गाय पर निबंध | Cow Essay In Hindi (2022)

दोस्तो हिन्दी व्याकरण में आज हम आपके लिए लाए है cow essay in hindi जो की बहुत ही सरल भाषा में लिखे हैं। गाय का यूं तो पूरी दुनिया में ही काफी महत्व है, लेकिन भारत देश के संदर्भ में बात की जाए तो प्राचीन काल से ही गाय का अपना एक अलग महत्व रहा है। आज हम कुछ ऐसे ही गाय पर आधारित बेहतरीन निबंध ले कर आए है, जिसमें हमने गाय की विशेषता, उसके उपयोग, गाय की नस्लें आदि के बारे में चर्चा की है | आप हमारे इन निबंधो को स्कूल या कॉलेज में निबंध प्रतियोगिता में लिख सकतें है। और सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं।

cow essay in hindi

Cow Essay In Hindi – गाय पर निबंध


10 lines on cow

प्रस्तावना:

गोहत्यां ब्रह्महत्यां च करोति ह्यतिदेशिकीम्।
यो हि गच्छत्यगम्यां च यः स्त्रीहत्यां करोति च ॥
भिक्षुहत्यां महापापी भ्रूणहत्यां च भारते।
कुम्भीपाके वसेत्सोऽपि यावदिन्द्राश्चतुर्दश ॥

गाय एक महत्त्वपूर्ण पालतू पशु है जो संसार में प्रायः सर्वत्र पाई जाती है। इससे उत्तम किस्म का दूध प्राप्त होता है। गाय को माता (गौमाता) कहते हैं। इसके बछड़े बड़े होकर गाड़ी खींचते हैं एवं खेतों की जुताई करते हैं।

भारत में वैदिक काल से ही गाय का महत्व रहा है। आरम्भ में आदान-प्रदान एवं विनिमय आदि के माध्यम के रूप में गाय उपयोग होता था और मनुष्य की समृद्धि की गणना उसकी गोसंख्या से की जाती थी। हिन्दू धार्मिक दृष्टि से भी गाय पवित्र मानी जाती रही है तथा उसकी हत्या पापों में गिनी की जाती है।

भारत में गाय को सम्मान की नज़रों से देखा जाता है क्योंकि हिंदू धर्म में कहा जाता है कि गाय के अंदर सभी 322 करोड़ देवताओं का वास होता है। साथ ही भारत में रहने वाले लोगों ने गाय को मां की संज्ञा दी है। भारत में गाय का बहुत ख्याल रखा जाता है और गाय की पूजा भी की जाती है।

गाय का संबंध भगवान श्री कृष्ण से भी जुड़ा हुआ है क्योंकि उन्हें गाय बहुत पसंद थी और वे उन्हें खूब प्यार दुलार देते थे।

गाय की रचना:

गाय एक पालतू पशु है जो कि आमतौर पर सभी जगह पर पाई जाती है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 190 मिलियन गायों की जनसंख्या है।
पूरे विश्व भर से ज्यादा गाय हमारे भारत में ही पाई जाती है। गाय की रचना वैसे तो सभी देशों में समान ही पाई जाती है लेकिन गाय की कद काठी और नस्ल में फर्क होता है।

  • कुछ गाय अधिक दूध देती हैं, तो कुछ कम देते है।
  • गाय का शरीर बहुत बड़ा होता है इसका वजन 720 किलो से भी अधिक होता है।
  • गाय का शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा होता है।
  • गाय के दो बड़े कान होते हैं, जिनकी सहायता से वे धीमी धीमी और अधिक तेज आवाज भी सुन सकती है।
  • गाय के दो बड़ी आंखें होती हैं, जिनकी सहायता से भी लगभग 360 डिग्री तक देख लेती है।
  • गाय एक चौपाया पशु है और चारों पैरों में खुर्र होते है, जिसकी सहायता से भी किसी वे किसी भी कठोर स्थल पर चल सकती है।
  • गाय का मुंह ऊपर से चौड़ा और नीचे से पतला होता है। इसके पूरे शरीर पर छोटे-छोटे बाल होते है।
  • गाय के एक लंबी पूछ होती है, जिसकी सहायता से वे अपने शरीर पर लगी हुई मिट्टी को हटाती रहती है।
  • गाय के 4 थन होते हैं और इसकी गर्दन लंबी होती है।
  • गाय के मुंह के सिर्फ निचले जबड़े में 32 दांत पाए जाते है इसीलिए गाय लंबे वक्त तक जुगाली कर के खाने को चबाती है।
  • गाय के एक बड़ी नाक होती है।
  • गाय के दो बड़े सिंग होते है।

