्वी का दक्षिणी धुर्व स्थित है। बर्फीला महाद्वीप अंटार्कटिका भी दक्षिणी ध्रुव पर ही मौजूद है।

हिन्दू ज्योतिष शास्त्र में दक्षिण दिशा का ईष्ट यम देव को माना जाता है। कोई भी शुभ कार्य करने के लिए यह दिशा अशुभ मानी जाती है।

वास्तु के अनुसार दिशाओं का महत्व –

वास्तु शास्त्र के अनुसार, चार मुख्य दिशाएँ हैं- पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर। इनमे दो दिशाओं के बीच के स्थान को कोण कहते हैं। ऐसे में चार कोण भी होते हैं, जिनमें दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व दिशा में मौजूद होते हैं।

वहीं आकाश और पाताल की दो दिशाओं को भी कहा गया है। ऐसे में वास्तु शास्त्र में कुल मिलाकर 10 दिशाएं हैं।

पूर्व दिशा –

पूर्व दिशा को सकारात्मक ऊर्जा का भंडार माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे ईश्वर की दिशा माना जाता है। पूर्व दिशा भगवान की पूजा करने, या शिक्षा से संबंधित कार्य करने के लिए बहुत अच्छा है।

घर का निर्माण करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भगवान का मंदिर पूर्व दिशा या ईशान कोण में हो। बच्चों का स्टडी रूम भी इसी दिशा में रखना चाहिए। इससे बच्चों का शैक्षिक विकास होता है और परिवार पर माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है।

पश्चिम दिशा –

वास्तु के अनुसार पश्चिममुखी स्थान उस कार्य के लिए सर्वोत्तम होता है जहां आप सुपर मार्केट या रसायनिक सामान आदि से संबंधित भवन का निर्माण कर रहे हों। ऐसी जगह पर सुपर मार्केट के कार्य में विकास होता है। नुकसान की कम संभावना रहती है।

उत्तर दिशा –

वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना गया है। इस दिशा में दुकान या ऐसा कोई भी प्रतिष्ठान खोलना बेहतर है जहां क्रय-विक्रय से संबंधित कार्य किया जाता हो। इस दिशा में तिजोरी का दरवाजा खोलना बहुत शुभ होता है।

दक्षिण दिशा –

भारी कारखाने, आग और बिजली से संबंधित किसी भी कार्य को शुरू करने के लिए इस दिशा को बहुत शुभ माना जाता है। क्योंकि वास्तु के अनुसार घर की दक्षिण दिशा में भारी सामान आदि रखना सबसे अच्छा माना जाता है।

उत्तर-पूर्व दिशा –

वास्तु शास्त्र में इस दिशा को उत्तर-पूर्व कोने के रूप में जाना जाता है। हिन्दी में नार्थ ईस्ट को “ईशान कोण” कहा जाता है। ईशान कोण के दिग्पाल भगवान शिव को माना जाता है। इस दिशा में अत्यंत पवित्र माने जाने वाला पूजा स्थल वास्तु है। इसके दोष के कारण साहस में कमी, अस्त-व्यस्त जीवन, कलह और बुद्धि में भ्रम होने की संभावना रहती है।

उत्तर-पश्चिम दिशा –

इस दिशा को हिन्दी में “वायव्य कोण” कहते हैं। यह दिशा वायु तत्व और पवन देवता से जुड़ी है। इस दिशा के बंद होने या दूषित होने से शत्रु भय, रोग, शारीरिक शक्ति में कमी और आक्रामक व्यवहार देखने को मिलता है। उत्तर-पश्चिम दिशा हमें दीर्घायु, स्वास्थ्य और शक्ति प्रदान करती है।

यह दिशा व्यवहार में बदलाव का द्योतक है। उत्तर-पश्चिम दिशा खराब हो तो मित्र शत्रु बन जाते हैं।

दक्षिण-पूर्व दिशा –

यह दिशा, जिसे “अग्नेय कोण” कहा जाता है, अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। इस दिशा के स्वामी अग्नि देव हैं। इस दिशा के दूषित होने या बंद होने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है और आग लगने से जान-माल के नुकसान का भी भय रहता है। जैसा कि नाम से पता चलता है, आग्नेय कोण दक्षिण और पूर्व दिशा से बनता है।

अग्निदेव किसी भी घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में निवास करते हैं। इसीलिए वास्तु शास्त्र में इस कोने को अग्नेय कोण कहा जाता है। इस दिशा में बना खाना सेहत के लिए अच्छा होता है।

दक्षिण-पश्चिम दिशा-

पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाली इस दिशा को नैऋत्य कोण भी कहा जाता है। यह दिशा दक्षिण और पश्चिम दिशा के कोणों से बनती है। इसके दूषित होने से शत्रु भय, आकस्मिक दुर्घटना और चरित्र पर कलंक जैसी समस्याएं आती हैं।

दक्षिण-पश्चिम दिशा में कोई खुलापन नहीं होना चाहिए अर्थात खिड़कियां, दरवाजे बिल्कुल भी नहीं होने चाहिए। घर के मालिक का कमरा इस दिशा में होना चाहिए। इसके अलावा आप दक्षिण-पश्चिम दिशा में कैश काउंटर, मशीन आदि रख सकते हैं।

निष्कर्ष Conclusion –

दोस्तों इस जानकारीपूर्ण पोस्ट direction name in hindi को पढ़ने के धन्यवाद उम्मीद करते हैं आज की ये पोस्ट आपको जरूर पसंद आयी होगी। अगर पोस्ट पसंद आई हो तो इसे सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करे। साथ में कमेंट करके जरूर बताए आपको ये पोस्ट कैसी लगी।

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