Bhasha Kise Kahate Hain – भाषा की परिभाषा और भेद हिंदी में (2022)

Bhasha Kise Kahate Hain : नमस्कार दोस्तों हिंदी व्याकरण की आज की पोस्ट में आपका स्वागत है। भाषा एक ऐसा साधन है जिसकी मदद से हम सामने वाले के साथ अपनी आवश्यकताएं, इच्छाएं, प्रसन्नता, घृणा, क्रोध अथवा संतोष दिखाते हैं। भाषा का क्षेत्र व्यापक होता है। इसे सामाजिक साहित्यिक राजनीतिक व्यापारिक आदि मान्यता प्राप्त होती हैं! भाषा का हमारे जीवन में बहुत ही अनोखा महत्व है।

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इसलिए आज की जानकारी पूर्ण पोस्ट भाषा किसे कहते हैं में हम आपके साथ लिखित भाषा किसे कहते हैं, मौखिक भाषा किसे कहते हैं, सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं, bhasha ki paribhasha, इस विषय पर जानकारी साझा कर रहे हैं। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए यहां दी गई जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें। चलिए भाषा से संबंधित पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए के लिए बिना देर किए पोस्ट को पढ़ना शुरू कर करते हैं।

भाषा किसे कहते हैं Bhasha kise kahate hain ?

भाषा एक ऐसा साधन है जिसकी मदद से मनुष्य अपने भावों विचारों को लिखकर बोलकर या संकेत के रूप में सरलता और स्पष्टता के साथ अन्य लोगों तक पहुंचाता है। या पहुंचाने का प्रयास करता है।

भाषा से हमारी योग्यता अयोग्यता सिद्ध होती है। भाषा ही मनुष्य की वास्तविक योग्यता, बुद्धिमता उसके अनुशीलन, विचारों की गंभीरता, उद्देश्य, स्वभाव और सामाजिक स्थिति का परिचय करवाती है।कहने का तात्पर्य है की भाषा बहुत से कार्यों को करने में हमारी मदद करती है।

भाषा कितने प्रकार की होती है Bhasha kitne prakar ki hoti hai –

वैसे तो भाषा को हम दो रूपों में ही स्पष्टतया व्यक्त करते हैं- लिखकर और बोलकर अथवा लिखित भाषा और मौखिक भाषा परंतु भाषा में संकेतिक भाषा का भी अपना एक अलग महत्व हुआ करता है। इसलिए भाषा मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है।

1. मौखिक भाषा (Oral Language)
2. लिखित भाषा (Written Language)
3. सांकेतिक भाषा (Symbolic / Indicative Language)

मौखिक भाषा (Oral Language) –

मौखिक भाषा से आशय है, वह भाषा जिसमें व्यक्ति अपने भावों विचारों को बोलकर किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचाता है या पहुंचाने का प्रयास करता है मौखिक भाषा कहलाती है। इसमें बोलने वाला वक्ता कहलाता है और सुनने वाला श्रोता कहलाता है।
उदा- शिक्षक बोलकर छात्रों को पढ़ाते हैं।

लिखित भाषा (Written Language) –

लिखित भाषा से आशय है, भाषा का वह रूप जिसमें कोई व्यक्ति अपने भावों और विचारों को लिखकर किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करता है। लिखित भाषा कहलाती है। इस भाषा का प्रयोग पत्र लेखन में विद्यार्थियों द्वारा अधिक किया जाता है।
उदा- रमेश पत्र लिख रहा है।

सांकेतिक भाषा (Symbolic / Indicative Language) –

सांकेतिक भाषा वह भाषा जिसमें व्यक्ति अपने भावों विचारों को संकेत या इशारे के रूप में दूसरों तक पहुंचाता है।सांकेतिक भाषा कहलाती है।

इस भाषा का प्रयोग उन लोगों के द्वारा किया जाता है जो बोलने या सुनने में असमर्थ होते हैं। इसलिए ऐसे व्यक्ति इशारों (सांकेतिक भाषा) के द्वारा अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाते हैं।
उदा- हाथ हिलाते हुए बुलाना, आंखों से इशारे करना।