भारतीय गाय हमारी माता:

समुद्रमंथन के दौरान इस धरती पर दिव्य गाय की उत्पत्ति हुई। भारतीय गोवंश को माता का दर्जा दिया गया है इसलिए उन्हें गौमाता कहते है। हमारे शास्त्रों में गाय को पूजनीय बताया गया है इसीलिए हमारी माताएं बहनें रोटी बनाती है तो सबसे पहली रोटी गाय के की होती है। गाय का दूध अमृत तुल्य होता है।

भागवत पुराण के अनुसार, समुद्रमंथन के समय पाँच दैवीय कामधेनु निकलीं।

  • नन्दा
  • सुभद्रा
  • सुरभि
  • सुशीला
  • बहुला

गाय का उपयोग:

गाय एक पालतू पशु है इसलिए इसे घरों में पाला जाता है और सुबह शाम इसका दूध निकाला जाता है। एक गाय, एक समय में 5 से लेकर 10 लीटर दूध देती है। कुछ अलग नस्ल की गाय अधिक दूध भी देती है।

  • पुराने जमाने में गायों को खेतों में हल जोतने के काम में भी लिया जाता था।
  • गाय के दूध से दही छाछ पनीर और अन्य दूध से बनने वाली मिठाइयां बना सकते है।
  • गाय के गोबर को सुखाकर ईंधन के काम में लिया जाता है, साथ ही गाय की गोबर का उपयोग खेतों में खाद के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
  • वर्तमान में लोग गायों का मांस भी खाने लगे है जिसे ‘बीफ’ कहा जाता है। गाय अपने पूरे जीवन भर में कुछ ना कुछ देती ही रहती है।
  • गाय के मरणोपरांत इसकी हड्डियों से कई शिल्प कलाकृतियां बनाई जाती है और इसकी खाल को सुखा कर चमड़े के रूप में उपयोग में लिया जाता है।
  • गाय के गोमूत्र को बहुत पवित्र माना गया है और इसके गोमूत्र को आयुर्वेदिक औषधियों के रूप में उपयोग में लिया जाता है, जो कि कई बड़ी बीमारियों को जड़ से खत्म करने में कारगर है।

गाय की नस्लें:

भारत में कई प्रकार की नस्ल की गाय पाई जाती है। जिनमें कुछ अच्छे दूध देने वाली होती है तो कुछ मजबूत शरीर वाली होती हैं जिससे उनके बछड़े भी मजबूत शरीर वाले पैदा होते हैं और उनसे खेतों में हल जोतने के रूप में काम में लिया जाता है।

भारत में पाई जाने वाली गाय की प्रमुख नस्लें:

  • साहीवाल जाति
  • नागौरीए पवाँर
  • भगनाड़ी
  • राठी
  • मालवीए
  • काँकरेज
  • सिंधी
  • दज्जल
  • थारपारकर
  • अंगोल या नीलोर

उपसंहार:

गाय शांतिप्रिय और पालतू पशु है। हमारे भारत में गाय को मां का दर्जा इसीलिए दिया गया है क्योंकि यह में जीवन भर कुछ ना कुछ देती ही रहती है। इसलिए हमें इसके जीवन से कुछ सीख लेनी चाहिए और हमेशा अपने जीवन को शांतिपूर्ण तरीके से जीना चाहिए और दूसरे लोगों से अच्छा व्यवहार करना चाहिए।

गाय का मान ही राम का मान है। राम का जन्म गौ का ही वरदान है॥
गाय के वंश से भूमि हँसती सदा। गाय में राष्टृ की शान वसती सदा॥
गोबर से उर्वरा धरती को करती हैं। चमड़ी भी अपनी हमको अर्पित करती हैं॥
रोमण्रोम जिनका करता है उपकृत हमको। दूधण्दहीण्घृत से पूरित करती जीवन को॥

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cow ka nibandh

प्रस्तावना:

हिंदू धर्म में गाय को विशेष दर्जा दिया जाता हैं। इसे माता का स्वरूप माना गया हैं और कहते हैं की हिंदू धर्म के सभी देव-देवता गाय में वास करतें हैं। इसी लिये गाय का पूजन और इसे चारा देना एक पुण्य का काम माना गया हैं। भारत में दिवाली के उत्सव के दूसरा दिन गोवर्धन पूजा का होता हैं, जिसमें गाय की विशेष रूप से पूजा की जाती हैं। इस दिन गाय को विशेष तौर पर सजाया जाता हैं और इस दिन उसे कई तरह के पकवानोंका भोग चढ़ाया जाता हैं।

