Black Fungus In Hindi – ब्लैक फंगस क्या है? इसके लक्षण और उपचार क्या है? (2022)

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कोरोना की दूसरी लहर के साथ ही एक नई महामारी ने हम सभी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस नई महामारी का नाम ब्लैक फंगस है। भी कोरोनावायरस की तरह ही एक जानलेवा बीमारी है पिछले कई दिनों से आप ब्लैक फंगस इंफेक्शन का नाम सुनते आ रहे होंगे। काले फंगस में आंखों की रोशनी चली जाती है, कई मामलों में व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। इसलिए आज की इस खास पोस्ट black fungus in hindi में हम आपको बताने जा रहे हैं, कि ब्लैक फंगस क्या है? यह किस को ज्यादा प्रभावित करता है, इसके लक्षण क्या है? और ब्लैक फंगस का इलाज क्या है?

ब्लैक फंगस क्या है (Black Fungus In Hindi) –

ब्लैक फंगस का चिकित्सा नाम म्यूकोर्मिकोसिस है। जो एक दुर्लभ और खतरनाक फंगस संक्रमण है जो नाक से मस्तिष्क, आंख, साइनस तक बहुत तेजी से फैलता है, विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहले से ही वातावरण में मौजूद है लेकिन वर्तमान में भारत में यह कोविड 19 से संक्रमित मरीजों को संक्रमित कर रहा है। जो लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हैं या जिनका इम्यून सिस्टम ठीक नहीं है, उनको यह वायरस अधिक प्रभावित कर रहा है।

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ब्लैक फंगस कैसे होता है (How Does Black Fungus Happen) –

  • ब्लैक फंगस संक्रमण खुले वातावरण, मिट्टी और सीलन भरे स्थानों में मौजूद म्यूकोर्माइसेट्स नामक सूक्ष्मजीवों के संपर्क में आने के कारण होता है।
  • यह संक्रमण अक्सर शरीर में साइनस, फेफड़े, त्वचा और मस्तिष्क पर हमला करता है।
  • इस रोग में आंख की नसों के पास फंगल इंफेक्शन जमा हो जाता है, जिससे सेंट्रल रेटिनल आर्टरी में रक्त का प्रवाह रुक जाता है।
  • इस वजह से आंखों की रोशनी चली जाती है।
  • कोरोना संक्रमित मरीजों या फिर कोरोना से ठीक हुए कुछ मरीजों में काले फंगस का संक्रमण देखा गया है।
  • यह संक्रमण आमतौर पर उन लोगों में पाया जाता है जिनका शरीर किसी भी बीमारी से लड़ने में कमजोर होता है।

एम्स दिल्ली की विशेषज्ञ डॉ. अनन्या गुप्ता के मुताबिक, काला फंगस जानवरों से इंसानों में नहीं फैलता है। यह कई अलग-अलग कारणों से कमजोर इम्युनिटी वालों को ही हो सकता है। या लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग करना भी एक कारण हो सकता है।

ब्लैक फंगस के लक्षण (Black Fungus Symptoms) –

जैसा की हमने पढ़ा की ब्लैक फंगस कोई नयी बीमारी नही है परंतु कोरोना के कारण इसका एक भयावाह रूप सामने आया है अगर हम समय पर इसके लक्षणों को पहचान के इसका इलाज शुरू करदें तो इससे बचा जा सकता है तो हम आपको बताते हैं की ब्लैक फंगस के लक्षण क्या है।

  • दांतों में दर्द होना, चबाने में परेशानी हो सकती है
  • शरीर पर कुछ जगहों पर लाली, छाले या सूजन
  • आंखें लाल हो जाती हैं और खोलने और बंद करने में परेशानी होती है
  • दृष्टि की हानि, सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई
  • चेहरे के एक तरफ सूजन, सिरदर्द, जबड़े का दर्द
  • मुंह के अंदर या नाक पर काले निशान हो जाते हैं
  • काले रंग का पानी या नाक के अंदर खून बहना
  • उल्टी और खांसी में खून निकलना
  • शरीर पर कुछ जगहों पर लाली, छाले या सूजन
  • व्हाइट ब्लड सेल का कम होना
  • छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी होना