संज्ञा के भेद व उदाहरण
100 विलोम शब्द हिंदी में
संस्कृत में गिनती 1 से 100 तक

भाषा के विविध रूप Bhasha ke kitne roop hote hain

किसी भी देश में भाषा के तीन रूप होते हैं –

1. बोली
2. परिनिष्ठित भाषा
3. राष्ट्रभाषा

बोली –

साधारण शब्दों में हम अपने घरों या समूह में स्थानीय बोलियों का अधिकतर प्रयोग करते हैं उसे ही बोली कहा जाता है। किसी भी देश में बोलियां अपने आप जन्म लेती है। इनकी संख्या हर एक देश में अलग और अनेक होती है। जैसे- भोजपुरी, मलयालम, तेलुगु, निकोबारी, अंडमानी, ब्रज, कुमाऊनी इत्यादि।

परिनिष्ठित भाषा –

इस भाषा का सीधा संबंध व्याकरण से होता है। व्याकरण के साथ बोली को परिष्कृत करने या जोड़ने पर परिनिष्ठित भाषा का निर्माण होता है। इसका सीधा साधा उदाहरण खड़ी बोली है जिसे और बोली की जगह परिनिष्ठित भाषा भी कहा जाता है। व्याकरण से जुड़ी होने के कारण इस भाषा का प्रयोग शिक्षा एवं साहित्य में किया जाता है।

राष्ट्र्भाषा –

जब किसी देश के अधिकतर राज्यों में किसी एक भाषा को अधिक लोगों द्वारा समझा व बोला जाता है! तो वह भाषा राष्ट्रभाषा बन जाती है। जैसे भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी है! क्योंकि हिंदी को भारत के लगभग सभी राज्यों में बोली जाती है।

दूसरे शब्दों में कहे तो ऐसी भाषा जो देशवासियों द्वारा अधिक प्रयोग की जाती है राष्ट्रभाषा कहलाती है।

भाषा और बोली में क्या अंतर है ?

1. बोली का एक सीमित क्षेत्र होता है जबकि भाषा का क्षेत्र बृहद और बड़ा होता है।
2. बोली को सामाजिक मान्यता ही प्राप्त होती है जबकि भाषा को सामाजिक साहित्यिक राजनीतिक व्यापारिक आधी मान्यताएं प्राप्त है।
3. भाषा का अपना गठित व्याकरण होता है। जबकि बोली का कोई व्याकरण नहीं होता है।
4. एक भाषा के अंतर्गत कई बोलियां हो सकती है। लेकिन एक बोली के अंतर्गत कई भाषाएं नहीं होती है।
5. बोली का प्रयोग अपने क्षेत्र के लोग ही करते हैं। जबकि भाषा का प्रयोग पूरा देश करता है।

भाषा पर आधारित प्रश्न- FAQ

Q.1- हिंदी भारत की कौन सी भाषा है?
उत्तर-
हिंदी भारत की संपर्क भाषा है।

Q.2- विश्व में कुल कितनी भाषाएं मान्यता प्राप्त है?
उत्तर-
विश्व में 2796 भाषाएं मान्यता प्राप्त है।

Q.3- भाषा व्यक्त करने के मुख्य रूप से कितने तरीके होते हैं?
उत्तर-
भाषा व्यक्त करने के 3 तरीके होते हैं-
लिखित भाषा, मौखिक भाषा और संकेतिक भाषा।

Q.4- हिंदी भाषा किससे उत्पन्न हुई है?
उत्तर-
हिंदी भाषा संस्कृत से उत्पन्न हुई है।

Q.5- हिंदी भाषा की लिपि क्या है?
उत्तर-
देवनागरी।

Q.6- भाषा के कितने भेद होते हैं?
उत्तर-
भाषा के तीन भेद होते हैं।
मौखिक भाषा, लिखित भाषा और सांकेतिक भाषा।

Conclusion निष्कर्ष –

दोस्तों में आशा करती हूं आज की इस पोस्ट के माध्यम से जो जानकारी मैं आप तक पहुंचाना चाहती थी। उसे पहुंचाने में मैं सक्षम हुई हूं। इस पोस्ट के जरिए मैंने विद्यार्थियों को भाषा के मानक रूप तक पहुंचाने का प्रयास किया है और इसलिए इस पोस्ट को अपना कीमती समय देकर पढ़ने के लिए मैं आप सभी का स्नेह के साथ धन्यवाद करती हूं।

और आपसे आग्रह करती हूं कि इस पोस्ट से संबंधित आपके कीमती विचार कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

आ” की मात्रा के शब्द
“ए” की मात्रा वाले शब्द
धातुओं के नाम हिंदी में

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