गाय की शारीरिक बनावट:

किसी भी अन्य पालतू प्राणी की तरह ही गाय की शारीरिक बनावट होती हैं। जिसे दो सिंगए चार पायए दो आंखे, दो कान, दो नथुने, चार थन और एक बड़ी सी पुंछ होती हैं। गाय के कुछ नस्ल में सिंग नहीं होते। भारत में पायी जानेवाली गाय विदेश की गाय के मुकाबले कद से थोड़ी छोटी होती हैं। गाय की बड़ी पुंछ के नीचे बालों का एक गुच्छा होता हैं जो उसे बदन पर बैठी मक्खी को मारने के काम आता हैं। गाय के पैरों में खुर होतें हैं, जो बहुत हद तक हमारे नाखून की तरह रहते हैं जो गाय को चलते वक्त चोट से बचाने में मदत करते हैं। आम तौर पर गाय एक शांत प्राणी हैं।

“धेनु सदानाम रईनाम” अथर्ववेद में दी गई इस पंक्ति में बताया गया हैं की, गाय समृद्धि का मूल स्त्रोत्र हैं और यह सच भी हैं। आज अगर हम गाय के दूध, मूत्र और गोबर का किया जानेवाला इस्तमाल देखेंगे तो पता चलेगा की सच में गाय समृद्धि लाती हैं।

गाय के फायदे:

गाय के दूध से कई तरह के उत्पाद तयार किए जाते हैं। जैसे की दही, मख्खण, तूप, पनीर, छाछ, आइसक्रीम इत्यादि और गाय के मूत्र और गोबर का इस्तमाल ईंधन और खाद के लिये किया जाता हैं।

गाय का मूत्र दवाई बनाने के लिए भी करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गाय के मूत्र का सेवन करने से हमारे शरीर को अत्यधिक फायदा होता हैं। गाय के मूत्र और गोबर से बना खाद किसी भी प्रकार के और खाद से बेहतर होता हैं। जो न सिर्फ फसल को बढ़ने में मदत करता हैं। साथ में उससे जमीन की गुणवत्ता नैसर्गिक तौर से बढ़ती हैं। आज की खेती का मूल आधार तो गाय के गोबर और मूत्र से बना खाद ही हैं।

गाय के दूध का सेवन अन्य पशुओं के दूध के सेवन से अधिक फायदा दिलाता हैं। नवजात शिशु को अगर दूध की कमी होती है तो उसे गाय का दूध पिलाने की सलाह दी जाती हैं। ऐसा कहते हैं की भैस का दूध बच्चों को सुस्त बनाता हैं, तो गाय के दूध से बच्चों में चंचलता बरकरार रखता हैं जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास होने में मदद होती हैं।

गाय जीवनभर हमारा फायदा करवाती ही हैं। साथ में उसके मौत के उपरांत उसके शरीर के लघबघ सारे अंग उपयोगी साबित होते हैं। जैसे की उसके सिंगए चमड़े और खुर से रोजमर्रा की कई चीजे बनाई जाती हैं और उसके हड्डियों से बना खाद खेती के लिए उपयोगी रहता हैं।

गाय का धार्मिक महत्व:

गोहत्यां ब्रह्महत्यां च करोति ह्यतिदेशिकीम्।
यो हि गच्छत्यगम्यां च यः स्त्रीहत्यां करोति च ॥ २३ ॥
भिक्षुहत्यां महापापी भ्रूणहत्यां च भारते।
कुम्भीपाके वसेत्सोऽपि यावदिन्द्राश्चतुर्दश ॥ २४ ॥ ;संदर्भरू देवीभागवतपुराणम्द्ध

गाय हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसमें गोहत्या को महापातक माना गया हैं। ऐसा माना जाता हैं की हिंदू धर्म के सभी देव-देवता गाय के शरीर में वास करते हैं। हिंदू धर्म पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के वक्त गाय की उत्पति हुई और उसे स्वर्ग में स्थान दिया गया। इसी वजह से कहते हैं, अगर हम पूरी श्रद्धा से गाय की सेवा करें को हमें स्वर्ग प्राप्ति होती हैं।

गो सेवा करने से हमारे मन, वाणी, कर्म और शरीर की पवित्रता संभव हैं। भारत में मनाए जानेवाले सभी उत्सव में गाय के दूध से बने घी का विशेष महत्व हैं। साथ में धार्मिक पूजा-पाठ में भी गाय की पूजा की जाती हैं। विशेष रुप से उसे भोग चढ़ाया जाता हैं जिसे पूजा के संपन्न होने का प्रतीक माना गया हैं।