ब्लैक फंगस से इन लोगों को ज्यादा खतरा –

  • मधुमेह से गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों में ब्लैक फंगस का खतरा हो सकता है।
  • जिनकी इम्युनिटी कोरोना के दौरान स्टेरॉयड लेने से काफी कमजोर हो गई है।
  • अनियंत्रित मधुमेह या उच्च रक्तचाप वाले मरीज।
  • ऐसे मरीज जो लंबे समय से आईसीयू में हैं या लंबे समय से अस्पताल में भर्ती हैं।
  • किसी अन्य खतरनाक बीमारी जैसे कैंसर या अंग प्रत्यारोपण के बाद वाले लोग।
  • एचआईवी या एड्स से संक्रमित व्यक्ति।
  • कैंसर अथवा अंग प्रत्यारोपण जैसी गंभीर परिस्थिति वाला व्यक्ति।
  • पोषण की कमी के कारण जिसमे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गयी हो।
  • समय से पहले जन्म लिए हुए व्यक्ति की immunity कमजोर हो जाती है, ऐसे व्यक्ति।

शरीर को कैसे प्रभावित करता है ब्लैक फंगस –

एक रोगी में यह संक्रमण पहले केवल त्वचा में शुरू होता है, यह सांस के जरिए नाक और फेफड़ों में जाने के अलावा, त्वचा में खून के जरिए या शरीर में किसी घाव के जरिए भी प्रवेश करता है। अगर इसे खाने के साथ खाया जाए तो यह आंत में भी बढ़ सकता है। एक बार स्थापित होने के बाद, यह एक पेड़ की तरह विस्तार करना शुरू कर देता है, जो रक्त वाहिकाओं को बंद करने का काम करता है, जिससे थक्के भी बन सकते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है।

उपचार में सभी मृत और संक्रमित ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी शामिल है। कुछ रोगियों में, ऊपरी जबड़े या कभी-कभी आंख को हटाना पड़ता है। उपचार में एंटी-फंगल थेरेपी का 4 -6 सप्ताह का कोर्स भी शामिल हो सकता है। चूंकि यह शरीर के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित करता है, इसलिए इसके इलाज के लिए चिकित्सक के अलावा न्यूरोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक, सर्जन की एक टीम की आवश्यकता होती है।

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ब्लैक फंगस का परीक्षण (Black Fungus Test) –

ब्लैक फंगस (म्यूकोर्मिकोसिस) का निदान करने के लिए आपका डॉक्टर आपके शरीर की शारीरिक जांच कर सकता है। इसके अलावा, वह आपकी नाक और गले से नमूने ले सकता है और उनका परीक्षण कर सकता है। संक्रमित जगह से टिश्यू बायोप्सी करके भी इस संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई भी किया जा सकता है। जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि फंगल इंफेक्शन शरीर के किस हिस्से में पहुंच गया है।

ICMR की सलाह और ब्लैक फंगस से बचाव (Black Fungus Prevention) –

ब्लैक फंगस इंफेक्शन को लेकर आईसीएमआर ने एडवाइजरी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि ब्लैक फंगस का असर अनियंत्रित डायबिटीज और आईसीयू में ज्यादा दिन बिताने वाले कोविड मरीजों में ज्यादा देखा जा रहा है. यदि इस रोग का समय पर उपचार नहीं किया गया तो यह रोग रोगी के लिए घातक हो सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इसके इलाज और प्रबंधन से जुड़ी एडवाइजरी जारी कर लोगों को सतर्क किया है।