भारत में पायी जानेवाली गाय की प्रजातियां:

भारत में अलग-अलग जगह पर गाय की अलग-अलग ३० से अधिक प्रजातीय पायी जाती हैं। जिनमें से प्रमुख तौर पर

  • रेड सिन्धी
  • साहिवाल
  • गिर
  • देवनी
  • राठी
  • मालवी
  • भगनाड़ी
  • अंगोल या निलेर
  • थारपारकर

तीन प्रकारों में भारतीय गायों को विभाजित किया जाता हैं:

दुग्धप्रधान एकांगी प्रकार की गाय दूध अधिक मात्र में देती हैं।
वत्सप्रधान एकांगी प्रकार की गाय दूध कम देती हैं, लेकिन इनके बछड़े खेती के काम और गाड़ी खींचने के काम आते हैं।
सर्वांगीन प्रकार की गाय दूध भी अच्छा देती हैं और इनके बछड़े कर्मठ भी होते हैं।

सूर्य के गो-किरण शोषित करने की अद्भुत शक्ति गाय के शरीर में होती हैं जिसके कारण इनसे मिले दूध और दूध से बने घी, दही में आरोग्यवर्धक घटक शामिल होते हैं। गोसेवा करने से घर में समृद्धि आती हैं और घर में आरोग्य और प्रसन्नता वास करती हैं।

विदेश में भी गाय की कई प्रकार के नस्ल पायी जाती हैं। जिनमें से जर्सी गाय सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। विदेश के गाय दूध बहोत मात्र में देते हैं।लेकिन आनुवंशिक रूप से संशोधित होने के कारण उनके दूध और गोबर भारतीय गाय के मुकाबले बहोत ही कम गुणवत्ता होती हैं। मुख्य तौर पर विदेशी गाय मानव के दूध और मांस की जरूरत को पूरा करने के लिए किया जाता हैं। विश्व में आज लगबग़ १३ अरब गाय होने का अनुमान हैं।

उपसंहार:

गाय एक साधारण शाकाहारी प्राणी हैं, जिसे किसी भी साधारण घर में पाला जा सकता हैं। जो घर में दूध की जरूरत पूरी करती हैं। साथ में उस घर के लोगों को आरोग्य और धन-संपत्ति प्रधान करती हैं। गाय के दूध के सेवन से करने से हमारी रोग प्रतिरोध शक्ति बढ़ती हैं। इसीलिए हमें जादा से जादा गाय का सहवास में रहने की कोशिश करनी चाहिये।

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गाय का स्थान सर्वोपरि रखा गया है। माना जाता है की गाय के अंदर 36 करोड़ देवी देवताओं का वास होता हैं। गौपालन प्राचीन काल से ही चला आ रहा हैं। गाय का वास होने से घर के सभी वास्तु दोष अपने आप खत्म हो जाते हैं ओर साथ ही यह भी माना गया है, की घर पर आने वाले सभी संकट को भी गाय अपने ऊपर ले लेती हैं। संस्कृत में गाय को धेनु बोल जाता हैं।

प्रस्तावना:

गाय का दूध सभी के लिए पोषण से भरा होता हैं। यह दूध चाहे किसी नवजात शिशु को दिया जाए या फिर किसी वृद्ध को। गाय एक पालतू पशु है।गाय को माता का दर्जा प्राप्त हैं। घर के मंगल कार्यों में गाय के ही चीजों का प्रयोग होता है, जिसमे गाय के उत्सर्जी पदार्थ का भी उपयोग किया जाता है ओर इसको बहुत पवित्र माना जाता हैं। इसमे पंचगव्य जेसे दूध, दही, घी, गोबर, मूत्र जेसे तत्व शामिल हैं ओर इन्ही तत्वों को औषधिय महत्व भी दिया गया है।

गाय की संरचना:

गाय की शारीरिक संरचना इस प्रकार से है की इसके दो सींग, चार पैर, दो आंखे, दो कान, दो नथुने, चार थन, एक मुंह और एक बड़ी ओर लंबी सी पूँछ होती है। गाय के खुर से उन्हे चलने में मदद मिलती हैं ओर वे खुर जुते का काम भी करते है। साथ ही बाहरी घाव, चोट और झटकों से बचाने में भी मदद करते हैं।

गाय की प्रजातियां पूरे विश्व भर में आपको देखने को मिलेगी जिसमे से कई के सींग बाहर दिखाई नहीं देते ओर कुछ के उभरे हुए होते हैं। भारत को दूध उत्पादन के लिए विश्व भर में सबसे पहला स्थान प्राप्त हैं। यह दूध बेहद ही स्वच्छ, लाभदायक और बहुत पौष्टिक होता है।

गाय के प्रकार:

पूरे भारत वर्ष में गाय कई नस्ल की पाई जाती है। जेसे साहिवाल, सिंधी, नागौरी, भग्नारी, पवार, राठी, मालवी, काँकरेज, सिंधी, दज्जल, थारपारकर, अंगोल या नीलोर तथा गंगातीरी आदि, इन गाय में से कुछ तो अधिक मात्र में दूध उपलब्ध करवाती हैं ओर कुछ काम मात्र में। गाय कई रंगों में देखने को मिलती है जैसे सफेद, काला, लाल, बादामी तथा चितकबरी होती है।

गाय एक चौपाया जानवर है। लेकिन सबसे पहले नंबर पर साहिवाल गाय आती है उसके बाद सिन्धी गाय।साहिवाल गाय एक दिन के भीतर 15-20 लिटर दूध देती हैं।गंगातीरी गाय आपको गंगा के मैदानों में मिलेंगी लेकिन यह दूध भी कम मात्रा में देती हैं।

उपयोगिता:

गाय के दूध से कई प्रकार के पौष्टिक आहार बनते हैं। यह छोटे बच्चों ओर बीमार लोगों के लिए उपयोगी साबित होता हैं। गाय के दूध से हम कई प्रकार की चीज़े बना सकते है जेसे दही, पनीर, मक्खन और घी आदि। गाय के दूध से बच्चों में चंचलता आती हैं। गाय का घी और गोमूत्र अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक दवाइयाँ बनाने के काम भी काम आता है। इसका गोबर सबसे उत्तम खाद्य माना जाता हैं।

गाय एक परोपकारी पशु है, क्योंकि यह अपने जीवित होने पर भी सबके काम आती है ओर मरने के बाद भी काम आती हैं, उसके सींग, चमड़ा, हड्डियां ओर बाकी की यंग किसी न किसी काम मे लिए जाते हैं। इसकी हड्डियों से खाद खेती के काम में ली जाती हैं।

गाय का महत्त्व:

गाय को भारत देश में देवी का दर्जा दिया गया है इसलिए दिवाली के दूसरे दिन में गोवर्धन पूजा के प्रमुख अवसर पर गायों की कई प्रकार से ओर विधि विधान से पूजा की जाती है, उनको मोर पंखों से श्रृंगार करकर तैयार किया जाता हैं। गाय को प्राचीन भारत में सुख ओर समृद्धि का प्रतीक माना गया हैं।

पुराने समय में युद्ध के दौरान सोने के आभूषणों के साथ गायों को भी लूटा जाता था क्योंकि उनको स्वर्ण से लाध दिया जाता था। मान्यताएँ थी की जिस राज्य में जितनी अधिक गायें होगी उसको उतना ही सम्पन्न राज्य माना जाएगा।

भगवान श्री कृष्ण भी गाय प्रेम से भी प्रचलित है जिसके कारण उनका एक नाम गोपालकृष्ण भी बुलाया गया। हिंदू धर्म के अनुसार यह माना जाता है की सबसे बड़ा दान गौ-दान होता है। इसी से सभी को मोक्ष की प्राप्ति मिलती है।

हिंदुओं के सभी तीज-त्योहार पर गाय के घी के उत्पादों को शुद्ध माना जाता हैं। बिना गौ के घी के उनका कार्य पूरे नहीं होता। त्योहार के दिन या उससे पहले सभी लोग घर को गौ के गोबर से लीपते हैं, फिर उसके बाद देवी-देवताओं की मूर्ति को स्थापित किया जाता है।

गाय के दर्शन को कई लोग जरूरी काम को करने से पहले बड़ा शुभ मानते हैं इसके साथ ही गाय के गोबर को खेती के लिए भी बहुत उपयोगी माना गया है। धरती माता के समान गाय को पूजा जाता हैं इसलिए गाय को गौ-माता भी बोला जाता हैं।

उपसंहार:

गाय शुद्ध ओर शाकाहारी भोजन करती हैं। यह हरी घास, चारा, अनाज आदि का सेवन करती हैं। इसको पालने का तरीका बहुत ही सरल है। इसके दूध से रोगों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती हैं।