  • अगर आपको डायबिटीज है तो आपको सबसे ज्यादा ब्लैक फंगस डिजीज होने का खतरा रहेगा और इसलिए इस बीमारी को कंट्रोल में रखने के लिए सबसे पहले अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना जरूरी है।
  • यदि आपको डॉक्टर द्वारा स्टेरॉयड निर्धारित किया गया है, तो उन्हें सही समय पर लेना बहुत महत्वपूर्ण है और इसके अलावा, खुराक और इसे लेने की अवधि के बारे में बहुत सावधान रहें।
  • यदि आप कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं और आप ठीक हो गए हैं और इसके अलावा यदि आपको मधुमेह है, तो पूरी तरह से ठीक होने के बाद नियमित रूप से ग्लूकोज के स्तर की जांच और ट्रैकिंग करते रहें।
  • रोजाना नहाते रहें और घर और अपने इस्तेमाल की सभी चीजों की सफाई करते रहें।
  • ऑक्सीजन थेरेपी करते समय आपको साफ और बहुत साफ पानी का इस्तेमाल करना होता है।
    एंटीबायोटिक्स और एंटीफंगल का उपयोग करते समय आपको महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए।
  • अत्यधिक धूल भरी जगह पर जाने से पहले मास्क का प्रयोग करें।
  • खेतों और बागवानी में जूते का प्रयोग करें, और हाथों और पैरों को पूरी तरह से ढकें और यदि संभव हो तो दस्ताने का प्रयोग करें।
  • पहले सात दिन कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच करना बेहद जरूरी है और अस्पताल से छुट्टी के वक्त मरीज की गहन जांच जरूरी है.
  • इस स्थिति में ऑक्सीजन ट्यूब को बार-बार बदलना और इस्तेमाल की गई ऑक्सीजन ट्यूब का दोबारा इस्तेमाल करना काफी खतरनाक हो सकता है। इसलिए एक नई ट्यूब का उपयोग करना बेहतर है।
  • मरीजों को दिन में लगभग 2 बार अपनी नाक धोने की जरूरत होती है।

ब्लैक फंगस का इलाज (Black Fungus Treatment) –

म्यूकोर्मिकोसिस का पता चलते ही आपको उपचार शुरू कर देना चाहिए। ताकि शरीर में संक्रमण को तुरंत खत्म या नियंत्रित किया जा सके। इसके लिए, आपका डॉक्टर कुछ एंटिफंगल दवाओं जैसे एम्फोटेरिसिन-बी, पॉसकोनाज़ोल की IV या गोली लेने के लिए लिख सकता है। कुछ गंभीर मामलों में, संक्रमित क्षेत्रों से ऊतक को शल्य चिकित्सा द्वारा हटा दिया जाता है ताकि यह अन्य क्षेत्रों में न फैले।

कोरोना के बाद वाइट और येलो फंगस का बढ़ता ख़तरा –

देशभर में कोरोना के खतरे के बीच और भी कई बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है कोरोना होने के बाद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से कई बीमारियां अटैक करती हैं। इन्हीं बीमारियों में से एक है काला फंगस , कोरोना की दूसरी लहर में मई के महीने में काले फंगस के मामले सामने आने लगे। इसके बाद सफेद फंगस सामने आया और फिर कुछ इलाकों से पीली फंगस फैलने की भी खबर आई।

वाइट फंगस (White Fungus)

सफेद फंगस काले फंगस से अलग बीमारी है। इसका असली नाम कैंडिडिआसिस है। यह ज्यादातर आईसीयू में भर्ती मरीजों में पाया जाता है। कुछ दिनों से एंटीबायोटिक्स ले रहे हैं। ऐसे में एंटीबायोटिक के साथ-साथ यह फंगल इंफेक्शन भी फैलता है। यह अक्सर आईसीयू में पाया जाता है यह नाखून, गुर्दे, पेट, मस्तिष्क और मुंह के अंदर को प्रभावित कर सकता है।अच्छी बात यह है कि काले कवक की तरह इसका भी इलाज है।