Cow Ka Essay – गाय पर निबंध इन हिन्दी


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परिचय:

गाय मूलतः एक शाकाहारी जानवर है ये एक पालतू जानवर है। ये बहुत सीधी, शांत और स्वभाव से बहुत कोमल जानवर है।

भारत में, हिंदू धर्म के लोग गाय को ‘गाय’ हमारी माता है, के रूप में दर्शाते हैं। यह बहुत उपयोगी और घरेलू जानवर है। यह हमें बहुत पौष्टिक दूध देती है। यह दुनिया के लगभग हर देश में पाई जाती है। गाय का दूध परिवार के सभी सदस्यों के लिए बहुत स्वस्थ, पौष्टिक और उपयोगी है।

गाय एक स्तनपायी प्राणी है और 9 महीने का गर्भ धारण करती है। एक बार में एक बछड़े को जन्म देती है। आमतौर पर उसे खेतों में हरी घास चरने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

आकार:

शारीरिक संरचना के हिसाब से गाय के दो सींग होते है इसके दो आंखें होती है। गाय के चार पैर और चार थन होते है। इसके एक पूछ होती है। गाय के दो बड़े कान होते है। इसका एक बड़ा और चौड़ा मुख होता है। अपने सींगों से ये अपनी रक्षा करती है। इसका वजन 720 किलो तक हो सकता है।
गाय अनेक रंगों में पायी जाती है जैसे कि काला, सफेद, भूरा इत्यादि।

भोजन:

खाने में हरा चारा खाती है। इसे भूसा, पत्ते और खल भी पसंद हैं। गाय एक बार चारा खाने के बाद पूरे दिन उसे चबाती रहती है यह 1 मिनट में लगभग 50 बार जुगाली, चारे को चबानाद्ध करती है। ये एक बार में 30 से 40 लीटर तक पानी पी जाती है।

महत्व:

यद्यपि गाय पूरे विश्व भर में पाई जाती हैं और पूरे विश्व में एक पालतू जानवर के रूप में पाला जाता है, लेकिन भारत में गाय का अलग ही महत्व है। गाय को भारत में बहुत महत्वपूर्ण पशु माना गया है। इसे हिंदू समाज में माँ का दर्जा दिया गया है।

हिंदू धर्म में गाय को पूज्यनीय माना गया है और गाय की हत्या करना एक बहुत बड़ा अपराध माना जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार गाय के शरीर में देवताओं का वास होता है।

उपयोगिता:

गाय का दूध बहुत पौष्टिक होता है और ये मानव के शरीर के लिये बहुत स्वास्थ्य वर्धक है। हम अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए दैनिक आधार पर गाय का दूध पीते हैं। डॉक्टरों द्वारा मरीजों को गाय का दूध पीने को कहा जाता है। यह माना जाता है, कि नवजात शिशुओं के लिए गाय का दूध अच्छा, स्वस्थ और आसानी से पचने वाला भोजन है। इसलिए इसे आसानी से पाचन विकार वाले रोगियों द्वारा पिया जा सकता है।

गाय का दूध हमें मजबूत और स्वस्थ बनाता है। यह हमें कई तरह के संक्रमण और बीमारियों से बचाता है। यह हमारी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। अगर हम नियमित रूप से पीते हैं, तो गाय का दूध हमारे दिमाग और याददाश्त को तेज बनाता है।

गाय के दूध में प्रोटीन की मात्र सबसे अधिक होती है। इसलिए उसे पिने से शरीर में प्रोटीन की मात्रा संतुलित होती है।

गांवों में गाय के गोबर को सुखाकर ईधन के काम में लिया जाता है। गाय के गोबर का उपयोग खेतों में खाद के रूप में भी होता है।

आर्युवेद के अनुसार गाय के गोमूत्र को बहुत पवित्र माना गया है और इसके गोमूत्र को आयुर्वेदिक औषधियों के रूप में उपयोग में लिया जाता है जिससे कई बीमारियों मे लाभ होता है।

प्रजातियाँ:

पूरे विश्व में भारत में ही सबसे अधिक गाये पायी जाती हैं। हालांकि संसार में अलग-अलग नस्लों की गाये पायी जाती हैं। नस्ल के हिसाब से गाय की दूध देने की क्षमता अलग-अलग होती है। ये एक 10 लीटर से 20 लीटर दूध दे सकती है। अमेरिका, आस्ट्रेलिया जरसी नस्ल की गायें ज्यादा दूध देती हैं। भारत में साहीवाल जाति, नागौरी, पवाँर, भगनाड़ी, राठी, मालवी, काँकरेज, सिंधी, दज्जल, थारपारकर, अंगोल या नीलोर आदि नस्लों की गाये पायी जाती हैं।

भारत में गायों की 2 मुख्य विशेषताएं है:

  • सुन्दर कूबड़
  • गलकंबल

आदिमानवो द्वारा गुफा की दीवारों पर निकली गई तस्वीरों में गाय का चित्र भी मौजूद है। गाय के पुरातन होने का प्रमाण आदिमानव, पाषण युगद्ध काल से भी पाया गया है।

उपसंहार:

कुल मिलाकर हम कह सकते हैं, कि गाय एक शांतिप्रिय पशु है। भारत में गाय को मां का दर्जा इसीलिए दिया गया है क्योंकि वह माँ के समान हमें कुछ न कुछ देती ही रहती है। वह हमारे लिये अनेक तरह से उपयोगी है।


Cow Par Nibandh – गौ माता पर निबंध


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My Cow Essay In Hindi

प्रस्तावना:

भारतीय गाय का अवतरण हमारे कल्याण के लिए हुआ है। भारतीय गाय, गोमाताद्ध में अंहिस, करुणा, ममत्व, वात्सल्य आदि दिव्य गुण होते हैं। सिर्फ गाय को सहलाने से और उसकी आँखों में देखने से तनाव चिंता, डिप्रेशन खत्म हो जाता हैं। भारतीय गाय से ही देवो में देवत्व तथा मानवों में मानवता का निर्माण होता हैं। गोमाता अपनी कृपा शक्ति से पृथ्वी को संतुलित तथा पर्यावरण को शुद्ध रखती हैं।

भारत में गाय का पूजनीय स्थान है। प्राचीन काल में साधु-संत, ऋषि-मुनि अपने आश्रमों में गायें पाला करते थे। महर्षि जाबालि ने तो अपने शिष्य सत्यकाम को गौ सेवा का भार सौंपा था और उन्हें तब तक चराते रहने का आदेश दिया था, जब तक उनकी संख्या दोगुनी न हो जाए। महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र का प्रसंग गाय के प्रति हिन्दुओं की निष्ठा और ललक का प्रतीक है। धर्मपरायण भारत में गाय को माता कहकर सम्मानित किया गया, क्योंकि वह माँ के समान ही हमारा पालन करती है।

गाय की शारीरिक संरचना:

गाय की शारीरिक संरचना की बनावट में गाय के दो सींग, चार पैर, दो आंखे, दो कान, दो नथुने, एक मुंह और एक बड़ी सी पूँछ होती है। गाय के खुर थोडा आगे की ओर निकले होते है, जो उन्हें चलने में मदद करते हैं, और ये खुर एक तरह से उनके जूते का कार्य करते है। जो की इन्हें चोट और झटकों आदि से बचाते है और इनकी पूछ इनके लिए काफी उपयोगी होते है। गाय अपने पूंछ से अपने शरीर से कीटाणु और मक्खियों को भगाते है। उसकी दो मोटी-मोटी प्यारी आँखें होती हैं। इसका रंग-सफेद, लाल, काला और मटमैला होता है।

पौराणिक महत्व:

प्राचीन काल में गाय को अघन्या कहा गया है। पहले वस्तुओं का विनिमय करने के लिए मुद्रा नहीं गाय का प्रयोग करते थे। जिस घर में सर्वाधिक गाय होती थी, वह घर सम्रद्धशाली माना जाता था।

प्राचीन काल में राजा, ब्राह्मणों को गो-दान भी देते थे। जिसमें राजा अपनी गौशाला की स्वस्थ गाय देता था। कन्याओं को भी विवाह के अवसर पर गाय उपहार में दी जाती थी। यज्ञ की समाप्ति पर भी गोदान दिया जाता था।

भारत में गाय को पवित्र पशु माना गया है। इसलिए हिंदू धर्म में गौ माता की पूजा भी की जाती है। गाय दयावान व शांत स्वभाव वाला जानवर है। अतरू गाय धार्मिक, आर्थिक व वैज्ञानिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है।

धार्मिक महत्व:

‘गोवर्धन’ के दिन गोबर को जलाकर उसकी पूजा और परिक्रमा की जाती है। गोबर का प्रयोग खेतों में खाद के लिए भी किया जाता है। गाय के मूत्र का प्रयोग दवाइयां बनाने में भी किया जाता है। अनेक हिन्दू घरों में गायों की प्रतिदिन पूजा होती है। सुबह और शाम को पहली रोटी गाय के लिए निकाली जाती है।