वाइट फंगस के लक्षण (White Fungus Symptoms) –

  • कुछ हद तक यह कोरोना से मिलता-जुलता है और इसके लक्षण भी कोरोना से मिलते-जुलते हैं, फर्क जानना थोड़ा मुश्किल है लेकिन इसमें कुछ अंतर है।
  • सफेद फंगस वाले रोगी के मुंह पर सफेद धब्बे बन जाते हैं।
  • आरटी-पीसीआर टेस्ट में ऐसे कोरोना के मरीज निगेटिव आते हैं। इस बीमारी का वायरस सीधे शरीर में फेफड़ों को प्रभावित करता है, इसलिए शरीर में दर्द की भी शिकायत होती है।
  • बलगम के साथ खांसने और सांस लेने में तकलीफ सफेद फंगस को आमंत्रित करती है।
  • जो लोग कैंसर से पीड़ित हैं और कैंसर का इलाज करा रहे हैं वे बहुत जल्द इस वायरस की चपेट में आ जाते हैं।
  • यह रोग महिलाओं में प्रदर का मुख्य कारण बन सकता है।

वाइट फंगस का इलाज (White Fungus Treatment) –

White Fungus फैलने का मुख्य कारण यह है कि ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ स्वच्छ पानी का उपयोग नहीं किया जाता है, जब भी किसी मरीज को अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया जाता है, तो शरीर में हल्के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लें और समान उपचार करें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी काम न करें। इस रोग के उपचार के दौरान शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम न होने दें, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपचार एवं संबंधित उपचार भी लेना चाहिए।

येलो फंगस (Yellow Fungus) –

Yellow Fungus का scientific नाम म्यूकर सेप्टिकस है। यह अभी तक मनुष्यों में नहीं पाया गया था। मैंने इसके बारे में बहुत कुछ पढ़ा, लेकिन कहीं भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक यह नाक साफ करते समय हो जाने वाले घाव को ठीक नही होने देता. इस घाव से खून और मवाद रिसता रहता है। इसे ब्लैक एंड व्हाइट फंगस से भी खतरनाक माना जा सकता है पीले फंगस का खतरा कोरोना मरीजों को ज्यादा बताया जा रहा है

येलो फंगस के लक्षण (Yellow Fungus Symptoms) –

  • अचानक से बहुत ज्यादा सुस्ती महसूस होना
  • बिना कुछ किए अचानक वजन कम होने लगे
  • भूख नहीं लगना कुछ भी खाने का मन नहीं होना
  • गंभीर घाव है, तो उसके ठीक होने की गति धीमी हो जाती है
  • नाक बंद होना, कुपोषित होना
  • शरीर के कुछ हिस्सों के कार्य का नुकसान
  • आँखों में धुंधली दृष्टि
  • चयापचय प्रणाली की विफलता
  • हृदय गति में अचानक वृद्धि

येलो फंगस का इलाज (Yellow Fungus Treatment) –

  • पीले फंगस से बचाव के उपायों की बात करें तो अपने आसपास साफ-सफाई रखें।
  • पुराने खाने को स्टोर न होने दें, फेस मास्क का सही तरीके से इस्तेमाल करें।
  • इसके साथ ही यह फंगस नमी वाली जगह पर ही पनपता है इसलिए अपने घर या ऑफिस को हवादार बनाएं।
  • इसके साथ ही इसके इलाज के लिए एम्फोटेरेसिन नाम का इंजेक्शन भी दिया जाता है।
  • लेकिन यह इंजेक्शन पूरी चिकित्सकीय सलाह और चिकित्सकीय देखरेख में ही लेना चाहिए।
  • आपको बासी खाना बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।

यह विस्तृत लेख black fungus in hindi काले, सफेद और पीले फंगस के बारे में एक था, यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए दी गई है। किसी भी दवा का प्रयोग न करें या इस बीमारी का इलाज स्वयं न करें। डॉक्टर से परामर्श करना उचित है। यह जानकारी किसी चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है।

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