सामाजिक महत्व:

नर गाय को बैल कहते हैं। गाय का बच्चा बछड़ा कहलाता है। बैल को खेती के कामों में, गाड़ी खींचने के लिए, पानी निकालने के लिए उपयोग में लाते हैं। गाय ष्माँष् के स्वर का मधुर उच्चारण करती हैं। हमारे देश भारत में गाय का बहुत ज्यादा महत्व है, चुकी आज भी गाँव के लोगो का जीवन कृषि पर आधारित है, तो ऐसे में गाय की महत्ता को देखते ही गाय की उपयोगिता और भी अधिक बढ़ जाती है।

गाय से गोबर मिलता है जो की खेती के लिए जैविक खाद का कार्य करती है, गोबर से बने उपले, कंडे जलाने के काम में आते है, जो की खाना बनाने ईधन का कार्य करती है। वही दूसरी तरह घरो की लिपाई, पुताई के लिए गाय के गोबर का उपयोग किया जाता है।
यहाँ तक की गाय के गोबर के लिए पूजा के लिए भी उपयोग में लाया जाता है। जिस घर पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है, उस घर के कच्चे स्थानों को गाय के गोबर से लिपाई पुताई किया जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से गाय का महत्व:

गाय का वैज्ञानिक नाम नाम बॉस इंडिकस है। गाय का दूध गुणवत्ता के मामले में आदि जानवरों से कई गुना पौष्टिक एवं ऊर्जावान तथा शक्तिशाली होता है। आज भले ही गाय के दूध का उत्पादन भैंस से कम होता हो परंतु इसके दूध से बने उत्पादों का कोई मुकाबला नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सभी जानवरों में गाय ही एक ऐसा जानवर है जो आक्सीजन लेता है और आक्सीजन छोड़ता है।
जबकि मानव सहित अन्य पृथ्वी के जीवधारी जैसे मानव और पशु, गाय को छोड़ करद्ध आक्सीजन लेते हैं, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। तथा पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं और आक्सीजन छोड़ते हैं।

एक शोध के अनुसार पता चला है की गाय के घी का इस्तेमाल हवन मे करने से आक्सीजन बनती है। गाय के गोबर में विटामिन D12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रेडियोधर्मी को सोखता है। कहते हैं गोबर के उपले जलाने से कीटाणु, मच्छर एवं बिमारियाँ आदि दूर हो जाती है। तथा दुर्गंध भी दूर होती है।

गोबर और गौमूत्र फसल के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। गोबर और गौमूत्र खेतों में डालने से यह खाद का काम करता है। तथा अनाज की फसल की गुणवत्ता बनी रहती है। गाय की मृत्यु के बाद भी गाय के सींग 45 साल तक सुरक्षित बने रहते हैं।

पंचगव्य का निर्माण गाय के दूध, घी, मक्खन, गौमूत्र तथा गोबर से बनता है। पंचगव्य रोग निरोधक के रूप में कार्य करता है। कैंसर वाले व्यक्तियों को भी पंचगव्य सेवन करने के लिए दिया जाता है।

उपसंहार:

गाय एक ऐसा पालतू जानवर है, जो की पूरे विश्व में पाया जाता है, और जगह इसे पालतू जानवर के रूप में ही पाला जाता है। गाय से मिलने वाले फायदों को देखकर इसे उच्च श्रेणी का दर्जा दिया गया है। यानी कोई भी चाहकर गाय पर अत्याचार करता है, तो इसे घोर अपराध माना जाता है और गाय के संरक्षण के लिए अनेक तरह के कानून बनाये गये है। जैसे गाय को काटना, मारना जघन्य अपराध है।

सरकार को चाहिए कि इन गायों के लिए एक गौशाला का निर्माण करे, इन्हें वहाँ रखकर इनकी उचित देखभाल की जाए, जिससे दूध का अधिक उत्पादन हो। ईश्वर का श्रेष्ठ उपहार गाय है, जो उसने मानव के लिए दिया है। भारतीय परम्परा के पूज्य पशुओं में गाय का स्थान सर्वोपरि है। यह परोपकारिणी है। गाय की सेवा सुश्रूषा से परम पुण्य की प्राप्ति होती है। मन की कामनाओं को पूर्ण करने के कारण इसे कामधेनु कहा गया है। ठीक ही कहा है, परोपकारय दुहन्ति गाव:

(Source : Suvichar Kosh)

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